कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
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एमएसडीई ने एनएसटीआई बेंगलुरु में ‘कौशलता से उद्यमिता’ सम्मान समारोह में युवा इनोवेटर्स को किया सम्मानित


स्किल्स से स्टार्ट-अप्स तक: डीजीटी ने एनएसटीआई बेंगलुरु में युवा इनोवेटर्स को सम्मानित किया

प्रविष्टि तिथि: 11 MAR 2026 4:01PM by PIB Delhi

भारत के स्किलिंग इकोसिस्टम के भीतर इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भारत सरकार के कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) के प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) के तत्वावधान में, राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (एनएसआईटी), बेंगलुरु में "कुशलता से उद्यमिता: नवोन्मेष प्रोत्साहन स्पर्धा" का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस पहल का उद्देश्य प्रशिक्षुओं को उनके तकनीकी कौशल को अभिनव विचारों और उद्यमशील व्यवसायों में बदलने के लिए प्रोत्साहित करना है, जिससे देश के कुशल युवाओं के बीच उद्यम निर्माण की संस्कृति को बढ़ावा दिया जा सके।

यह कार्यक्रम आदित्य बिड़ला कैपिटल फाउंडेशन (एबीसीएफ) और बिट्स पिलानी के इनक्यूबेटर, पिलानी इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट सोसाइटी (पीआईईडीएस) के सहयोग से क्रियान्वित किया गया। इसका उद्देश्य देश भर के सभी राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (एनएसआईटी) के छात्रों के बीच नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना है।

प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) के महानिदेशक, श्री दिलीप कुमार ने इस अवसर पर अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई और कुशल युवाओं के बीच उद्यमी मानसिकता विकसित करने के महत्व पर जोर दिया, ताकि वे नौकरी चाहने वालों के बजाय नौकरी देने वाले के रूप में उभरें। कौशल विकास के साथ नवाचार के पूरक होने की आवश्यकता पर बल देते हुए, उन्होंने कहा कि तकनीकी दक्षता प्रदान करने के साथ-साथ एक ऐसी संस्कृति विकसित करना भी समान रूप से महत्वपूर्ण है जो प्रशिक्षुओं को रचनात्मक रूप से सोचने और उद्यमशीलता की संभावनाओं को तलाशने के लिए प्रोत्साहित करे।

उन्होंने आगे कहा कि प्रशिक्षुओं और संस्थानों को बड़े सपने देखने और अपने विचारों को ऐसे प्रभावशाली परिणामों में बदलने की दिशा में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जो वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का समाधान कर सकें।

श्री कुमार ने एनएसटीआई इकोसिस्टम के भीतर नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई इस अपनी तरह की पहली पहल की परिकल्पना और कार्यान्वयन के लिए डीजीटी टीम की सराहना की। उन्होंने पीआईईडीएस, बिट्स पिलानी से विजेताओं की मेंटरशिप (मार्गदर्शन) जारी रखने और उनके विचारों को और अधिक परिष्कृत एवं विकसित करने में उनका मार्गदर्शन करने का अनुरोध किया। साथ ही, उन्होंने भविष्य में डीजीटी और एमएसडीई के साथ इस तरह की सहयोगी पहलों को निरंतर बनाए रखने पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम के दौरान, पीआईईडीएस, बिट्स पिलानी द्वारा दिए गए एक आकर्षक प्रस्तुतीकरण में इस कार्यक्रम की यात्रा और प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों को प्रदान की गई मेंटरशिप (मार्गदर्शन) पर प्रकाश डाला गया।

इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में पांच प्रमुख क्षेत्रों—आईटी एवं आईटीईएस, ऑटोमोटिव, अपैरल, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हार्डवेयर, और विनिर्माण को शामिल किया गया था। देश भर से कुल 773 प्रशिक्षुओं ने इस प्रतियोगिता में भाग लिया और अपने तकनीकी प्रशिक्षण पर आधारित अभिनव विचारों और समाधानों का प्रदर्शन किया। मूल्यांकन के कई चरणों के बाद, शीर्ष 15 विचारों को शॉर्टलिस्ट किया गया और अंतिम पिच राउंड में एक विशेषज्ञ जूरी के समक्ष प्रस्तुत किया गया। प्रशिक्षुओं के बीच उद्यमशील सोच को पहचानने और प्रोत्साहित करने के लिए, विजेताओं को क्षेत्रवार नकद पुरस्कार प्रदान किए गए, जिसमें प्रथम पुरस्कार के लिए 1,00,000, द्वितीय पुरस्कार के लिए 75,000 और तृतीय पुरस्कार के लिए 50,00,0 दिए गए।

इस गरिमामयी अवसर पर श्री जी. सी. राममूर्ति, क्षेत्रीय निदेशक, कर्नाटक; श्री हेमंत डी. गंजारे, निदेशक (सीएफआई), डीजीटी; श्रीमती स्वाति सेठी, निदेशक, डीजीटी; कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) के वरिष्ठ अधिकारी, इंडस्ट्री और इनक्यूबेशन सेंटरों के प्रतिनिधि, मेंटर्स, फैकल्टी सदस्य और देश भर के एनएसटीआई इकोसिस्टम के प्रशिक्षु उपस्थित रहे। इन सभी की उपस्थिति ने इस आयोजन को एक वाइब्रेंट प्लेटफॉर्म बना दिया, जहाँ भारत के कौशल विकास इकोसिस्टम से उभरते नवाचार का उत्सव मनाया गया।

यह पहल मंत्रालय के उस व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसके तहत स्किल्ड युवाओं को उनके विचारों को स्थायी उद्यमों में बदलने और भारत के आर्थिक विकास में योगदान देने के लिए सशक्त बनाया जा रहा है।

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पीके/केसी/डीवी/एसएस


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