महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ‘मिशन वात्सल्य’ का कार्यान्वयन कर रहा है, जिसके अंतर्गत देखभाल व संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों तथा कानून से संघर्षरत बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार की सेवाएं और सहायता उपलब्ध कराई जाती हैं
प्रविष्टि तिथि:
11 MAR 2026 4:30PM by PIB Delhi
भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत ‘पुलिस’ और ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ राज्य सूची के विषय हैं। इसलिए मानव तस्करी जैसे अपराधों की रोकथाम और उनके निवारण की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की होती है। ये सरकारें प्रचलित कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत ऐसे अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सक्षम हैं।
राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एनसीआरबी) देश में लापता और बरामद महिलाओं एवं बच्चों से संबंधित आंकड़ों को संकलित व प्रकाशित करता है, जिसे वह अपनी रिपोर्ट 'क्राइम इन इंडिया' में प्रकाशित करता है। यह रिपोर्ट वर्ष 2023 तक उपलब्ध है और इसे यहां www.ncrb.gov.in/crime-in-india-year-wise.html?year=2023&keyword= पर देखा जा सकता है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (जेजे अधिनियम, 2015) के लिए नोडल मंत्रालय है। यह अधिनियम बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण, गरिमा और कल्याण सुनिश्चित करने वाला एक प्रमुख विधिक ढांचा है, जिसका कार्यान्वयन राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किया जाता है। अधिनियम के अंतर्गत राज्य एवं जिला स्तर पर विभिन्न वैधानिक संरचनाओं का प्रावधान किया गया है, जिनमें राज्य बाल संरक्षण समितियां, बाल कल्याण समितियां, किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) और जिला बाल संरक्षण जैसी इकाइयां शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, यह अधिनियम बाल देखभाल संस्थानों (सीसीआई) की स्थापना और संचालन का भी प्रावधान करता है।
किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 27 से 30 के अंतर्गत बाल कल्याण समितियों (सीडब्ल्यूसी) को देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के संबंध में उनके सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने का अधिकार प्रदान किया गया है। साथ ही, उन्हें बाल देखभाल संस्थानों (सीसीआई) के कार्यों और संचालन की निगरानी करने का दायित्व भी सौंपा गया है।
किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 106 के अनुसार, अधिनियम के कार्यान्वयन की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) के प्रशासनों पर है।
किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 107 के तहत, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रत्येक जिले तथा शहर में विशेष किशोर पुलिस इकाई (एसजेपीयू) गठित करने का आदेश दिया गया है। इस इकाई का नेतृत्व पुलिस उपाधीक्षक से कम रैंक के अधिकारी द्वारा नहीं किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक पुलिस थाने में सहायक उप निरीक्षक से कम रैंक के एक अधिकारी को बाल कल्याण पुलिस अधिकारी के रूप में नामित किया जाना आवश्यक है।
मंत्रालय केंद्र प्रायोजित योजना ‘मिशन वात्सल्य’ को राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों के माध्यम से कार्यान्वित कर रहा है, जिसका उद्देश्य देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों (सीएनसीपी) तथा कानून से संघर्षरत बच्चों (सीसीएल) के लिए विभिन्न प्रकार की सेवाएं उपलब्ध कराना है। इन सेवाओं में संस्थागत और गैर-संस्थागत दोनों प्रकार की देखभाल शामिल हैं।
मिशन वात्सल्य के अंतर्गत स्थापित बाल देखभाल संस्थान (सीसीआई) बच्चों को आयु-अनुकूल शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण तक पहुंच, मनोरंजन, स्वास्थ्य सेवाएं, परामर्श व अन्य आवश्यक सहायता प्रदान करते हैं। वहीं, गैर-संस्थागत देखभाल के तहत बच्चों को प्रायोजन, पालक देखभाल, दत्तक ग्रहण और देखभाल सहायता जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ परामर्श एवं समन्वय के माध्यम से एक एकीकृत ‘मिशन वात्सल्य पोर्टल’ विकसित किया है। इस पोर्टल में लापता/मिले हुए बच्चों के लिए ट्रैकचाइल्ड पोर्टल, लापता अथवा देखे गए बच्चों के संबंध में सूचना देने के लिए ‘खोया-पाया’ मॉड्यूल तथा दत्तक ग्रहण से संबंधित ‘केयरिंग्स’ पोर्टल को एकीकृत किया गया है। ट्रैकचाइल्ड पोर्टल को विभिन्न हितधारकों—जैसे गृह मंत्रालय, रेल मंत्रालय, राज्य सरकारों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन, बाल कल्याण समितियों, किशोर न्याय बोर्डों तथा राष्ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण—के सहयोग तथा सहभागिता से कार्यान्वित किया गया है। इस संबंध में एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी की गई है। ट्रैकचाइल्ड के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उनके पुलिस महानिदेशकों तथा अन्य संबंधित हितधारकों सहित, आवश्यक परामर्श एवं दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। यह प्रणाली गृह मंत्रालय के ‘क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम ’ (सीसीटीएनएस) के साथ भी एकीकृत है, जिससे लापता बच्चों से संबंधित दर्ज एफआईआर का मिलान ट्रैकचाइल्ड डेटाबेस से किया जा सकता है। इसके माध्यम से संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस लापता बच्चों का पता लगाने तथा उनकी पहचान करने में सक्षम होती है।
इसके अतिरिक्त, ‘खोया-पाया’ मॉड्यूल के माध्यम से कोई भी नागरिक लापता अथवा देखे गए बच्चों के संबंध में सूचना प्रदान कर सकता है।
इसके अतिरिक्त, मंत्रालय द्वारा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को राज्य तथा जिला स्तर पर लापता बच्चों से संबंधित मामलों के लिए नामित नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करने के निर्देश दिए गए हैं। इन नोडल अधिकारियों का विवरण मिशन वात्सल्य पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। साथ ही, गृह मंत्रालय द्वारा भी मिशन वात्सल्य के संबंध में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नोडल अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने तथा लापता बच्चों के संबंध में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से डेटा एकत्र करने के उद्देश्य से एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
इस योजना के अंतर्गत कठिन परिस्थितियों में बच्चों को 24x7x365 आधार पर आपातकालीन सहायता सेवाएं प्रदान करने के लिए एकीकृत चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) को गृह मंत्रालय की आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली–112 (ईआरएसएस-112) हेल्पलाइन के साथ एकीकृत किया गया है।
यह जानकारी केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।
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पीके/केसी/एनके /डीए
(रिलीज़ आईडी: 2238510)
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