अणु ऊर्जा विभाग
संसदीय प्रश्न: परमाणु क्षेत्र के लिए आयात पर शून्य सीमा शुल्क
प्रविष्टि तिथि:
11 MAR 2026 4:50PM by PIB Delhi
परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आवश्यक वस्तुओं के आयात पर शून्य सीमा शुल्क लागू होने से परियोजना लागत तथा उत्पादित विद्युत की प्रति इकाई लागत में कमी आएगी। इससे ये परियोजनाएं अधिक व्यवहारिक बन जाएंगी।
परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आवश्यक वस्तुओं के आयात पर सीमा शुल्क में छूट मिलने से परियोजनाएं आर्थिक रूप से अधिक व्यवहार्य बनेंगी और उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरों में कमी आएगी। इसके साथ ही SHANTI अधिनियम, 2025 की पृष्ठभूमि में यह कदम निजी क्षेत्र की व्यापक भागीदारी को भी सक्षम बनाएगा।
शून्य सीमा शुल्क व्यवस्था के अंतर्गत जिन उपकरणों को शामिल किए जाने की अपेक्षा है, उनमें महत्वपूर्ण उपकरण जैसे रिएक्टर प्रेशर वेसल (आरपीवी), स्टीम जनरेटर (एसजी), प्रेसराइज़र, टरबाइन तथा विदेशी सहयोग से स्थापित किए जा रहे हल्के वाटर रिएक्टरों के लिए अन्य संबंधित उपकरण शामिल हैं।
आयातित घटकों पर सीमा शुल्क छूट से सीमा शुल्क मंजूरी में लगने वाला समय कम होगा और परियोजनाओं के लिए उपकरणों की तेजी से आपूर्ति संभव हो सकेगी।
सीमा शुल्क में छूट मिलने से परमाणु ऊर्जा क्षमता में तेजी से वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा, जिससे वर्ष 2047 तक 100-गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने के लक्ष्य को हासिल करने में सहायता मिलेगी तथा वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में स्वच्छ ऊर्जा गति को भी बल मिलेगा।
यह जानकारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में राज्य मंत्री(स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष मंत्रालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/पीकेपी
(रिलीज़ आईडी: 2238711)
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