आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय
नारी लीड्स स्वच्छता
महिलाओं के नेतृत्व वाली स्वच्छता पर आधारित स्वच्छ भारत मिशन की एक शहरी पहल
प्रविष्टि तिथि:
12 MAR 2026 12:39PM by PIB Delhi
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर, स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत नारी लीड्स स्वच्छता पहल के ज़रिए महिलाओं ने स्वच्छता और सतत् विकास के लिए आगे बढ़कर नेतृत्व किया। इसमें विभिन्न समुदायों की महिलाओं ने जागरूकता अभियान, स्वच्छता गतिविधियाँ और सामुदायिक सहभागिता का नेतृत्व किया, जिससे यह साफ था कि सशक्त महिलाएं स्थायी तौर पर बदलाव ला सकती हैं। यहाँ विभिन्न शहरी स्थानीय निकायों की कुछ प्रेरणादायक कहानियाँ हैं, जो स्वच्छता आंदोलन को आगे बढ़ाने वाली स्थानीय परिवर्तनकारी महिलाओं को उजागर करती हैं।

अहमदाबाद में, अहमदाबाद नगर निगम की 100 से अधिक महिला स्वच्छता चैंपियनों ने टी20 विश्व कप फाइनल से पहले प्रसिद्ध नरेंद्र मोदी स्टेडियम में एक विशाल जागरूकता अभियान चलाया। जैसे ही हजारों क्रिकेट प्रशंसक इस बड़े मैच के लिए जमा हुए, इन महिलाओं ने दर्शकों से दोस्ताना बातचीत, बैनर और जमीनी मार्गदर्शन के ज़रिए उन्हें कूड़ेदान का उपयोग करने और कूड़ा न फैलाने के लिए प्रोत्साहित किया। भीड़भाड़ वाले प्रवेश द्वारों, गलियारों और स्टैंडों से गुजरते हुए, उन्होंने प्रशंसकों को बार बार याद दिलाया कि क्रिकेट का जश्न मनाने का मतलब स्टेडियम और शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी लेना भी है। उनकी इस पहल से ये ऊर्जावान खेल आयोजन, नागरिकों के गौरव और जिम्मेदार व्यवहार को प्रेरित करने के अवसर में तब्दील हो गया।

वाराणसी नगर निगम ने उत्तर प्रदेश के जिला स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से सफाई मित्रों और जिले भर की महिलाओं के लिए एक विशेष स्तन कैंसर जांच शिविर का आयोजन किया, जिससे एक सामान्य स्वास्थ्य पहल को देखभाल और जागरूकता के मिशन में बदल दिया गया। सुबह से ही तमाम महिलाएं जांच कराने के लिए आगे आईं, जिनमें से कई पहली बार जांच करवा रही थीं, क्योंकि उन्हें यह संदेश साफ समझ में आ चुका था कि शुरुआती पहचान से ही जीवन बचाया जा सकता है। 10,000 से अधिक जांचों के लक्ष्य के साथ, इस अभियान का एक सरल, लेकिन शक्तिशाली उद्देश्य था: जल्दी पहचानें, पूरी देखभाल करें, यह सुनिश्चित करते हुए कि अपने समुदायों के लिए अथक परिश्रम करने वाली महिलाओं को भी वह ध्यान, सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवा मिले, जिसकी वे हकदार हैं।

तिरुवनंतपुरम में, हरिथा कर्मसेना की धनुजा कुमारी ने अपने जीवन के संघर्षों और साहस को 'माय लाइफ इन चेंकलकूलयिल' नामक आत्मकथा में पिरोया। अपने जीवन के सफर में, उन्होंने न केवल स्वच्छता कार्यों का समर्थन किया, बल्कि सामाजिक बुराइयों और पुरानी सोच के खिलाफ भी मजबूती से खड़ी रहीं और व्यक्तिगत कठिनाइयों को गरिमा और दृढ़ता के संदेश में बदल दिया। आज, हौसला देने वाली उनकी ये कहानी, महज़ उनके मोहल्ले से कहीं आगे तक फैल चुकी है, इतनी कि अब कालीकट विश्वविद्यालय और कन्नूर विश्वविद्यालय के छात्र इसका अध्ययन कर रहे हैं और एक नई पीढ़ी को उस महिला की आवाज प्रेरित कर रही है, जिसने साबित किया कि बदलाव अक्सर जमीनी स्तर पर साहस से शुरू होता है।

बोंगईगांव में, पौरो सखी गायत्री चौधरी स्वच्छ भारत मिशन-शहरी असम के तहत एक शांत, लेकिन प्रभावशाली बदलाव ला रही हैं, जो इस सरल सत्य को सिद्ध करता है, जब नारी नेतृत्व करती है, तो स्वच्छता अपने आप आती है। दृढ़ संकल्प और अपने समुदाय के प्रति गहरी जिम्मेदारी की भावना के साथ, गायत्री परिवारों को बेहतर स्वच्छता की आदतें अपनाने और दैनिक जीवन में स्वच्छ आदत को आत्मसात करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। मकसद और गौरव से ओतप्रोत उनका यह सफर दिखाता है कि कैसे एक महिला की प्रतिबद्धता सामूहिक कार्रवाई को जन्म दे सकती है, जागरूकता को स्थायी परिवर्तन में बदल सकती है और स्वच्छ भारत के सपने को साकार करने के करीब ला सकती है।

ऐतिहासिक सूरजकुंड पोखरा में, एक सशक्त स्वच्छता महा-अभियान ने समुदाय को एकजुट किया। मकसद था, अपने पर्यावरण की रक्षा करना और अपने आस-पास के वातावरण को स्वच्छ रखना। स्थानीय महिलाओं ने स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर निशा किन्नर और कई गैर सरकारी संगठनों के स्वयंसेवकों के साथ मिलकर इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लिया और तालाब परिसर में बिखरे प्लास्टिक कचरे को इकट्ठा करने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। उनके सामूहिक प्रयास से करीब 160 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा इकट्ठा किया गया, जिसे वैज्ञानिक तरीके से निपटान के लिए भेजा गया।

स्वच्छ भारत मिशन–शहरी के तहत, विभिन्न समुदायों की महिलाएं स्वच्छ आदत को आकार दे रही हैं और स्वच्छ भारत के आंदोलन को मजबूत कर रही हैं और गायत्री की कहानी इस बदलाव का एक सशक्त उदाहरण है। उनकी कहानी के केंद्र में हिंदुस्तान यूनिलीवर का सुविधा केंद्र है, जो एक लैंगिक रूप से संवेदनशील सामुदायिक स्वच्छता मॉडल है और सभी के लिए शौचालयों पर ध्यान केंद्रित करता है, साथ ही महिलाओं की जरूरतों, सुरक्षा और गरिमा को सर्वोपरि रखता है। स्वच्छ और सुरक्षित स्वच्छता केंद्रों, महिलाओं के नेतृत्व वाले संचालन और सहायक वातावरण के ज़रिए, गायत्री को न केवल बेहतर सुविधाओं तक पहुंच मिली, बल्कि आत्मविश्वास और नेतृत्व की भावना भी मिली। उनकी कहानी दर्शाती है कि कैसे सोच-समझकर तैयार किए गए स्वच्छता समाधान महिलाओं को सशक्त बना सकते हैं, स्वस्थ आदतों को प्रेरित कर सकते हैं और समुदायों को करीब ला सकते हैं।
उत्तर प्रदेश के झांसी से भी नारी-नेतृत्व वाली स्वच्छता की एक सशक्त कहानी सामने आती है, जहाँ मज़बूत इरादों वाली महिलाओं का एक समूह कचरे को उपयोगी वस्तुओं में बदलकर उसे "बेकार" से "आकार" में बदल रहा है। उनके समर्पण और रचनात्मकता के बल पर, कभी बेकार समझी जाने वाली सामग्रियों को अब मूल्यवान उत्पादों में बदला जा रहा है, जो यह साबित करता है कि स्थिरता और आजीविका साथ-साथ चल सकते हैं। उनकी प्रेरणादायक कोशिशों से न केवल कचरा कम हो रहा है, बल्कि समुदायों को बेहतर आदतें अपनाने के लिए भी प्रोत्साहन मिल रहा है।

राजस्थान में सुनीति कुशवाहा और शिल्पी कुमावत, समुदायों के कचरे के प्रति नज़रिए को बदलकर, नारीवाद के नेतृत्व में स्वच्छता का एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर रही हैं। उनकी प्रेरणादायक पहल 'कचरे से कला' के ज़रिए, कचरे को कला के रचनात्मक कार्यों में तब्दील किया जा रहा है, जो यह साबित करता है कि कचरे को भी अगर कल्पना और उद्देश्य के रंगों से रंगा जाए, तो उसके रंग रुप के साथ उसकी कीमत भी बढ़ सकती है। उनके प्रयासों से न केवल कचरा कम हो रहा है, बल्कि जिम्मेदार निपटान और पुनर्चक्रण के बारे में जागरूकता भी फैल रही है, जिससे वे प्रभावी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में सक्रिय योगदानकर्ता बन रही हैं और दूसरों को #स्वच्छआदत अपनाने और स्वच्छ भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।


पीके/केसी/एनएस
(रिलीज़ आईडी: 2238856)
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