जल शक्ति मंत्रालय
जनजातीय और पिछड़े क्षेत्रों में पेयजल एवं स्वच्छता सुविधाएं
प्रविष्टि तिथि:
12 MAR 2026 3:25PM by PIB Delhi
देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को, जिनमें जनजातीय और पिछड़े क्षेत्रों के परिवार भी शामिल हैं, नियमित और दीर्घकालिक आधार पर नल-जल कनेक्शन के माध्यम से निर्धारित गुणवत्ता की पर्याप्त मात्रा में सुनिश्चित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए, भारत सरकार राज्यों के साथ साझेदारी में अगस्त 2019 से जल जीवन मिशन (जेजेएम) - हर घर जल का कार्यान्वयन कर रही है।
जेजेएम ग्रामीण परिवारों को कवर करने के लिए एक सार्वभौमिक दृष्टिकोण अपनाता है। इसके अतिरिक्त, जेजेएम के तहत निधि आवंटित करते समय, ग्रामीण अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति आबादी को प्राथमिकता देने के लिए 10 प्रतिशत भार निर्धारित किया गया है। साथ ही, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति बहुल गांवों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। इसके अतिरिक्त, जेजेएम के तहत निधि के वार्षिक आवंटन का 22 प्रतिशत और 10 प्रतिशत अनुसूचित जाति विकास कार्य योजना (डीएपीएससी) और अनुसूचित जनजाति विकास कार्य योजना (डीएपीएसटी) के लिए अनिवार्य रूप से निर्धारित किया गया है। पिछले तीन वर्षों और चालू वर्ष के लिए डीएपीएससी और डीएपीएसटी के तहत केंद्रीय आवंटन और उपयोग का राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार और वर्षवार विवरण अनुलग्नक-I में दिया गया है।
राज्यों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अनुसूचित जाति बहुल बस्तियों में स्थित 215.65 लाख ग्रामीण परिवारों में से आज तक 176.42 लाख (81.81 प्रतिशत) से अधिक परिवारों को नल-जल कनेक्शन मिल चुका है। इसी प्रकार, अनुसूचित जनजाति बहुल बस्तियों में स्थित 216.43 लाख ग्रामीण परिवारों में से आज तक 162.71 लाख (75.18 प्रतिशत) से अधिक परिवारों को नल-जल कनेक्शन मिल चुका है।
इसके अतिरिक्त, स्वच्छता राज्य का विषय है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) [एसबीएम(जी)] केंद्र प्रायोजित योजना है और एसबीएम(जी) का द्वितीय चरण राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है। प्रत्येक वित्तीय वर्ष की शुरुआत में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को उनकी वार्षिक कार्यान्वयन योजना (एआईपी) में अनुमानित मांगों और उस वित्तीय वर्ष के दौरान केंद्र के पास उपलब्ध बजट के आधार पर समेकित रूप से धनराशि आवंटित की जाती है। आवंटित धनराशि में से 22 प्रतिशत अनुसूचित जाति विकास कार्य योजना (डीएपीएससी) और 10 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति विकास कार्य योजना (डीएपीएसटी) के लिए निर्धारित है। पिछले 3 वर्षों के दौरान एसबीएम(जी) के तहत आवंटित, जारी और व्यय का राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार केंद्रीय हिस्सा अनुलग्नक-II में दिया गया है।
एसबीएम (जी) चरण-II दिशानिर्देशों के अनुसार, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को एसबीएम (जी) के चरण-II के कार्यान्वयन पर आवधिक मूल्यांकन अध्ययन करना चाहिए। पिछले 3 वर्षों में डीडीडब्ल्यूएस द्वारा एसबीएम (जी) के लिए कोई मूल्यांकन नहीं किया गया है, हालांकि विभाग द्वारा कार्यक्रम के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा कार्यान्वयन की प्रगति और निधि के उपयोग की समीक्षा करने के लिए विभिन्न स्तरों पर नियमित रूप से आवधिक समीक्षाएं की जाती हैं।
सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जल जीवन मिशन (जेजेएम) के अंतर्गत वित्तीय अनियमितताओं और कार्यों की घटिया गुणवत्ता के संबंध में विभिन्न स्रोतों जैसे मीडिया रिपोर्ट, स्वतः संज्ञान, जन प्रतिनिधियों, नागरिकों, शिकायत पोर्टल आदि से कुल 18,790 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 635 विभागीय अधिकारियों, 1,020 ठेकेदारों और 155 तृतीय पक्ष निरीक्षण एजेंसियों (टीपीआईए) के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। प्राप्त शिकायतों और अधिकारियों, ठेकेदारों और तृतीय पक्ष एजेंसियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई का राज्यवार विवरण अनुलग्नक-III में दिया गया है। अनियमितताओं में शामिल विभागीय अधिकारियों के विरुद्ध स्थापित प्रक्रियाओं के अनुसार निलंबन, विभागीय जांच और आरोप पत्र जारी करने सहित प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है। ठेकेदारों के मामले में, उल्लंघन की प्रकृति के आधार पर, ब्लैकलिस्टिंग या ब्लैकलिस्टिंग की अनुशंसा, अनुबंधों की समाप्ति, प्रतिबंध, अग्रिम जमा राशि की जब्ती और आर्थिक दंड लगाने जैसी कार्रवाई की गई है। टीपीआईए के संबंध में, संबंधित अधिकारियों को पैनल से हटा दिया गया है, और अन्य मामलों में, कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और रिकवरी आरंभ कर दी गई है।
इसके अतिरिक्त, जेजेएम के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय, प्रक्रियात्मक या गुणवत्ता संबंधी किसी भी उल्लंघन के प्रति शून्य-सहिष्णुता का दृष्टिकोण अपनाने की बार-बार सलाह दी गई है। सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि प्रत्येक शिकायत की विधिवत जांच की जाए, तत्काल जमीनी सत्यापन किया जाए और मिशन की पारदर्शिता तथा जवाबदेही को बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक अनुशासनात्मक, संविदात्मक और कानूनी कार्रवाई बिना किसी अपवाद के की जाए।
इसके अतिरिक्त, विभाग ने जल आपूर्ति योजनाओं की निगरानी और जमीनी स्तर पर सत्यापन को मजबूत करने के लिए कई पहलें की हैं, जिनमें राज्य अधिकारियों के माध्यम से योजनाओं का संयुक्त निरीक्षण , जल अध्ययन सेवा और जल सेवा आकलन शामिल हैं, जिनका उद्देश्य जमीनी स्तर पर सत्यापन करना और जेजेएम के तहत ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करना है ।
जल शक्ति राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
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पीके/केसी/एसकेजे/ओपी
(रिलीज़ आईडी: 2239002)
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