विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
संसदीय प्रश्न: निजी क्षेत्र के अनुसंधान को बढ़ावा देना
प्रविष्टि तिथि:
12 MAR 2026 4:08PM by PIB Delhi
सरकार ने ऊर्जा संक्रमण, डीप-टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), जैव प्रौद्योगिकी और खनन से संबंधित प्रौद्योगिकियों सहित विभिन्न क्षेत्रों में निजी क्षेत्र के अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं। इस संबंध में, सरकार ने 03 नवंबर 2025 को 'अनुसंधान, विकास और नवाचार' (आरडीआई) योजना शुरू की है, जिसके तहत अनुसंधान एवं विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए छह वर्ष में कुल ₹1 लाख करोड़ का परिव्यय निर्धारित किया गया है।
यह योजना रणनीतिक प्रौद्योगिकी क्षेत्रों को लक्षित करती है, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा और ऊर्जा संक्रमण तथा जलवायु कार्रवाई; क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स और अंतरिक्ष जैसी डीप टेक्नोलॉजी; एआई और कृषि, स्वास्थ्य तथा शिक्षा में इसके अनुप्रयोग; जैव प्रौद्योगिकी, बायो-विनिर्माण, सिंथेटिक जीव विज्ञान, फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा उपकरण; और डिजिटल कृषि सहित डिजिटल अर्थव्यवस्था शामिल है। यह योजना उन प्रौद्योगिकियों का भी समर्थन करती है जिनका स्वदेशीकरण रणनीतिक या आर्थिक सुरक्षा के लिए और 'आत्मनिर्भर भारत' को बढ़ावा देने के साथ-साथ जनहित में आवश्यक माने जाने वाले अन्य क्षेत्र या प्रौद्योगिकी के लिए महत्वपूर्ण है।
यह योजना राष्ट्रीय स्तर पर संचालित होती है और अनुमोदित दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रतिस्पर्धी और प्रस्ताव-आधारित तंत्र के माध्यम से कार्यान्वित की जाती है। इस ढांचे के तहत, 'प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड' (टीडीबी) और 'जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद' (बीआईआरएसी) को 'द्वितीय-स्तरीय निधि प्रबंधक' (एसएलएफएम) के रूप में नामित किया गया है। क्रमशः 4 फरवरी 2026 और 13 फरवरी 2026 को परियोजना प्रस्तावों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। ये एसएलएफएम स्टार्ट-अप, कंपनियाँ और उद्योग-नेतृत्व वाले अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं सहित पात्र प्रौद्योगिकी संस्थाओं को वित्तपोषण प्रदान करेंगे; ये संस्थाएँ रणनीतिक और उभरते (सनराइज) क्षेत्रों में टीआरएल 4 और उससे ऊपर के स्तर की प्रौद्योगिकियों का विकास कर रही होंगी।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) 'अंतर्विषयक साइबर-भौतिक प्रणालियों पर राष्ट्रीय मिशन' (NM-ICPS) को कार्यान्वित कर रहा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ₹3,660 करोड़ के परिव्यय के साथ अनुमोदित इस मिशन के तहत, देश भर के शैक्षणिक संस्थानों में 25 'प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र' (टीआईएच) स्थापित किए गए हैं। ये हब एआई और एमएल, रोबोटिक्स, IoT, साइबर सुरक्षा, माइनिंग, क्वांटम टेक्नोलॉजी और फिनटेक जैसे क्षेत्रों में डीप-टेक स्टार्ट-अप और रिसर्च को समर्थन देते हैं। ऐसा ही एक हब, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में खनिजों की खोज से लेकर उनके शुद्धिकरण तक 'टेक्नोलॉजी इनोवेशन इन एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग फाउंडेशन', माइनिंग टेक्नोलॉजी पर फोकस करता है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा समर्थित टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर (टीबीआई) भी स्टार्ट-अप को इनक्यूबेशन सपोर्ट, मेंटरिंग और सीड फंडिंग देकर नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देते हैं; इनमें वे स्टार्ट-अप भी शामिल हैं जो डीप-टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।
अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) ने अपने 'उच्च-प्रभाव वाले क्षेत्रों में उन्नति के लिए मिशन' (MAHA) के तहत कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें 2D इनोवेशन हब, ईवी मिशन, MedTech मिशन, विज्ञान और इंजीनियरिंग के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, और सीआरएम अनुसंधान कार्यक्रम शामिल हैं। ये कार्यक्रम उद्योग-अकादमिक साझेदारी, इन्क्यूबेशन इकोसिस्टम और बहु-स्तरीय जुड़ाव मॉडलों को बढ़ावा देती हैं, ताकि ऊर्जा संक्रमण, डीप-टेक, एआई और बायोटेक जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान के विकास और व्यावसायीकरण को गति दी जा सके; इसमें संबंधित उद्योगों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और स्टार्ट-अप्स की अनिवार्य भागीदारी शामिल है।
एएनआरएफ और डीएसटी के कार्यक्रमों (जिनमें NM-ICPS, अनुसंधान एवं विकास अवसंरचना, NIDHI-iTBI और प्रौद्योगिकी विकास कार्यक्रम शामिल हैं) के तहत झारखंड में तकनीकी संस्थानों और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को सहायता प्रदान करने के लिए स्वीकृत परियोजनाओं, विकसित तकनीकों और दी गई वित्तीय सहायता का विवरण नीचे दिया गया है:
i. राष्ट्रीय वित्त पोषण एजेंसी होने के नाते अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) के पास कोई भी राज्य-विशिष्ट कार्यक्रम नहीं है। इसके सभी कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर पर 'ओपन कॉल्स' (खुले आमंत्रणों) के माध्यम से घोषित किए जाते हैं और पूरे देश के पात्र संस्थानों तथा शोधकर्ताओं के लिए खुले होते हैं, जिनमें झारखंड के संस्थान और शोधकर्ता भी शामिल हैं। पिछले तीन वर्ष के दौरान स्वीकृत परियोजनाओं का कार्यक्रम-वार विवरण नीचे दिया गया है:
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कार्यक्रम का नाम
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मंजूर की गई कुल परियोजनाएँ
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कोर रिसर्च ग्रांट
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77
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विज्ञान में उत्कृष्टता के लिए सशक्तिकरण और समानता के अवसर
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7
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समावेशी अनुसंधान ग्रांट
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2
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MATRICS
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11
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राष्ट्रीय पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप (N-PDF)
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12
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त्वरित नवाचार और अनुसंधान के लिए भागीदारी (PAIR)
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1
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प्रधानमंत्री प्रारंभिक करियर अनुसंधान ग्रांट
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20
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रामानुजन फेलोशिप
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1
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वैज्ञानिक और उपयोगी गहन अनुसंधान उन्नति (SUPRA)
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1
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SERB-POWER ग्रांट
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7
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प्रस्तावों के लिए विशेष आह्वान
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2
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स्टार्ट-अप अनुसंधान ग्रांट
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35
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राज्य विश्वविद्यालय अनुसंधान उत्कृष्टता (SERB SURE)
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2
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अनुसंधान उत्कृष्टता के लिए शिक्षक एसोसिएटशिप (TARE)
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3
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ii. झारखंड में तकनीकी संस्थानों और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को सहायता प्रदान करने के लिए, 'इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम पर राष्ट्रीय मिशन' (एनएम- आईसीपीएस) के तहत 'प्रौद्योगिकी नवाचार हब' (टीआईएच) द्वारा अनुमोदित परियोजनाओं, विकसित तकनीकों और प्रदान की गई वित्तीय सहायता का विवरण इस प्रकार है:
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संस्थान का नाम
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परियोजना का विवरण
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राशि (रु.)
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झारखंड तकनीकी विश्वविद्यालय
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सीपीएस टेक्नोलॉजी को लागू करने के लिए TEXMiN-JUT केंद्र स्थापित किया गया है।
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50.0 लाख
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बीआईटी सिंदरी
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सिंदरी परिसर में TEXMiN-BIT सिंदरी केंद्र स्थापित किया गया है
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50.0 लाख
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एनआईटी जमशेदपुर
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हाथ से पकड़े जाने वाले ड्रोन-कम्पैटिबल माइक्रोवेव स्कैनर के विकास के लिए टेक्नोलॉजी विकास परियोजना दी गई है
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20.95 लाख
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सीआईएमएफआर, धनबाद
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मल्टीस्पेक्ट्रल-आधारित कोयला विकास के लिए परियोजनाएं दी गई हैं
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70.0 लाख
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आईएसएम धनबाद
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आईएसएम धनबाद को सीपीएस प्रौद्योगिकियों विशेष रूप से खनिज अन्वेषण और खनन के लिए विभिन्न परियोजना दी गई हैं।
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3+ करोड़
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पीएमआरसी, धनबाद
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कोयला-बेड मीथेन कुओं से निकलने वाले पानी के ट्रीटमेंट के लिए एआई -संचालित सीपीएस सिस्टम के विकास की परियोजना
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60.0 लाख
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iii. अनुसंधान एवं विकास अवसंरचना डिवीज़न, राष्ट्रीय अनुसंधान इकोसिस्टम को मजबूत करने के उद्देश्य से, शैक्षणिक और तकनीकी संस्थानों में अनुसंधान सुविधाओं की स्थापना और उन्हें अद्यतन करने के लिए बनाई गई योजनाओं को लागू करता है। इन योजनाओं को पूरे देश में प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से लागू किया जाता है। झारखंड में स्वीकृत परियोजना और दी गई वित्तीय सहायता का विवरण नीचे दिया गया है:
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कार्यक्रम का नाम
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विवरण
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राशि (रु.)
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विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी (एसएंडटी) बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए कोष (एफआईएसटी)
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पिछले पाँच वर्षों में, झारखंड के 5 संस्थानों (आईआईटी-धनबाद, बीआईटीएस-मेसरा, झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय, एनआईटी जमशेदपुर और बीआईटी सिंदरी) के 13 STEM विभागों को एफआईएसटी के तहत सहायता प्राप्त हुई।
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13.55 करोड़
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विश्वविद्यालय अनुसंधान और वैज्ञानिक उत्कृष्टता को बढ़ावा (PURSE)
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झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय को PURSE के तहत सहायता प्रदान की गई है।
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5.26 करोड़
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iv. झारखंड में निधि-समावेशी प्रौद्योगिकी व्यापार इनक्यूबेटर (निधि-iTBI) कार्यक्रम के तहत स्वीकृत परियोजनाओं और प्रदान की गई वित्तीय सहायता का विवरण नीचे दिया गया है:
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क्र. सं.
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कार्यक्रम का नाम
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मेजबान संस्थान का नाम
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शहर/राज्य
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स्वीकृत राशि
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1
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निधि समावेशी प्रौद्योगिकी व्यापार इनक्यूबेटर (निधि-iTBI)
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राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जमशेदपुर
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जमशेदपुर, झारखंड
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रु. 3,30,64,600
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v. झारखंड में प्रौद्योगिकी विकास कार्यक्रम के तहत स्वीकृत परियोजनाओं और प्रदान की गई वित्तीय सहायता का विवरण नीचे दिया गया है:
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क्र. सं.
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कार्यक्रम का नाम
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संस्थान का नाम
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स्वीकृत लागत
(रु. में)
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1
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एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजीज़ (एएमटी)
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CSIR-NML
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46,53,674
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2
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आईआईटी (आईएसएम) - धनबाद
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50,81,546
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3
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CSIR-NML
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6,35,35,040
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4
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अपशिष्ट प्रबंधन टेक्नोलॉजीज़ (डब्ल्यूएमटी)
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CSIR-NML
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65,81,692
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5
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टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट प्रोग्राम (टीडीपी)
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एनआईटी-जमशेदपुर
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30,06,960
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6
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एनआईटी-जमशेदपुर
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12,98,450
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7
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बायोमेडिकल डिवाइस और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट (बीडीटीडी)
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जगन्नाथ नगर कॉलेज, रांची विश्वविद्यालय
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14,00,764
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8
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निधि समावेशी टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर (निधि-iTBI)
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एनआईटी -जमशेदपुर
|
3,30,64,600
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अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) को हाल ही में शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य शिक्षा जगत, उद्योग और सरकार के बीच सहयोग को बढ़ावा देकर, और उच्च-प्रभाव वाले अनुसंधान और नवाचार कार्यक्रमों का समर्थन करके राष्ट्रीय अनुसंधान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के कार्यक्रमों का समय-समय पर तीसरे पक्ष से मूल्यांकन और राष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञ सलाहकार समितियों के माध्यम से आकलन किया जाता है, और ऐसे मूल्यांकनों से प्राप्त सिफारिशों पर, जहाँ भी आवश्यक हो, कार्यक्रमों में सुधार और विस्तार के लिए विचार किया जाता है।
यह जानकारी विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/पीके
(रिलीज़ आईडी: 2239338)
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