जनजातीय कार्य मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

प्रधानमंत्री वनबंधु कल्याण योजना

प्रविष्टि तिथि: 12 MAR 2026 4:26PM by PIB Delhi

केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने लोकसभा को सूचित किया कि अनुसूचित जनजातियों के लिए मैट्रिक-पूर्व छात्रवृत्ति, अनुसूचित जनजातियों के लिए मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति, विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) का विकास/प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमन), जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को सहायता, परियोजना प्रबंधन इकाइयों के लिए प्रशासनिक सहायता और प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना (पीएमएएजीवाई) जिसे संशोधित रूप में धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) के रूप में शामिल किया गया है, ये सभी प्रधानमंत्री वनबंधु कल्याण योजना (पीएमवीकेवाई) के अम्ब्रेला के अंतर्गत कल्याणकारी योजनाएं हैं।

सरकार गुजरात के दाहोद जिले सहित देश में अनुसूचित जनजातियों और जनजातीय बहुल क्षेत्रों के विकास के लिए एक रणनीति के रूप में अनुसूचित जनजातियों के लिए विकास कार्य योजना (डीएपीएसटी) को लागू कर रही है। जनजातीय कार्य मंत्रालय के अलावा, 41 मंत्रालय/विभाग अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और गैर-अजजा आबादी के बीच विकास संबंधी अंतर को पाटने और शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, सिंचाई, सड़क, आवास, विद्युतीकरण, रोजगार सृजन, कौशल विकास आदि से संबंधित विभिन्न जनजातीय विकास परियोजनाओं के लिए डीएपीएसटी के तहत जनजातीय विकास के लिए हर साल अपने कुल योजना बजट का कुछ प्रतिशत आवंटित कर रहे हैं। अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए बाध्यकारी मंत्रालयों/विभागों द्वारा आवंटित निधियों के साथ योजनाएं केंद्रीय बजट दस्तावेज के व्यय प्रोफाइल के विवरण 10ख में निम्नलिखित लिंक https://www.indiabudget.gov.in/doc/eb/stat10b.pdf में दी गई हैं

राज्य सरकारों को राज्य में अनुसूचित जनजाति (अजजा) आबादी (जनगणना 2011) के अनुपात में कुल योजना आवंटन के अंतर्गत टीएसपी निधियां आवंटित करनी होती हैं। राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों द्वारा अपने स्वयं के निधियों (कोष) से टीएसपी के लिए किए गए आवंटन और व्यय का ब्यौरा https://statetsp.tribal.gov.in पर उपलब्ध है।

मंत्रालय ने डीएपीएसटी के तहत विभिन्न मंत्रालयों/विभागों के पास उपलब्ध धनराशि के अभिसरण के माध्यम से अजजा के विकास के लिए दो मिशन - प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमन) और धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान शुरू किए हैं।

पीएम जनमन: सरकार ने 18 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में रहने वाले 75 पीवीटीजी समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमान) शुरू किया है। इस मिशन का उद्देश्य 3 वर्षों में सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण तक बेहतर पहुंच, सड़क और दूरसंचार संपर्क, बिना विद्युत वाले घरों का विद्युतीकरण और स्थायी आजीविका के अवसर जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना है। इन उद्देश्यों को 9 लाइन मंत्रालयों द्वारा कार्यान्वित 11 उपायों के माध्यम से पूरा करने की योजना है, जिनमें छात्रावास और सचल चिकित्सा इकाइयां (एमएमयू) शामिल हैं। पीएम जनमन का कुल बजटीय परिव्यय 24,104 करोड़ रुपये (केंद्र सरकार का हिस्सा: 15336 करोड़ रुपये और राज्य सरकार का हिस्सा: 8768 करोड़ रुपये) है।

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए): माननीय प्रधानमंत्री ने 2 अक्टूबर, 2024 को धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) का शुभारंभ किया। इस अभियान में 17 लाइन मंत्रालयों द्वारा कार्यान्वित 25 उपाय शामिल हैं और इसका उद्देश्य 63,843 गाँवों में बुनियादी ढाँचे की अंतरों को दूर करना, स्वास्थ्य, शिक्षा, आंगनवाड़ी सुविधाओं तक पहुँच में सुधार करना और आजीविका के अवसर प्रदान करना आदि है। इस अभियान से 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 549 जिलों और 2,911 ब्लॉकों में 5 करोड़ से अधिक जनजातीय लोगों को 5 वर्षों की अवधि में लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है। इस अभियान का कुल बजटीय परिव्यय 79,156 करोड़ (केंद्रीय हिस्सा: ₹56,333 करोड़ और राज्य हिस्सा: ₹22,823 करोड़) रुपये है।

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के प्रभावी कार्यान्वयन, समन्वय और निगरानी को सुनिश्चित करने के लिए राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर समितियाँ गठित की गई हैं। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय सर्वोच्च समिति (एसएलएसी) का गठन किया गया है। जमीनी स्तर पर पहलों का कार्यान्वयन सुगम बनाने के लिए जिला स्तर पर, जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक जिला स्तरीय समिति और ब्लॉक स्तर पर, विभिन्न विभागों के अधिकारियों से मिलकर बनी ब्लॉक स्तरीय कार्यान्वयन टीमें (बीएलआईटी) गठित की गई हैं।

नीति आयोग, सीएस और सीसीएस योजनाओं की प्रभावशीलता और कार्यान्वयन का आकलन करने के लिए तृतीय-पक्ष एजेंसियों के माध्यम से उनका मूल्यांकन करता है। नीति आयोग ने वित्त वर्ष 2024-25 में समाप्त हुए ईएफसी चक्र के लिए एक मूल्यांकन अध्ययन किया है। मूल्यांकन की गई योजनाओं में प्रधानमंत्री वनबंधु कल्याण योजना (पीएमवीकेवाई), पीएम जनमन (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों का विकास), अनुसूचित जनजाति छात्रों के लिए मैट्रिक-पूर्व और मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्तियां और जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) को सहायता शामिल हैं। कुछ प्रमुख निष्कर्ष नीचे संक्षेप में दिए गए हैं:

अनुसूचित जनजाति (एसटी) छात्रों के लिए मैट्रिक-पूर्व और मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति योजनाओं ने शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने और जनजातीय छात्रों के लिए स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा में निरंतरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, निधि जारी करने और छात्रवृत्ति वितरण में देरी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। लाभार्थियों में सीमित जागरूकता और आवेदन एवं नवीनीकरण प्रक्रिया में कठिनाइयों की भी शिकायतें मिली हैं। प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए शिकायत निवारण प्रणालियों को मजबूत करना, प्रक्रियाओं को सरल बनाना और पहुंच तंत्र में सुधार करना आवश्यक है।

प्रधानमंत्री वनबंधु कल्याण योजना (पीएमवीकेवाई) ने विभिन्न क्षेत्रीय उपायों के अभिसरण (समन्वय) के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास और सेवा प्रदायगी में सुधार लाने में योगदान दिया है। इस योजना ने जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और बुनियादी ढांचे की कमियों (अंतरों) को दूर करने में मदद की है। हालांकि, राज्यों में कार्यान्वयन में भिन्नता, निधि के उपयोग में देरी और जमीनी स्तर पर सीमित निगरानी ने परिणामों को प्रभावित किया है। योजना के प्रभाव को बढ़ाने के लिए विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करना और निगरानी ढांचे में सुधार करना आवश्यक है।

पीएम जनमन (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के लिए विकास उपाय) ने पीवीटीजी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और मूलभूत सेवाओं तक पहुंच में सुधार किया है और इन समुदायों के बीच कल्याणकारी योजनाओं की कवरेज को बढ़ाया है। लाभार्थियों ने आवास, कनेक्टिविटी और सामाजिक सेवाओं तक बेहतर पहुंच की सूचना दी है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर जागरूकता, सेवा प्रदायगी और योजनाओं के समन्वय में अभी भी कमियां (अंतर) हैं। बेहतर परिणामों के लिए कार्यान्वयन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और दूरदराज के इलाकों तक लक्षित पहुंच आवश्यक है।

जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) को सहायता प्रदान करना नीतिगत अनुसंधान, जनजातीय संस्कृति के प्रलेखन और जनजातीय विकास के लिए साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण बना हुआ है। हालांकि, मूल्यांकन में कर्मचारियों की कमी, सीमित अनुसंधान क्षमता और निधि के उपयोग में देरी जैसी समस्याएं उजागर हुई हैं। संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ करने, अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार करने, शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने और मजबूत निगरानी तंत्र स्थापित करने की आवश्यकता है ताकि टीआरआई जनजातीय विकास के लिए प्रभावी ज्ञान और नीतिगत सहायता केंद्र के रूप में कार्य कर सकें।

कुल मिलाकर, मूल्यांकन में यह बात सामने आई है कि यद्यपि इन योजनाओं ने जनजातीय कल्याण और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, फिर भी जनजातीय क्षेत्रों में अधिक प्रभावी कार्यान्वयन और बेहतर परिणामों को सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता सृजन, निधि प्रवाह तंत्र, निगरानी प्रणालियों और योजनाओं के बीच अभिसरण (समन्वय) में सुधार की आवश्यकता है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान, गुजरात में जनजातीय साहित्य, संस्कृति और सामुदायिक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलें आयोजित की गईं। प्रमुख आयोजनों में जनजातीय साहित्य, कला, संस्कृति और परंपरा पर राष्ट्रीय स्तर का जनजातीय लेखक सम्मेलन; आठ जनजातीय बहुल जिलों - नर्मदा, भरूच, तापी, सूरत, वलसाड, डांग, बनासकांठा और अरावली - में जनजातीय समुदायों और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के लिए 31 जागरूकता कार्यक्रमों जिसमें सिकल सेल एनीमिया की जांच, स्वास्थ्य शिविर, कौशल विकास, करियर मार्गदर्शन, शैक्षिक योजनाओं के बारे में जागरूकता, जैविक खेती और जल प्रबंधन शामिल थे; और आदि विश्वविद्यालय में शैक्षणिक पाठ्यक्रम में राठवा नृत्य, पिथौरा चित्रकला और बांस हस्तशिल्प जैसी जनजातीय कला और सांस्कृतिक रूपों का एकीकरण शामिल थे, की एक श्रृंखला आयोजित की गई।

एक उत्कृष्ट कार्य के रूप में, जनजातीय लेखक सम्मेलन में 200 से अधिक शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया, जिसमें 35 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, इससे विद्वतापूर्ण संवाद को बढ़ावा मिला और टीआरआई गुजरात की संस्थागत क्षमताओं को मजबूती मिली। जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं और महिलाओं सहित 3,580 लाभार्थियों को प्रमुख विकासात्मक विषयों के बारे में जागरूक किया गया। इसके अलावा, आदि संस्कृति पोर्टल और आदि संपदा पहलों के तहत, गुजरात की जनजातीय सांस्कृतिक विरासत का सतत संरक्षण, प्रलेखन और व्यापक मान्यता सुनिश्चित करते हुए जनजातीय विरासत से संबंधित 100 से अधिक विषयों को एक जनजातीय डिजिटल ई-अकादमी मंच में शामिल किया गया।

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