औषधि विभाग
उर्वरकों और दवाओं की उपलब्धता
प्रविष्टि तिथि:
13 MAR 2026 3:40PM by PIB Delhi
उर्वरक विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पूरे देश में प्रत्येक मौसम में पर्याप्त और समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा निम्नलिखित कदम उठाए जाते हैं:
(i). प्रत्येक फसल मौसम के प्रारंभ होने से पहले, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (डीए एंड एफडब्ल्यू), सभी राज्य सरकारों के परामर्श से, राज्यवार एवं माहवार उर्वरकों की आवश्यकता का आकलन करता है।
(ii). कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा अनुमानित आवश्यकता के आधार पर, उर्वरक विभाग मासिक आपूर्ति योजना जारी करके राज्यों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक आवंटित करता है और उपलब्धता की निरंतर निगरानी करता है।
(iii). पूरे देश में सभी प्रमुख सब्सिडी वाली उर्वरकों की आवाजाही की निगरानी एकीकृत उर्वरक निगरानी प्रणाली (आईएफएमएस) नामक एक ऑनलाइन वेब-आधारित निगरानी प्रणाली द्वारा की जाती है।
(iv). राज्य सरकारों को नियमित रूप से उत्पादकों और आयातकों के साथ समन्वय स्थापित करने का परामर्श दिया जाता है ताकि समय पर ऑर्डर जारी करके आपूर्ति को सुव्यवस्थित किया जा सके।
(v). कृषि एवं किसान कल्याण विभाग और उर्वरक विभाग द्वारा राज्य के कृषि अधिकारियों के साथ संयुक्त रूप से नियमित साप्ताहिक वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाती है और राज्य सरकारों से प्राप्त जानकारी के अनुसार उर्वरक भेजने के लिए सुधारात्मक कार्रवाई की जाती है।
(vi). राज्य के भीतर जिला स्तर पर उर्वरकों का वितरण संबंधित राज्य सरकार द्वारा किया जाता है।
वर्तमान में, औषधियों की कीमतें औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश 2013 (डीपीसीओ, 2013) के प्रावधानों के अनुसार विनियमित हैं। डीपीसीओ, 2013 के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रकाशित आवश्यक औषधियों की राष्ट्रीय सूची (एनएलईएम) पर आधारित डीपीसीओ, 2013 की अनुसूची-I में निर्दिष्ट दवाओं की अधिकतम मूल्य सीमा निर्धारित करके दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करता है। एनपीपीए डीपीसीओ, 2013 के पैरा 2(1)(यू) के अंतर्गत परिभाषित नई दवाओं का खुदरा मूल्य भी निर्धारित करता है। नई दवा का खुदरा मूल्य आवेदक निर्माता और विपणनकर्ता पर लागू होता है, जिन्हें एनपीपीए द्वारा अधिसूचित मूल्य के भीतर नई दवा बेचनी होती है। गैर-अनुसूचित दवाओं के मामले में, निर्माताओं को पिछले 12 महीनों के दौरान ऐसी दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि नहीं करनी होती है। निर्धारित और गैर-निर्धारित दोनों प्रकार के फॉर्मूलेशन की कीमतों की निगरानी एक सतत प्रक्रिया के रूप में की जाती है और उपभोक्ताओं से अधिक कीमत वसूलने या डीपीसीओ, 2013 के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है।
इसके अलावा, उपभोक्ता जागरूकता प्रचार और मूल्य निगरानी (सीएपीपीएम) योजना को 2018 से एनपीपीए (फार्मास्युटिकल्स विभाग) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मूल्य निगरानी और संसाधन इकाइयां (पीएमआरयू) स्थापित की जाती हैं जो मूल्य परिवर्तनों से संबंधित जानकारी के प्रसार के लिए सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) गतिविधियां संचालित करती हैं।
इसके अलावा, एनपीपीए देश में दवाओं की उपलब्धता पर नज़र रखता है और किसी भी दवा की अनुपलब्धता का मामला उसके संज्ञान में आने पर सुधारात्मक उपाय करता है। बाज़ार में किसी दवा की अनुपलब्धता से संबंधित शिकायतें एनपीपीए को विभिन्न स्रोतों से प्राप्त होती हैं, जिनमें राज्य औषधि नियंत्रक (एसडीसी), फार्मा जन समाधान पोर्टल, एनपीपीए हेल्पलाइन और पीएमओपीजी/सीपीग्राम जैसे जन शिकायत पोर्टल तथा व्यक्ति शामिल हैं। एनपीपीए संबंधित क्षेत्र/राज्य में उक्त दवा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य अधिकारियों और दवा निर्माता के साथ समन्वय में तत्काल उपाय करता है। हालांकि, उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से दवाओं की कमी/अनुपलब्धता की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
इसके अलावा, भारत सरकार द्वारा सभी नागरिकों को किफायती दामों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना शुरू की गई थी। इस योजना के अंतर्गत, पूरे देश में जन औषधि केंद्र नामक विशेष केंद्र खोले गए हैं। ये केंद्र ब्रांडेड दवाओं की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत से 80 प्रतिशत तक सस्ती दवाएं उपलब्ध कराते हैं, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य देखभाल खर्च को कम करने में सहायता मिलती है।
इस योजना में 2,110 दवाइयों और 315 चिकित्सा उपकरणों और उपभोग्य सामग्रियों का एक व्यापक उत्पाद समूह शामिल है, जो सभी प्रमुख चिकित्सीय समूहों को शामिल करता है। इनमें हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह, संक्रमण, एलर्जी और पाचन संबंधी विकारों के उपचार के लिए दवाइयाँ, साथ ही पोषक तत्व उत्पाद शामिल हैं, जो जनता के लिए किफायती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करते हैं।
इस योजना के अंतर्गत, 28.02.2026 तक पूरे देश में कुल 18,646 जन औषधि केंद्र (जेएके) खोले गए हैं, जिनमें से 3,944 जेएके उत्तर प्रदेश राज्य में हैं, जिनमें अमरोहा जिले के 29 जेएके शामिल हैं।
जेएके में उपलब्ध दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, निरंतर निरीक्षण, परीक्षण और मानकीकरण सुनिश्चित करने के लिए ठोस व्यवस्था स्थापित की गई हैं, ताकि मरीजों के स्वास्थ्य से समझौता न हो। इनमें निम्नलिखित व्यवस्था शामिल हैं:
(i). केवल डब्ल्यूएचओ गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (जीएमपी) प्रमाणित संयंत्रों से आपूर्ति: केवल वे संयंत्र जो प्रत्यक्ष निरीक्षण के बाद केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) द्वारा डब्ल्यूएचओ-जीएमपी के अनुरूप प्रमाणित किए गए हैं, आपूर्ति के लिए पात्र हैं।
(ii). सभी दवा बैचों के 100 प्रतिशत पूर्व-परीक्षण के बाद ही वितरण: पीएमबीआई के गोदामों में आपूर्ति किए गए सभी बैचों से गुमनाम रूप से परीक्षण के लिए नमूने लिए जाते हैं और गुणवत्ता परीक्षण पास होने के बाद ही जेएके को आपूर्ति के लिए दवाएं भेजी जाती हैं।
(iii). केवल गुड लेबोरेटरी प्रैक्टिस (जीएलपी) के अनुरूप प्रयोगशालाओं में परीक्षण: नमूनों का परीक्षण केवल राष्ट्रीय परीक्षण और अंशांकन प्रयोगशाला बोर्ड (एनएबीएल) द्वारा मान्यता प्राप्त और समय-समय पर निरीक्षण की जाने वाली प्रयोगशालाओं में किया जाता है और इसके अतिरिक्त, पीएमबीआई द्वारा जीएलपी अनुपालन के लिए मूल्यांकन किया जाता है।
जन औषधि केंद्रों (जेएके) में महत्वपूर्ण और जीवन रक्षक दवाओं सहित दवाओं की प्रभावी और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
(i). सितंबर 2024 से, 200 सामान्य रूप से उपयोग की जाने वाली दवाओं के जेएके द्वारा स्टॉक करने को प्रोत्साहित किया गया है, जिसमें योजना उत्पाद बास्केट में 100 सबसे अधिक बिकने वाली दवाएं और बाजार में 100 तेजी से बिकने वाली दवाएं शामिल हैं, जिसके अंतर्गत जेएके मालिक इन दवाओं के अपने द्वारा रखे गए स्टॉक के आधार पर मासिक प्रोत्साहन के पात्र हैं।
(ii). एक संपूर्ण सूचना-प्रौद्योगिकी-सक्षम आपूर्ति श्रृंखला प्रणाली स्थापित की गई है ताकि 5 गोदामों और देश भर में वितरकों के बढ़ते नेटवर्क से युक्त एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला प्रणाली को जोड़ा जा सके।
(iii) इसके अतिरिक्त, सामान्यतः उपयोग होने वाले उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, योजना कार्यान्वयन एजेंसी {भारतीय औषधि और चिकित्सा उपकरण ब्यूरो (पीएमबीआई)} द्वारा तेजी से बिकने वाले 400 उत्पादों की नियमित निगरानी की जाती है और इनकी मांग का निरंतर पूर्वानुमान लगाया जाता है। साथ ही, खरीद प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए पूर्वानुमान पद्धति को डिजिटल बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।
जनऔषधि केंद्रों के माध्यम से आपूर्ति की जाने वाली दवाओं की स्वीकार्यता को बढ़ावा देने के लिए, जनऔषधि दवाओं के लाभों के बारे में लक्षित जागरूकता अभियान नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं:
(i). जागरूकता अभियान : भारतीय औषधि और चिकित्सा उपकरण ब्यूरो (पीएमबीआई), जो पीएमबीई के लिए कार्यान्वयन एजेंसी है, केंद्रीय संचार ब्यूरो, पीआईबी, माईगॉव और माई भारत जैसे निकायों और प्लेटफार्मों के समन्वय में विभिन्न माध्यमों जैसे प्रिंट, टेलीविजन, रेडियो, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, आउटडोर होर्डिंग्स, सामुदायिक सहभागिता आदि के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाता है।
(ii). इंटरैक्टिव संदेश/कॉल : जनऔषधि उत्पादों की गुणवत्ता और निकटतम जेएके से इन्हें खरीदने से होने वाली भारी बचत के बारे में नागरिकों को सूचित करने के लिए व्हाट्सएप चैटबॉट और आउटबाउंड कॉल के माध्यम से जनसंपर्क और नागरिक सहभागिता भी की जाती है।
रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
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पीके/केसी/एमकेएस/
(रिलीज़ आईडी: 2239744)
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