औषधि विभाग
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उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना

प्रविष्टि तिथि: 13 MAR 2026 3:45PM by PIB Delhi

सरकार ने भारत में महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्रियों (केएसएम), औषधि मध्यवर्ती (डीआई) और सक्रिय फार्मास्युटिकल अवयवों (एपीआई) के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) योजना को मंजूरी दी है, जिसे सामान्यतः ‘थोक औषधियों के लिए पीएलआई योजना’ के रूप में जाना जाता है। इस योजना के लिए कुल 6,940 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है और इसकी अवधि वित्त वर्ष 2022-23 से वित्त वर्ष 2028-29 तक है। इस पहल का उद्देश्य 41 चिन्हित महत्वपूर्ण उत्पादों के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करना, आयात पर निर्भरता को कम करना और एक ही स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता से उत्पन्न आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े जोखिमों को घटाना है।

अधिसूचित 41 उत्पादों में से 33 उत्पादों के लिए स्वीकृति आदेश जारी किए जा चुके हैं तथा 4,329.95 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश के साथ 48 ग्रीनफील्ड परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इस प्रतिबद्ध निवेश के मुकाबले 4,814.1 करोड़ रुपये का वास्तविक निवेश पहले ही किया जा चुका है। दिसंबर 2025 तक, अधिसूचित 28 उत्पादों से संबंधित 38 परियोजनाएं उत्पादन शुरू कर चुकी हैं। इसके परिणामस्वरूप लगभग 56,800 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष की घरेलू उत्पादन क्षमता स्थापित हुई है। साथ ही, दिसंबर 2025 तक लगभग 4,896 व्यक्तियों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं।

घरेलू जैव-औषधीय क्षेत्र को सुदृढ़ करने तथा बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स के क्षेत्र में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने ‘बायोफार्मा शक्ति योजना’ की घोषणा की है। इस योजना के लिए पांच वर्षों की अवधि में 10,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इस पहल का उद्देश्य भारत में किफायती स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना तथा देश को वैश्विक जैव-औषधीय विनिर्माण और नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स के क्षेत्र में एक वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है। बायोफार्मा शक्ति पहल का लक्ष्य उच्च मूल्य वाले जैव-औषधीय उत्पादों और दवाओं के घरेलू विकास एवं विनिर्माण को प्रोत्साहित करना, आयात पर निर्भरता को कम करना तथा वैश्विक बायोलॉजिक्स आपूर्ति श्रृंखला में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करना है।

उपरोक्त के अतिरिक्त, रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए इस क्षेत्र में विभिन्न उपाय कर रहा है, जो इस प्रकार हैं:

पेट्रोलियम, रसायन और पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्र (पीसीपीआईआर): रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से विभाग ने पेट्रोलियम, रसायन एवं पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्र (पीसीपीआईआर) नीति अधिसूचित की है। पीसीपीआईआर को साझा बुनियादी ढांचे और सहायक सेवाओं के साथ क्लस्टर-आधारित विकास मॉडल के रूप में परिकल्पित किया गया है। इस नीति के तहत दहेज (गुजरात), विशाखापत्तनम–काकीनाडा (आंध्र प्रदेश) और पारादीप (ओडिशा) में तीन पीसीपीआईआर स्थापित किए गए हैं। वर्तमान में इन पीसीपीआईआर क्षेत्रों में 2,246 रासायनिक इकाइयाँ कार्यरत हैं, जिनमें कुल 3,49,192 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है तथा इनसे लगभग 3.7 लाख लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है।

प्लास्टिक पार्क योजना: विभाग पेट्रोकेमिकल्स की नई योजना के अंतर्गत प्लास्टिक पार्कों की स्थापना को प्रोत्साहित कर रहा है। यह योजना आवश्यक अत्याधुनिक अवसंरचना और साझा सहायक सुविधाओं से युक्त आवश्यकता-आधारित प्लास्टिक पार्कों की स्थापना को बढ़ावा देती है। इसका उद्देश्य प्लास्टिक प्रसंस्करण उद्योग की क्षमताओं को मजबूत और समन्वित करना, ताकि इस क्षेत्र में निवेश, उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा मिले तथा रोजगार के अवसरों का सृजन हो सके। इस योजना के तहत भारत सरकार राज्य सरकारों को परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान करती है, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति परियोजना 40 करोड़ रुपये है। योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार, अब तक 9 प्लास्टिक पार्कों को स्वीकृति दी जा चुकी है, जो वर्तमान में विभिन्न चरणों में कार्यान्वयनाधीन हैं।

विभाग ने बुनियादी ढांचे से संबंधित इन कार्यक्रमों के अतिरिक्त, अनुसंधान और विकास तथा मानव संसाधन विकास के उद्देश्य से निम्नलिखित गतिविधियां भी संचालित की हैं।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई): रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग ने उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना के लिए एक योजना तैयार की है। इसका उद्देश्य शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थानों को अनुदान सहायता प्रदान करना है ताकि वे मौजूदा प्रौद्योगिकी में सुधार कर सकें और पॉलिमर एवं प्लास्टिक के नए अनुप्रयोगों के विकास को बढ़ावा दे सकें। इस योजना के तहत, भारत सरकार कुल परियोजना लागत के 50 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिसकी अधिकतम सीमा 5 करोड़ रूपये है। अब तक इस योजना के तहत 18 उत्कृष्टता केंद्रों को मंजूरी दी जा चुकी है।

सीआईपीईटी के माध्यम से कौशल विकास और मानव संसाधन विकास: केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईपीईटी), रसायन एवं पेट्रोकेमिकल विभाग के अंतर्गत एक प्रमुख तकनीकी शिक्षा संस्थान है, जो देश में पेट्रोकेमिकल तथा संबंधित उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कौशल विकास, प्रौद्योगिकी सहायता तथा शैक्षणिक और अनुसंधान गतिविधियों में सक्रिय रूप से संलग्न है।

रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज लोकसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/एनके/एसएस  


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