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मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए उठाए गए कदम

प्रविष्टि तिथि: 13 MAR 2026 4:36PM by PIB Delhi

देश में मातृ मृत्यु दर घटकर प्रति लाख जीवित जन्म 88 हुई; पिछले तीन वर्षों में देश में 5.93 करोड़ से अधिक संस्थागत प्रसव हुए

जननी सुरक्षा योजना एवं जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम नकद प्रोत्साहन एवं शून्य-लागत देखभाल के साथ संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दे रहे हैं

मातृ मृत्यु को रोकने के विशेषज्ञ जांच एवं प्रोत्साहन के माध्यम से पीएमएसएमए और विस्तारित पीएमएसएमए के अंतर्गत उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं को ट्रैक किया जाता है

लाक्श्या और सुमन सम्मानजनक एवं उच्च गुणवत्ता वाली प्रसव कक्ष देखभाल सुनिश्चित करते हैं, जिसमें सेवाओं से इनकार नहीं किया जाता

प्राथमिक रेफरल यूनिट, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग और प्रसव गृह जैसी बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के उन्नयन से मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) में देशव्यापी स्तर पर कमी लाने के लिए पहुंच, स्क्रीनिंग एवं समय पर मध्यवर्तम में सुधार हुआ है

Posted On: 13 MAR 2026 4:36PM by PIB Delhi

भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा 2021-23 के लिए मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) जारी नवीनतम बुलेटिन के अनुसार, देश की एमएमआर प्रति लाख जीवित जन्म 88 है। राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के अनुसार एमएमआर का विवरण अनुलग्नक I में दिया गया है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत, भारत सरकार ने देश के ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्रों सहित सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए विभिन्न पहलें की हैं जिससे मातृ स्वास्थ्य लक्ष्यों के साथ-साथ सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को भी प्राप्ति की जा सके। ये पहलें निम्नलिखित हैं:

जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए एक मांग प्रोत्साहन और सशर्त नकद हस्तांतरण योजना है।

जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (जेजेएसके) सभी गर्भवती महिलाओं को जो सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव करती हैं, पूर्णतः निःशुल्क और बिना किसी खर्च के प्रसव, जिसमें सिजेरियन सेक्शन शामिल है, का अधिकार देता है।

इन सुविधाओं में मुफ्त दवाएं, उपभोग्य वस्तुएं, ठहरने के दौरान मुफ्त भोजन, मुफ्त निदान, मुफ्त परिवहन और आवश्यकता पड़ने पर मुफ्त रक्त संचारण शामिल हैं। एक वर्ष तक के बीमार शिशुओं के लिए भी इसी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) गर्भवती महिलाओं को हर महीने की 9 तारीख को एक निश्चित दिन, नि:शुल्क, सुनिश्चित और गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व जांच की सुविधा प्रदान करता है, जो किसी विशेषज्ञ/चिकित्सा अधिकारी द्वारा की जाती है।

विस्तारित पीएमएसएमए रणनीति गर्भवती महिलाओं, विशेष रूप से उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं (एचआरपी) को गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल (एएनसी) सुनिश्चित करती है और पीएमएसएमए दौरे के अलावा अतिरिक्त 3 दौरों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन के माध्यम से पहचान की गई उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं और उनके साथ आने वाली आशा कार्यकर्ताओं के लिए सुरक्षित प्रसव प्राप्त होने तक व्यक्तिगत एचआरपी ट्रैकिंग सुनिश्चित करती है।

लाक्श्या प्रसव कक्ष और प्रसूति ऑपरेशन थिएटरों में देखभाल की गुणवत्ता में सुधार लाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान एवं प्रसव के तुरंत बाद सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण देखभाल प्राप्त हो।

सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन) सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में आने वाली प्रत्येक गर्भवती महिला एवं नवजात शिशु को नि:शुल्क और बिना किसी इनकार के सुनिश्चित, गरिमापूर्ण, सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करता है, ताकि सभी रोकने योग्य मातृ एवं नवजात मृत्यु को समाप्त किया जा सके।

प्रसवोत्तर देखभाल को अनुकूलित करने का उद्देश्य माताओं में खतरे के संकेतों का पता लगाने और उच्च जोखिम वाली प्रसवोत्तर माताओं की शीघ्र पहचान, रेफरल एवं उपचार के लिए मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा) को प्रोत्साहित करके प्रसवोत्तर देखभाल की गुणवत्ता को मजबूत करना है।

आंगनवाड़ी केंद्रों में मासिक ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) एक आउटरीच गतिविधि है जो आईसीडीएस के साथ समन्वय में मातृ एवं शिशु देखभाल सेवाओं के प्रावधान को सुनिश्चित करती है।

स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बढ़ावा देने के लिए, विशेष रूप से जनजातियय एवं दुर्गम क्षेत्रों में, आउटरीच शिविरों का आयोजन किया जाता है। इसका उपयोग मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने, सामुदायिक लामबंदी करने और उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं पर नज़र रखने के लिए किया जाता है।

गर्भवती महिलाओं को आहार, आराम, गर्भावस्था के खतरे के संकेत, लाभ योजनाओं और संस्थागत प्रसव के बारे में जानकारी देने के लिए मातृ एवं शिशु संरक्षण (एमसीपी) कार्ड और सुरक्षित मातृत्व पुस्तिका वितरित की जाती है।

अवसंरचना को मजबूत करना, जिसमें प्राथमिक रेफरल इकाइयों (एफआरयू) का संचालन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) विंग की स्थापना, प्रसूति उच्च निर्भरता इकाइयों एवं गहन देखभाल इकाइयों (ऑब्स्टेट्रिक एचडीयू और आईसीयू) का संचालन, दुर्गम भूभाग, दूरस्थ एवं जनजातिय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं तक बेहतर पहुंच और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए प्रसव प्रतीक्षा गृहों (बीडब्ल्यूएच) की स्थापना शामिल है।

देश में मातृ मृत्यु दर में कमी लाने में संस्थागत प्रसव एवं प्रसवपूर्व देखभाल की महत्वपूर्ण भूमिका है। कुशल प्रसव सहायकों (एसबीए) की सहायता से स्वास्थ्य संस्थानों में होने वाले प्रसव गर्भावस्था, प्रसव या प्रसवोत्तर काल में उत्पन्न होने वाली जटिलताओं के प्रबंधन में सहायक होते हैं।

प्रसवपूर्व देखभाल गर्भावस्था का शीघ्र पंजीकरण, नियमित स्वास्थ्य जांच, स्क्रीनिंग एवं उच्च जोखिम वाली गर्भधारण की पहचान, आयरन और फोलिक एसिड, कैल्शियम और विटामिन डी3 जैसे आवश्यक पूरक दवाओं का प्रावधान और जन्म की तैयारी एवं जटिलताओं के प्रबंधन पर परामर्श सुनिश्चित करती है, जिससे समय पर रेफरल एवं जटिलताओं का प्रबंधन संभव हो पाता है।

पिछले तीन वर्षों में संपन्न संस्थागत प्रसवों की संख्या अनुलग्नक II में दी गई है।

यहा जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

पीके/केसी/एके


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