रेल मंत्रालय
इस वित्त वर्ष में अब तक भारतीय रेलवे के 24 डिवीजन में 90% से अधिक तक समय की पाबंदी रही; 19 डिवीजनों में 80-90% तक समय की पाबंदी दर्ज हुई
लोको पायलटों को जीपीएस आधारित पोर्टेबल 'फॉग सेफ डिवाइस' (एफएसडी) दिए गए; कोहरे में सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करने के लिए संशोधित अर्ध-स्वचालित स्टॉप सिग्नल सिस्टम शुरू किया गया
एकीकृत आईटी सिस्टम, एडवांस निगरानी प्रणाली, एलएचबी कोच इंडक्शन, एआई-आधारित समय सारिणी विश्लेषण और नई पीढ़ी के उच्च क्षमता वाले लोकोमोटिव का इस्तेमाल समय की पाबंदी में सुधार ला रहा है
प्रविष्टि तिथि:
13 MAR 2026 5:21PM by PIB Delhi
ट्रेन सेवाओं की समय की पाबंदी का मापन समाप्त होने के आधार पर किया जाता है और इसे निर्धारित समय सीमा के भीतर गंतव्य स्टेशन पर पहुंचने वाली ट्रेनों के प्रतिशत के तौर पर व्यक्त किया जाता है।
समय की पाबंदी की निगरानी:
- भारतीय रेलवे (आईआर) में समय की पाबंदी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। आईआर ट्रेनों को समय पर चलाने के लिए हर संभव प्रयास करता है। ट्रेनों की समय पर पाबंदी की नियमित, लगातार और वास्तविक समय में निगरानी सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी उपकरण और आईटी सिस्टम स्थापित किए गए हैं।
- आईआर (इंजीनियरिंग अथॉरिटी) ट्रेनों के संचालन की निगरानी के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रही है, जिसमें एकीकृत कोचिंग प्रबंधन प्रणाली (आईसीएमएस) और नियंत्रण कार्यालय का इस्तेमाल (सीओए) शामिल हैं, जो राष्ट्रीय ट्रेन पूछताछ प्रणाली (एनटीईएस) से एकीकृत हैं।
- ट्रेनों की चाल से समय की स्वचालित प्राप्ति के लिए लगातार प्रगति की जा रही है, जिसके लिए लोकोमोटिव में जीपीएस उपकरण लगे हैं {त्वरित समय पर ट्रेन सूचना प्रणाली (आरटीआईएस) और लोकोमोटिव और ट्रेनों की दूरस्थ निगरानी और प्रबंधन (आरईएमएमएलओटी)} और स्टेशन सिग्नलिंग प्रणाली से एकीकृत डेटा लॉगर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
- डेटा लॉगर स्टेशनों पर यात्री ट्रेनों के आगमन/ प्रस्थान की त्वरित समय पर और सटीक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं।
- भारतीय रेलवे पारंपरिक डिब्बों (आईसीएफ डिब्बों) को अत्याधुनिक तकनीक से लैस आधुनिक हल्के एलएचबी डिब्बों से बदल रहा है। भारतीय रेलवे की उत्पादन इकाइयां अप्रैल 2018 से केवल एलएचबी डिब्बों का निर्माण कर रही हैं। एलएचबी डिब्बों का निर्माण कई वर्ष से लगातार बढ़ रहा है और अब तक 50,000 से अधिक एलएचबी डिब्बों का निर्माण हो चुका है। भारतीय रेलवे वंदे भारत, नमो भारत रैपिड रेल और अमृत भारत जैसी त्वरित आधार पर गति बढ़ाने और कम करने वाली ट्रेनों का भी तेजी से संचालन कर रहा है।
- समय की पाबंदी में सुधार लाने के लिए, भारतीय रेलवे समय सारणी का युक्तिकरण भी करता है। ऐसा ही एक वैज्ञानिक अभ्यास आईआईटी-मुंबई की सहायता से उनके ट्रैफिक सिमुलेटर का इस्तेमाल करके किया गया। इस अभ्यास का उद्देश्य सभी खंडों पर निश्चित एकीकृत रखरखाव ब्लॉक स्थापित करना भी था, जिससे देरी को कम किया जा सके और समय की पाबंदी में सुधार किया जा सके।
- ट्रेनों को सही ढंग से चलाने के लिए नई पीढ़ी के उच्च क्षमता वाले लोकोमोटिव का इस्तेमाल किया जा रहा है।
- इसके साथ ही, कोहरे के असर को कम करने और लोको पायलटों को कोहरे की स्थिति में ट्रेन चलाने में सहायता करने के लिए भारतीय रेलवे की ओर से निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:
(क) जीपीएस पर आधारित कोहरे से सुरक्षा वाला उपकरण – लोको पायलटों को ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) आधारित पोर्टेबल 'कोहरे से सुरक्षा उपकरण' (एफएसडी) प्रदान किया जा रहा है, जो कोहरे जैसी कम दिखने वाली स्थिति में आने वाले महत्वपूर्ण स्थलों जैसे कि सिग्नल, लेवल क्रॉसिंग गेट, स्थायी गति प्रतिबंध आदि को पहले से प्रदर्शित करता है। इस उपकरण का इस्तेमाल विशेष रूप से सर्दियों के मौसम में सुरक्षित ट्रेन संचालन के लिए और कम दिखने की स्थिति में लोको पायलटों पर तनाव कम करने में सहायक होता है। 31.01.2026 तक, भारतीय रेलवे में 29848 कोहरे से सुरक्षा उपकरण उपलब्ध हैं।
(ख) संशोधित अर्ध-स्वचालित स्टॉप सिग्नल (एमएएसएस) प्रणाली: कोहरे और खराब मौसम जैसी असामान्य स्थितियों में, जब दिखना कम हो जाता है, तो स्वचालित सिग्नलिंग क्षेत्र में एमएएसएस प्रणाली लागू की गई है। यह प्रणाली कोहरे वाले मौसम में ट्रेनों के संचालन में होने वाली देरी को कम करने में सहायक होती है।
कोहरे और कम दिखने की स्थिति में ट्रेन का संचालन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का एक अनिवार्य घटक है और इसे लोको पायलटों (एलपी) और सहायक लोको पायलटों (एएलपी) के लिए निर्धारित प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के परिवहन मॉड्यूल और तकनीकी मॉड्यूल में पहले ही शामिल कर लिया गया है।
परिणाम:
इन पहलों के चलते, भारतीय रेलवे ने 2025-26 के दौरान (फरवरी 2026 तक) 77% से अधिक की कुल समय की पाबंदी दर्ज की।
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डिवीजन की संख्या
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समय की पाबंदी का प्रतिशत
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24
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90% से अधिक की समय की पाबंदी
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19
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80% से 90% के मध्य समय की पाबंदी
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भारतीय रेलवे के सभी डिवीजन
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77%
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चुनौतियां:
ट्रेनों के समय पर चलने को कई आंतरिक और बाहरी कारक प्रभावित करते हैं, जिनमें कोहरा, मार्ग संबंधी बाधाएं, संपत्ति रखरखाव, अलार्म चेन का टूटना, आंदोलन, मवेशियों का कुचल जाना और अन्य अप्रत्याशित परिस्थितियां शामिल हैं। ट्रेनों के संचालन को प्रभावित करने वाली प्रमुख चुनौतियां इस प्रकार हैं:
1. मिश्रित यातायात - एक ही पटरी पर अलग-अलग गति वाली कई प्रकार की ट्रेनें चलती हैं। वंदे भारत, मेल/ एक्सप्रेस, यात्री ट्रेनें, उपनगरीय ट्रेनें, मालगाड़ियां, सैन्य साजो-सामान, इंजीनियरिंग मशीनें आदि अलग-अलग गति वाली ट्रेनें एक ही पटरी का इस्तेमाल करती हैं। इससे मालगाड़ियों और अन्य ट्रेनों की तुलना में यात्री ट्रेनों को प्राथमिकता देने की जरूरत पैदा होती है, जिससे ट्रेनों के सुचारू संचालन में बाधा आती है।
भारतीय रेलवे मालगाड़ियों को विशेष पहुंच प्रदान करने के लिए पूर्वी समर्पित माल गलियारा (ईडीएफसी) और पश्चिमी समर्पित माल गलियारा (डब्ल्यूडीएफसी) जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं सहित कई तरीके अपना रहा है, जिससे माल लाने ले जाने के लिए मार्ग बनाए जा सकें।
2. भारी यातायात भार - भारतीय रेलवे प्रतिदिन लगभग 25,000 ट्रेनें चलाता है, जिनमें उपनगरीय और मालगाड़ियां शामिल हैं। दिल्ली-हावड़ा, मुंबई-कोलकाता आदि प्रमुख मार्ग अत्यधिक भीड़भाड़ वाले होते हैं, जिससे ट्रेनों के समय पर चलने में बाधा आती है।
मौजूदा रेल नेटवर्क की क्षमता में बढ़ोतरी:
बीते 11 वर्ष में मौजूदा रेल नेटवर्क की क्षमता में व्यापक बढ़ोतरी की गई है। चालू की गई नई पटरियों का विवरण इस प्रकार है:-
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अवधि
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शुरू किए गए नए ट्रैक
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नए ट्रैक शुरू करने का औसत
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2009-14
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7,599 किलोमीटर
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4.2 किलोमीटर/ दिन
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2014-25
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34,428 किलोमीटर
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8.6 किलोमीटर/ दिन (2 बार से अधिक)
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इसके साथ ही, 01.04.2025 तक, भारतीय रेलवे में कुल 35,966 किलोमीटर लंबाई की 431 रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं (154 नई लाइनें, 33 गेज रूपांतरण और 244 दोहरीकरण) मंजूर की गई हैं, जिनकी लागत लगभग ₹6.75 लाख करोड़ है। सारांश इस प्रकार है:-
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श्रेणी
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परियोजनाओं की संख्या
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कुल लंबाई
एनएल/जीसी/डीएल
(किलोमीटर)
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मार्च 25 तक शुरू की गई कुल लंबाई (किलोमीटर)
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मार्च 25 तक कुल खर्च
(करोड़ ₹ में)
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नई लाइनें
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154
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16,142
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3,036
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1,45,318
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गेज परिवर्तन
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33
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4,180
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2,997
|
22,753
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दोहरीकरण / बहुपथ निर्माण
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244
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15,644
|
6,736
|
1,22,858
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कुल
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431
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35,966
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12,769
|
2,90,929
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सभी रेलवे परियोजनाओं का जोन-वार/ वर्ष-वार विवरण भारतीय रेलवे की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है।
क्षमता बढ़ाने के इन कार्यों से ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार होगा।
यह जानकारी केंद्रीय रेल मंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।
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पीके/केसी/एमएम
(रिलीज़ आईडी: 2240056)
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