लोकसभा सचिवालय
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प्रधानमंत्री ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में संसदीय गरिमा के महत्व पर जोर दिया; श्री ओम बिरला ने आभार व्यक्त किया


​लोकसभा अध्यक्ष ने लोकसभा में दलों के नेताओं को पत्र लिखा; सदस्यों द्वारा तख्तियों के प्रयोग और अमर्यादित व्यवहार की निंदा की

​लोकसभा अध्यक्ष ने आशा व्यक्त की कि सभी नेता संसद की गौरवशाली परंपराओं को बनाए रखने में पूर्ण सहयोग देंगे

प्रविष्टि तिथि: 15 MAR 2026 7:10PM by PIB Delhi

नई दिल्ली; 15 मार्च 2026: ​प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला को हटाने संबंधी अविश्वास प्रस्ताव पर पिछले हफ्ते लोक सभा में हुई विस्तृत चर्चा और उसके खारिज होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखा है।

अपने पत्र में प्रधानमंत्री ने अविश्वास प्रस्ताव के दौरान लोक सभा अध्यक्ष द्वारा दिखाए गए 'धैर्य, संयम और निष्पक्षता' की सराहना की। उन्होंने कहा कि सदन ने एक नई राजनीतिक संस्कृति को जन्म दिया है। श्री मोदी ने पत्र में इस बात पर दुख जताया कि कुछ लोग 'परिवारवादी और सामंती' सोच के कारण लोकतांत्रिक संस्थाओं को अपने सीमित दायरे में रखना चाहते हैं और नए नेतृत्व को स्वीकार नहीं कर पाते। इन्होंने जोर देकर कहा कि संसद 'संवाद, तर्क और विचार-विमर्श' का केंद्र है, जहाँ हर क्षेत्र की आवाज को स्थान मिलना चाहिए।

​ श्री ओम बिरला ने प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत के संसदीय लोकतंत्र के नियमों, प्रक्रियाओं और परंपराओं के प्रति उनका हमेशा अटूट विश्वास रहा है। उनका पत्र लोक सेवा के उन उच्चतम नैतिक मूल्यों को व्यक्त करता है, जिन्हें उन्होंने अपने दीर्घ सार्वजनिक जीवन में जिया है; वर्तमान में भारत के प्रधानमंत्री के रूप में तथा इससे पूर्व गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में।

इसके बाद लोक सभा में सभी दलों के नेताओं को भेजे एक पत्र में श्री बिरला ने कहा कि 'पिछले कुछ समय से हमारे कुछ माननीय सदस्यों द्वारा संसद परिसर मे सभागृह के अंदर और सभागृह के बाहर हमारे संसदीय लोकतंत्र की गरिमा और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई जा रही है। सभागृह और संसद भवन परिसर के अंदर जिस प्रकार के बैनर, प्लेकार्ड और तख्तियों को प्रदर्शित किया जा रहा है, जिस प्रकार के शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है, जिस तरह का आचरण और व्यवहार किया जा रहा है, यह  हम सभी के लिए गहरी चिन्ता का विषय है। इस स्थिति पर हम सभी को व्यक्तिगत एवं सामूहिक रूप से गंभीर चिंतन और विश्लेषण करने की आवश्यकता है।'

उन्होंने जोर देकर कहा कि 'हमारे सदन में सदैव मर्यादित चर्चा संवाद की गौरवशाली परंपरा रही है।  पूर्व मे भी जब-जब सदन के अंदर आचरण व्यवहार के स्तर मे ह्रास का अनुभव किया गया तब समय-समय पर सभी राजनीतिक दलों तथा अन्य हितधारकों द्वारा सम्मेलन आयोजित किए गए जिनमे हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और प्रतिष्ठा के संरक्षण और संवर्धन के विषय पर चर्चा संवाद हुआ। पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन मे भी इस विषय पर चर्चा की गई और संकल्प भी पारित किए गए। मैने भी कई बार आपसे कार्य-मंत्रणा समिति एवं राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठकों में और अन्य अवसरों पर आचरण और व्यवहार के उच्च मानक बनाए रखने के विषय पर आग्रह किया है।'

उन्होंने  आग्रह किया कि 'हमारे आचरण व्यवहार को पूरा देश देखता है एवं भारत की संसद से देश की समस्त लोकतांत्रिक संस्थाओं में संदेश जाता है। अब समय आ गया है जब हमें अपनी लोकतांत्रिक संस्थाओं की उच्च गरिमा और प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए गंभीर चिंतन व आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। विशेषकर, सभी राजनीतिक दलों के शीर्ष नेतृत्व एवं सदन में सभी दलों के नेताओं  को, अपने-अपने सदस्यों में सभागृह और संसद भवन परिसर के अंदर अनुशासन और उच्च नैतिक आचरण और व्यवहार सुनिश्चत करने के लिए, विशेष प्रयास करने होंगे।

यदि हम सब मिलकर इस दिशा में प्रयास करेंगे, तो निश्चित ही देश की जनता का संसदीय लोकतंत्र में विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा तथा सदन की प्रतिष्ठा और मर्यादा में निरंतर वृद्धि होगी। मुझे विश्वास है कि आप सभी इस महान संस्था की गौरवशाली परंपराओं को बनाए रखने में अपना पूर्ण सहयोग देंगे।'

 

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AM


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