वस्त्र मंत्रालय
एकीकृत प्रसंस्करण विकास योजना (आईपीडीएस)
प्रविष्टि तिथि:
17 MAR 2026 1:59PM by PIB Delhi
वस्त्र मंत्रालय ने पर्यावरण के अनुकूल प्रसंस्करण मानकों और प्रौद्योगिकी का उपयोग करके भारतीय वस्त्र उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने और वस्त्र प्रसंस्करण क्षेत्र में प्रदूषण की समस्याओं का समाधान करने के लिए 12वीं पंचवर्षीय योजना से एकीकृत प्रसंस्करण विकास योजना लागू की है। इस योजना का उद्देश्य मौजूदा प्रसंस्करण समूहों और नए प्रसंस्करण पार्कों में नए सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्रों (सीईटीपी) की स्थापना/सीईटीपी के उन्नयन में सहायता प्रदान करना है। यह योजना वर्ष 2021 तक लागू रही; उसके बाद इसे केवल निर्धारित दायित्वों को पूरा करने के लिए ही जारी रखा गया है।
इस योजना के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं का विवरण और उनकी वर्तमान स्थिति नीचे दी गई है:
(करोड़ में)
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क्रमांक
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परियोजना का नाम
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राज्य
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ज़िला
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परियोजना की लागत
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भारत सरकार द्वारा जारी अनुदान
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स्थिति
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1
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बालोत्रा वाटर पॉल्यूशन कंट्रोल ट्रीटमेंट एण्ड रिवर्स ऑस्मोसिस प्राइवेट लिमिटेड
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राजस्थान
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बाड़मेर
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131.89
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62.45
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पूरा होने के करीब
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2
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जैसोल पॉल्यूशन कंट्रोल ट्रीटमेंट एण्ड रिवर्स ऑस्मोसिस प्राइवेट लिमिटेड
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राजस्थान
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बाड़मेर
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38.5
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14.43
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पूरा होने के करीब
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3
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सांगानेर एनवायरो प्रोजेक्ट डेवलपमेंट
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राजस्थान
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जयपुर
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159
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37.5
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कार्यान्वयन के अधीन
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4
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नेक्स्टजेन टेक्सटाइल पार्क
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राजस्थान
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पाली
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129.42
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6.3
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कार्यान्वयन के अधीन
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5
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पाली कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट
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राजस्थान
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पाली
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100
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37.5
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कार्यान्वयन के अधीन
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6
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गुजरात इको टेक्सटाइल पार्क
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गुजरात
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पल्साना
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146.39
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54.84
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पूरा होने के करीब
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कुल
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705.2
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213.02
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इस योजना के अंतर्गत स्वीकृत पार्कों में शून्य द्रव निर्वहन (जेडएलडी) तकनीक लागू की जा रही है। एक अन्य तकनीक जिसे लागू किया जा रहा है, वह है बहु-प्रभाव बाष्पीकरण (एमईई), जो उपचारित जल की पुनर्प्राप्ति में सहायक है।
वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
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पीके/केसी/एचएन/एम
(रिलीज़ आईडी: 2241144)
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