आयुष
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देश का प्रकृति परीक्षण अभियान


'देश का प्रकृति संरक्षण अभियान' के अंतर्गत 1.4 करोड़ से अधिक नागरिकों का मूल्यांकन किया गया

प्रविष्टि तिथि: 17 MAR 2026 2:44PM by PIB Delhi

आयुष मंत्रालय की ओर से नौवें आयुर्वेद दिवस (29 अक्टूबर 2024) के अवसर पर "देश का प्रकृति परीक्षण अभियान" नाम की पहल शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य आयुर्वेद में वर्णित 'प्रकृति' की अवधारणा के बारे में लोगों में जागरूकता पैदा करना और स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए उनकी प्रकृति का आकलन करना था। यह आकलन छात्रों, शिक्षकों, वैद्यों और आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारियों सहित समर्पित स्वयंसेवकों की सहायता से एक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से किया गया। यह मोबाइल ऐप आयुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की एक इकाई इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (आईजीआईबी) की ओर से दिए गए तर्क पर आधारित था। इस अभियान के अंतर्गत अब तक 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के कुल 1,40,69,556 भारतीय नागरिकों की प्रकृति का आकलन किया जा चुका है। इस कार्य में अभियान में भाग लेने वाले 1,85,704 स्वयंसेवकों का सहयोग प्राप्त हुआ है।

आयुष मंत्रालय राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) की केंद्र प्रायोजित योजना के एक घटक के रूप में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों के माध्यम से आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) का संचालन कर रहा है। इसका उद्देश्य आयुष के सिद्धांतों और तौर-तरीकों पर आधारित सर्वांगीण स्वास्थ्य मॉडल स्थापित करना है जिसमें प्रत्येक व्यक्ति का प्रकृति परीक्षण भी शामिल है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार देश भर में 12500 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) कार्यरत हैं।

आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रताप राव जाधव ने 13 मार्च 2026 को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी थी।

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पीके/केसी/केके/ओपी

 


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