वस्त्र मंत्रालय
हरित वस्त्र, क्रेडिट स्कोर में बढ़त और हरित निधि
प्रविष्टि तिथि:
17 MAR 2026 1:59PM by PIB Delhi
देश में हरित वस्त्रों के उत्पादन, उपभोग और निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने कई पहलें की हैं। इनका विवरण नीचे दिया गया है:
- सरकार आठ क्लस्टरों और चार फैशन हाउसों में 'देश में परिधान फैशन आपूर्ति श्रृंखला से खतरनाक रसायनों का उन्मूलन' शीर्षक से एक प्रायोगिक परियोजना चला रही है। इसका उद्देश्य नए जमाने के एवं पर्यावरण के अनुकूल और जैविक वस्त्रों के प्रसंस्करण तथा उत्पादन को सुगम बनाना है। इस परियोजना का उद्देश्य उपभोक्ता जागरूकता के माध्यम से टिकाऊ कपड़ों की मांग उत्पन्न करना भी है।
- सरकार ने पर्यावरण स्थिरता और शासन (ईएसजी) कार्यबल का गठन किया है, जो सतत उत्पादन, प्रमाणन, निर्यात आदि से संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है। इस कार्यबल ने विभिन्न उद्योग-केंद्रित कार्यक्रमों को सुगम बनाया है जिनमें सर्कुलर संवाद और क्लस्टर एक्सचेंज मैकेनिज्म जैसे प्लेटफार्मों के माध्यम से सर्वोत्तम प्रथाओं और ज्ञान के आदान-प्रदान पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- सरकार ने विभिन्न अध्ययन/परियोजनाएं शुरू की हैं, जैसे कि सर्वोत्तम उपलब्ध तकनीकों के संदर्भ/व्यापक उद्योग दस्तावेज (बीआरईएफ/सीओआईएनडीएस दस्तावेज) की तैयारी और वस्त्र विनिर्माण क्षेत्र के लिए समावेशी और हरित परिवर्तन की दिशा में एक रोडमैप तैयार करना, ताकि जल और ऊर्जा दक्षता, रसायन प्रबंधन आदि के लिए रोडमैप/सर्वोत्तम उपलब्ध तकनीकों का सुझाव दिया जा सके।
- संशोधित प्रौद्योगिकी उन्नयन निधि योजना (एटीयूएफएस) के तहत वस्त्र निर्माण में जल और ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने के लिए 1,117 से अधिक ऊर्जा-बचत मशीनों को सहायता प्रदान की गई। यह योजना 31.03.2022 तक वैध थी।
सरकार ने 12वीं पंचवर्षीय योजना के तहत एकीकृत प्रसंस्करण विकास योजना (आईपीडीएस) लागू की है, जिसका उद्देश्य नए सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्रों (सीईटीपी) की स्थापना और मौजूदा सीईटीपी के उन्नयन में सहायता करना है। इस योजना के तहत स्वीकृत 6 परियोजनाएं शून्य तरल निर्वहन (जेडएलडी) तकनीक का उपयोग कर रही हैं। वर्तमान में यह योजना केवल निर्धारित देनदारियों को पूरा करने के लिए ही जारी है।
पीएम मित्रा पार्कों की परिकल्पना एकीकृत और टिकाऊ बृहद बुनियादी ढांचे के विकास के माध्यम से पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ कपड़ा विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए की गई है। इसमें सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्र (सीईटीपी), अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण प्रणाली और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाएं शामिल हैं। इसके साथ ही संसाधन दक्षता बढ़ाने और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए जल, बिजली और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे सहित साझा उपयोगिताएं भी शामिल हैं।
इसके अलावा, एनटीटीएम के तहत अपशिष्ट से फाइबर प्रौद्योगिकियों के लिए कई अनुसंधान एवं विकास पहल की गई हैं, जिनमें कपड़ा अपशिष्ट, बायोमास और जैव-अवशेषों को कार्बन फाइबर और कार्यात्मक वस्त्र जैसे उन्नत हरित सामग्रियों में परिवर्तित करना शामिल है।
सरकार ने रैंप (आरएएमपी) कार्यक्रम के तहत एमएसई-गिफ्ट और एमएसई-एसपीआईसीई योजनाएं शुरू की हैं, जो सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसई) के बीच टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए ब्याज सब्सिडी और/या पूंजी सब्सिडी सहित प्रोत्साहन प्रदान करती हैं।
यह जानकारी वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/एके/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2241172)
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