सहकारिता मंत्रालय
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सहारा सहकारी समितियों में धन की वापसी की स्थिति

प्रविष्टि तिथि: 17 MAR 2026 4:46PM by PIB Delhi

बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 के उपबंधों के अधीन पंजीकृत सहकारी समितियां स्वायत्त सहकारी संगठनों के रूप में कार्य करती हैं और अपने सदस्यों के प्रति जवाबदेह होती हैं । बहुराज्‍य सहकारी समितियां, बहुराज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 और उसके अधीन निर्मित नियमों के उपबंधों के साथ पठित समिति की अनुमोदित उपविधियों के अनुसार कार्य करते हैं, जिसमें सदस्य, बोर्ड, समिति के साधारण निकाय और सहकारी समितियों के केंद्रीय रजिस्ट्रार (सीआरसीएस) की भूमिका और शक्तियां शामिल हैं ।

बहुराज्‍य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 की धारा 49 के उपबंधों के अनुसार सदस्यों को प्रवेश देने, जमाकर्ताओं से जमाराशि स्‍वीकरण और उन्‍हें रिफंड, आदि जैसे व्यावसायिक मामले समिति के बोर्ड की शक्तियों और कार्यों के अधीन आते हैं और समिति का दैनंदिन प्रबंधन बहुराज्‍य सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2002 की धारा 52 के उपबंधों के अनुसार समिति के मुख्य कार्यपालक की शक्तियों और कार्यों के अधीन आता है ।

अग्रेतर, सहकारिता मंत्रालय द्वारा रिट याचिका (सि) सं.191/2022 (पिनाक पाणी मोहंती बनाम् भारत संघ और अन्‍य) में दायर अंतर्वर्ती आवेदन में माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय ने दिनांक 29.03.2023 को अन्‍य बातों के साथ-साथ यह आदेश दिया कि:

“(i) Out of the total amount of Rs. 24,979.67 Crores lying in the “Sahara-SEBI Refund Account”, Rs. 5000 Crores be transferred to the Central Registrar of Cooperative Societies, who, in turn, shall disburse the same against the legitimate dues of the depositors of the Sahara Group of Cooperative Societies, which shall be paid to the genuine depositors in the most transparent manner and on proper identification and on submitting proof of their deposits and proof of their claims and to be deposited in their respective bank accounts directly.

(ii) The disbursement shall be supervised and monitored by Justice R. Subhash Reddy, Former Judge of this Court with the able assistance of Shri Gaurav Agarwal, learned Advocate, who is appointed as Amicus Curiae to assist Justice R. Subhash Reddy as well as the Central Registrar of Cooperative Societies in disbursing the amount to the genuine depositors of the Sahara Group of Cooperative Societies. The manner and modalities for making the payment is to be worked out by the Central Registrar of Cooperative Societies in consultation with Justice R. Subhash Reddy, Former Judge of this Court and Shri Gaurav Agarwal, learned Advocate.”

माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय के दिनांक 29.03.2023 के आदेश के अनुपालन में सहारा समूह की चार बहुराज्‍य सहकारी समितियों, अर्थात् सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लि., लखनऊ; सहारायन यूनिवर्सल मल्‍टीपर्पज़ सोसाइटी लि., भोपाल; हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लि., कोलकाता और स्‍टार्स मल्‍टीपर्पज़ कोऑपरेटिव सोसाइटी लि., हैदराबाद के प्रामाणिक जमाकर्ताओं को उनकी वैध धनराशि के रिफंड दावे प्रस्तुत करने हेतु दिनांक 18.07.2023 को “सीआरसीएस-सहारा रिफंड पोर्टल” https://mocrefund.crcs.gov.in का शुभारंभ किया गया है । संवितरण की यह संपूर्ण प्रक्रिया डिजिटल और कागज़रहित है जिसे न्‍यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी, माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय के पूर्व न्‍यायाधीश के पर्यवेक्षण और निगरानी में श्री गौरव अग्रवाल, न्‍यायमित्र की सहायता से संचालित किया जा रहा है ।

इस पोर्टल पर प्राप्‍त आवेदनों को उचित पहचान और जमाराशि के साक्ष्‍य प्रस्‍तुत करने के उपरांत पारदर्शी रीति से प्रोसेस किया जा रहा है । यह भुगतान प्रामाणिक जमाकर्ताओं के आधार से जुड़े बैंक खाते में सीधा जमा किया जा रहा है । वर्तमान में सहारा समूह के प्रत्‍येक प्रामाणिक जमाकर्ताओं को उनके सत्‍यापित दावों के लिए उनके आधार से जुड़े बैंक खातों के माध्‍यम से 50,000/- रुपए तक के भुगतान का संवितरण किया जा रहा है । पोर्टल पर किसी जमाकर्ता के प्राप्‍त आवेदन में किसी कमी की दशा में उन्‍हें इन कमियों से अवगत कराया जा रहा है और उन्‍हें दिनांक 15.11.2023 को लॉन्‍च हो चुकी री-सबमिशन पोर्टल के माध्‍यम से अपना आवेदन पुन: प्रस्‍तुत करने की सूचना दी जा रही है।

फरवरी 2026 तक, सीआरसीएस-सहारा रिफंड पोर्टल पर निवेशकों द्वारा 1,45,15,611 आवेदन और 4,06,25,476 दावे किए गए। सहारा सहकारी समितियों के 40,33,448 निवेशकों को 8,783.55 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि सहारा-एसईबीआई रिफंड खाते से सहकारी समितियों के केंद्रीय रजिस्ट्रार को 5,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि हस्तांतरित की जाए और जमाकर्ताओं को रिफंड के वितरण के लिए 31.12.2026 तक का विस्तार दिया है। निवेशकों को रिफंड की पूरी प्रक्रिया माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में की जा रही है।

यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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AK/AP

 


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