मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
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महाराष्ट्र में जलीय कृषि का विकास

प्रविष्टि तिथि: 17 MAR 2026 3:16PM by PIB Delhi

मत्स्य विभाग द्वारा अपनी योजनाओं, नीतियों और कार्यक्रमों के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र के समग्र विकास के लिए अनेक पहलें की जा रही हैं, जिनमें महाराष्ट्र सहित सभी राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों में जलीय कृषि का निरंतर विकास भी शामिल है।

मत्स्य विभाग द्वारा संचालित प्रमुख योजना प्रधान मंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत पिछले पाँच वर्षों तथा वर्तमान वर्ष में महाराष्ट्र के लिए 1,626.99 करोड़ रुपये की मत्स्य विकास परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस स्वीकृति में जलीय कृषि विकास से संबंधित विभिन्न गतिविधियाँ भी शामिल हैं, जैसे: मछली ब्रूड बैंक की स्थापना (10 इकाइयाँ), मछली/झींगा हैचरी (32 इकाइयाँ), अंतर्देशीय जलीय कृषि (282.29 हेक्टेयर), बायोफ्लॉक मछली पालन (182 हेक्टेयर), जलाशयों में केज कल्चर (17,463 संख्या), पुनः परिसंचारी जलीय कृषि प्रणाली (आरएएस) (541 इकाइयाँ), बायोफ्लॉक टैंक (152 इकाइयाँ), समुद्री केज (110 संख्या), समुद्री शैवाल की खेती के लिए राफ्ट (1000 संख्या)। इसके अतिरिक्त, महाराष्‍ट्र सरकार ने वर्ष 2023 में मैरिकल्चर नीति को भी स्वीकृति प्रदान की है। ये सभी कार्य जलीय कृषि के माध्यम से महाराष्ट्र में मछली उत्पादन के निरंतर संवर्धन के उद्देश्य से किए जा रहे हैं।

महाराष्ट्र सरकार ने सूचित किया है कि जलीय कृषि विकास के अंतर्गत 462.46 हेक्टेयर क्षेत्र अंतर्देशीय तालाब (पॉन्ड) संस्कृति के तहत, लगभग 1491.73 हेक्टेयर क्षेत्र तटीय जलीय कृषि के तहत, 0.9178 हेक्टेयर क्षेत्र समुद्री शैवाल (सीवीड) की खेती के तहत तथा 0.12 हेक्टेयर क्षेत्र समुद्री केज कल्चर के अंतर्गत विकसित किया जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने जलीय कृषि के अंतर्गत कुल 2.70 लाख टन उत्पादन की सूचना दी है, जिसमें प्रमुख प्रजातियाँ कार्प्स एवं कैटफिश (2,69,000 टन), पी. मोनोडन (278 टन) तथा एल. वन्नामेई (1340 टन) शामिल हैं।

(ग): वर्षों से केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा किए गए समन्वित प्रयासों और पहलों के परिणामस्वरूप महाराष्ट्र में जलीय कृषि का निरंतर विकास हुआ है। हालांकि, इसके विस्तार में कुछ प्रमुख बाधाएँ हैं, जैसे गुणवत्तापूर्ण ब्रूड स्टॉक की उपलब्धता, खेती के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज, लीज नीतियाँ, बिजली की लागत, प्रजातियों के विविधीकरण की आवश्यकता, कोल्ड चेन सुविधाएँ, प्रशिक्षण और कौशल विकास आदि। मत्स्य विभाग द्वारा लागू प्रधान मंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के अंतर्गत ब्रूड बैंक और हैचरी की स्थापना के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण ब्रूड और बीज की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए गए हैं। इसके साथ ही, आइस प्लांट/कोल्ड स्टोरेज, अत्याधुनिक मछली बाजार, मछली कियोस्क तथा मछली परिवहन सुविधाओं जैसी कोल्ड चेन अवसंरचना को भी स्वीकृति दी गई है, ताकि मछली की गुणवत्ता और शेल्फ लाइफ में वृद्धि हो सके। इसके अतिरिक्त, आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड के माध्यम से भी संचालित किए जा रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार ने जानकारी दी है कि राज्य में मत्स्य क्षेत्र को कृषि के समकक्ष दर्जा प्रदान किया गया है, जिसे 09.05.2025 के सरकारी संकल्प के माध्यम से लागू किया गया है, ताकि रियायती विद्युत दरों और अन्य प्रावधानों के जरिए मत्स्य क्षेत्र का विकास किया जा सके। इसके साथ ही यह भी बताया गया है कि राज्य स्तर पर ‘मुख्‍यमंत्री मत्‍स्‍य सम्पदा योजनाकी भी घोषणा की गई है, जिसका उद्देश्य केन्द्रीय योजनाओं के अंतर्गत किए जा रहे विकास कार्यों के साथ-साथ मत्स्य क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित करना है।

यह जानकारी मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में दी।

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पीके/केसी/केपी/ डीके
 


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