भारी उद्योग मंत्रालय
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चीन में लिथियम से संबंधित नीतिगत बदलावों के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) पर पड़ने वाले प्रभाव

प्रविष्टि तिथि: 17 MAR 2026 4:51PM by PIB Delhi

सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स (एसआईएएम) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारत वर्तमान में लिथियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर है। ये महत्वपूर्ण खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) में उपयोग होने वाली लिथियम-आयन बैटरी के लिए आवश्यक हैं। वर्तमान में पूरी मांग आयात से ही पूरी होती है। इसके कारण यह क्षेत्र बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशील हो जाता है। चीन में हाल ही में हुए नीतिगत घटनाक्रम, विशेष रूप से उच्च-प्रदर्शन वाली लिथियम-आयन बैटरी (300 वाट-घंटा प्रति किलोग्राम), कैथोड सामग्री, कृत्रिम-ग्रेफाइट एनोड और संबंधित मैन्यूफैक्चरिंग प्रौद्योगिकी पर निर्यात संबंधी नियंत्रण और लाइसेंसिंग संबंधी अनिवार्यताओं को लागू करने के निर्णय से निकट भविष्य में वैश्विक आपूर्ति की स्थिति और भी कठिन हो सकती है। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के उन भारतीय निर्माताओं के लिए आपूर्ति श्रृंखला में संभावित रूप नाजुक स्थिति पैदा हो सकती है, जो चीन के मध्यवर्ती प्रसंस्करण पर निर्भर हैं।

लिथियम और बैटरी के अन्य कच्चे माल वैश्विक स्तर पर कारोबार किए जाने वाले उत्पाद हैं तथा इनकी कीमतें अंतरराष्ट्रीय मांग और आपूर्ति की स्थितियों से प्रभावित होती हैं। वैश्विक स्तर पर किसी भी नीतिगत बदलाव या आपूर्ति में व्यवधान से लिथियम, कोबाल्ट और निकल की कीमतों में उतार-चढ़ाव आ सकता है। चीन द्वारा घोषित निर्यात संबंधी नियंत्रणों से निकट भविष्य में वैश्विक स्तर पर बैटरी के घटकों की कीमतों में वृद्धि होने की संभावना है। इससे भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों की लागत संरचना सीधे प्रभावित होगी। हालांकि, बैटरी की कीमतों पर समग्र असर प्रौद्योगिकी में सुधार, बड़े पैमाने पर उत्पादन से होने वाले लाभ और मैन्यूफैक्चरिंग के स्थानीयकरण से भी प्रभावित होता है।

सरकार ने महत्वपूर्ण खनिजों पर आयात की निर्भरता कम करने हेतु कई कदम उठाए हैं। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 29 जनवरी, 2025 को राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (एनसीएमएम) को मंजूरी दी है। इस मिशन का उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों (लिथियम सहित) की दीर्घकालिक स्थायी आपूर्ति सुनिश्चित करना और खनिज के अन्वेषण व खनन से लेकर संवर्धन, प्रसंस्करण तथा उपयोग के बाद बचे उत्पादों से पुनर्प्राप्ति तक के सभी चरणों को शामिल करते हुए भारत की महत्वपूर्ण खनिज मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना है। इसके अलावा, देश में महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र को मजबूत करने हेतु निम्नलिखित पहलें भी की गई हैं:-

i. केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 29.01.2025 को राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (एनसीएमएम) को मंजूरी दी। इस मिशन का उद्देश्य भारत की महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करना और महत्वपूर्ण खनिजों की मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करना है।

ii. वर्ष 2023 में एमएमडीआर अधिनियम में संशोधन के बाद से, केन्द्र सरकार ने महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिजों के 46 ब्लॉकों की सफलतापूर्वक नीलामी की है। इसके अलावा, अन्वेषण लाइसेंस व्यवस्था के तहत 7 ब्लॉकों की नीलामी की गई है। इनमें से 3 ब्लॉक महत्वपूर्ण खनिजों से संबंधित हैं।

iii. केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने महत्वपूर्ण खनिजों के पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने हेतु 1,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के दिशानिर्देश जारी किए गए हैं और 02.10.2025 को इसकी शुरुआत की गई है।

iv. ओवरबर्डन/टेलिंग्स/फ्लाई ऐश/रेड मड आदि से महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति हेतु प्रायोगिक (पायलट) परियोजनाओं के वित्तपोषण के दिशानिर्देश 14.11.2025 को जारी किए गए।

v. सरकार ने महत्वपूर्ण खनिजों की मूल्य श्रृंखला में घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने के लिए अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) करने हेतु नौ प्रमुख संस्थानों को राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (एनसीएमएम) के तहत उत्कृष्टता केन्द्र (सीओई) के रूप में मान्यता दी है।

vi. खान मंत्रालय के अधीन खानिजबिदेश इंडिया लिमिटेड (केएबीएल) ने अर्जेंटीना के कैटामार्का प्रांत के एक सरकारी उद्यम, सीएएमवाईएन के साथ अर्जेंटीना में 15703 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले पांच लिथियम ब्राइन ब्लॉकों के अन्वेषण और खनन हेतु एक अन्वेषण एवं विकास समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह जानकारी भारी उद्योग राज्यमंत्री श्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

 

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पीके/केसी/आर / डीए

 


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