मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
मरीन स्टीवर्डशिप काउंसिल प्रमाणन
प्रविष्टि तिथि:
17 MAR 2026 3:19PM by PIB Delhi
मत्स्य पालन के लिए इकोलेबलिंग और प्रमाणन योजनाएँ एफएओ द्वारा जारी “समुद्री मत्स्य संसाधनों से प्राप्त मछली और मत्स्य उत्पादों के लिए इकोलेबलिंग” मार्गदर्शिका में निहित सिद्धांतों के आधार पर निर्देशित होती हैं। ये मार्गदर्शिकाएँ टिकाऊ मत्स्य पालन प्रबंधन के आकलन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सिद्धांत और मानदंड निर्धारित करती हैं। भारत में, भारतीय मत्स्य सर्वेक्षण और आईसीएआर–केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान समय-समय पर मछली भंडार का आकलन करते हैं और भारतीय तट पर समुद्री फिनफिश और शेलफिश संसाधनों की निगरानी करते हैं। भंडार की स्थिति, संख्या गतिकी और जीवन इतिहास के मापदंडों पर वैज्ञानिक जानकारी तैयार और प्रसारित करते हुए ये संस्थाएँ साक्ष्य आधारित प्रबंधन निर्णय लेने में मदद करती है और विश्वसनीय इकोलेबलिंग एवं प्रमाणन पहलों के लिए आवश्यक वैज्ञानिक आधार उपलब्ध कराती हैं।
भारत सरकार का मत्स्य पालन विभाग प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत कई रणनीतिक पहलों को आगे बढ़ा रहा है, जिनका उद्देश्य मछली भंडार का मूल्यांकन और टिकाऊ मत्स्य पालन प्रबंधन सुनिश्चित करना है। इसमें आईसीएआर–केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान द्वारा किया गया येलोफिन टूना के भंडार का मूल्यांकन और भारतीय मत्स्य सर्वेक्षण द्वारा संचालित समुद्री स्तनधारी मछलियों का भंडार मूल्यांकन एवं निगरानी कार्यक्रम शामिल हैं। इसके साथ ही, मत्स्य पालन विभाग ने लक्षद्वीप के मत्स्य पालन विभाग द्वारा लक्षद्वीप के पोल एंड लाइन स्किपजैक टूना मछली पालन के लिए मरीन स्टीवर्डशिप काउंसिल प्रमाणन प्रस्ताव को भी अनुमोदित किया है। एमएससी प्रमाणन के अलावा, एक्वाकल्चर स्टीवर्डशिप काउंसिल (एएससी) और बेस्ट एक्वाकल्चर प्रैक्टिसेज (बीएपी) जैसी अन्य अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त योजनाओं को भी भारत में अपनाया जा रहा है, और कई जलीय कृषि फार्म, हैचरी, फ़ीड मिल और प्रसंस्करण इकाइयाँ पहले ही प्रमाणित हैं।
(ग) भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग ने विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श और रणनीतिक संवाद किए हैं, जिनमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप में निवेशकों की बैठकें, तटीय राज्यों की मत्स्य पालन बैठक, अंतर्देशीय मत्स्य पालन और जलीय कृषि बैठक, समुद्री खाद्य निर्यातकों की बैठक और “भारत का नीला रुपांतरण : समुद्री खाद्य निर्यात में मूल्य संवर्धन को मजबूत करना” विषय पर विश्व मत्स्य दिवस समारोह शामिल हैं। इसके अलावा, कूटनीतिक संबंधों को बढ़ावा देने, टिकाऊ मत्स्य पालन में सहयोग को प्रोत्साहित करने, व्यापार संबंध मजबूत बनाने और मत्स्य पालन तथा जलीय कृषि में तकनीकी एवं उभरते क्षेत्रों को आगे बढ़ाने के लिए 39 देशों के राजदूतों और उच्चायुक्तों के साथ एक गोलमेज सम्मेलन भी आयोजित किया गया। इसके अतिरिक्त समुद्री खाद्य के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रमुख आयातक देशों के साथ द्विपक्षीय बैठके भी करती है।
मत्स्य पालन विभाग स्थिरता की पहलों के तहत, ट्रॉल जालों में टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस (टीईडी) लगाने को प्रोत्साहित कर रहा है, राष्ट्रीय समुद्री स्तनधारी कार्यक्रम का समर्थन कर रहा है, और एंटीबायमवर्क, 2025 जारी किया है, जिसका उद्देश्य मत्स्य पालन और जलीय कृषि मूल्य श्रृंखलाओं में राष्ट्रीय डिजिटल ट्रेसबिलिटी सिस्टम स्थापित करना है, ताकि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय नियामक आवश्यकताओं का अनुपालन, खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता आश्वासन को बढ़ाना, पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार लाना तथा छोटे मछुआरों और मत्स्य किसानों के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बाजार तक पहुँच को आसान बनाना सुनिश्चित किया जा सके।
इसके अलावा, विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में मत्स्य संसाधनों के सतत उपयोग हेतु नियम, 2025 को अधिसूचित किया गया है, जिसका उद्देश्य विशेष रूप से अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह और लक्षद्वीप द्वीपसमूह पर ध्यान केंद्रित करते हुए भारत के ईईजेड में उच्च मूल्य वाले और निर्यात-केंद्रित मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करना है।
भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग ने समुद्री खाद्य निर्यात को सुविधाजनक बनाने और बढ़ावा देने वाली केंद्रीय एजेंसी के रूप में कार्य करने वाले समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) की स्थापना की है। एमपीईडीए ब्रांड का प्रचार करता है, निर्यातकों का पंजीकरण करता है, आयातकों के साथ समन्वय स्थापित करता है और महत्वपूर्ण निर्यात सुविधा प्रमाणपत्र जैसे कैच सर्टिफिकेट, जापान कैच डॉक्यूमेंटेशन स्कीम (जेसीडीएस) सर्टिफिकेट, इंटरनेशनल कमीशन फॉर द कंजर्वेशन ऑफ अटलांटिक टूना (आईसीसीएटी) डॉक्यूमेंटेशन, डी एस- 2031, सर्टिफिकेट ऑफ लीगल ओरिजिन फॉर चिली और उच्च मूल्य वाले बाजारों में निर्यात के लिए नॉन रेडियोएक्टिविटी सर्टिफिकेट जारी करता है। इसके अलावा यह प्रशिक्षण कार्यक्रमों, जागरूकता अभियानों, कार्यशालाओं और चिंतन शिविरों के माध्यम से उद्योग की क्षमता को मजबूत करता है।
बाज़ार पहुँच बढ़ाने के लिए, एमपीईडीए अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भाग लेता है, क्रेता-विक्रेता बैठकें (बीएसएम) और रिवर्स क्रेता-विक्रेता मीट (आरबीएसएम) आयोजित करता है, और विदेशों में भारतीय मिशनों के साथ मिलकर काम करता है। अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए, वाणिज्य विभाग की निर्यात निरीक्षण परिषद (ईआईसी) समुद्री खाद्य मूल्य श्रृंखला में सभी हितधारकों के लिए समय-समय पर जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करती है।
यह जानकारी मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।
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पीके/केसी/आरके/डीके
(रिलीज़ आईडी: 2241410)
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