वित्‍त मंत्रालय
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सरकार ने कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों के लिए संस्थागत क्रेडिट फ्रेमवर्क सुदृढ़ किया


जमीनी स्तर का क्रेडिट (जीएलसी) लक्ष्य, प्राथमिकता क्षेत्र लेंडिंग मानदंड और विस्तारित किसान क्रेडिट कार्ड कवरेज से समय पर और किफायती क्रेडिट तक पहुंच बेहतर हुई है

उच्च कोलेटरल-फ्री लोन सीमा, ब्याज सब्सिडी लाभ और नाबार्ड पुनर्वित्त पहलों से छोटे और सीमांत किसानों को क्रेडिट के प्रवाह में बढ़ोतरी हुई है

प्रविष्टि तिथि: 17 MAR 2026 4:44PM by PIB Delhi

सरकार ने कृषि क्षेत्र, विशेष रूप से वंचित कृषि क्षेत्रों में संस्थागत क्रेडिट फ्लो बढ़ाने के लिए कई उपाय किए हैं।

इन उपायों में निम्नलिखित शामिल हैं:

 

  1. सरकार कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों के लिए प्रतिवर्ष जमीनी स्तर के क्रेडिट (जीएलसी) लक्ष्य निर्धारित करती है, जिन्हें बैंकों को वित्तीय वर्ष के दौरान प्राप्त करना होता है। ये लक्ष्य क्षेत्रवार, एजेंसीवार (अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और ग्रामीण सहकारी बैंक) और कर्ज श्रेणीवार (फसल और सावधि ऋण) तय किए जाते हैं। 2021-22 से, डेयरी, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे क्षेत्रों को लक्षित क्रेडिट मदद प्रदान करने के लिए जीएलसी के अंतर्गत इससे जुड़ी गतिविधियों के लिए समर्पित लक्ष्य निर्धारित किए गए।
  2. आरबीआई की ओर से जारी प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) संबंधी मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, लघु वित्त बैंकों, स्थानीय क्षेत्र बैंकों और प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंकों (यूसीबी) सहित वाणिज्यिक बैंकों (वेतनभोगी बैंकों को छोड़कर) को अपने समायोजित शुद्ध बैंक क्रेडिट (एएनबीसी) या असंतुलित पत्र क्रेडिट के बराबर (सीईओबीएसई), जो भी अधिक हो, का कम से कम 18% कृषि क्षेत्र को आवंटित करना अनिवार्य है, जिसमें से 10% का उप-लक्ष्य लघु एवं सीमांत किसानों (एसएमएफ) के लिए निर्धारित है।
  3. इसके साथ ही, पीएसएल दिशानिर्देशों में उन जिलों के लिए प्रोत्साहन ढांचा भी निर्धारित किया गया है, जहां क्रेडिट फ्लो अपेक्षाकृत कम है और उन जिलों के लिए प्रोत्साहन फ्रेमवर्क निर्धारित किया गया है, जहां प्राथमिकता क्षेत्र क्रेडिट फ्लो अपेक्षाकृत अधिक है, जिसमें कृषि और लघु एवं सीमांत किसानों को दिया जाने वाला क्रेडिट भी शामिल है।
  4. किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) किसानों को बीज, उर्वरक और कीटनाशक जैसे कृषि इनपुट खरीदने के साथ-साथ फसल उत्पादन और इससे जुड़ी गतिविधियों से जुड़ी नकदी जरूरतों को पूरा करने के लिए समय पर और किफायती क्रेडिट प्रदान करता है। 2019 से, केसीसी योजना का विस्तार पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन की वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को भी शामिल करने के लिए किया गया है।
  5. भारत सरकार की संशोधित ब्याज सब्सिडी योजना (एमआईएसएस) किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से किसानों को 7% की रियायती ब्याज दर पर अल्पकालिक कृषि लोन प्रदान करती है। समय पर लोन चुकाने वाले किसानों को 3% का अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलता है, जिससे उनकी ब्याज दर घटकर मात्र 4% रह जाती है।
  6. आरबीआई ने 1 जनवरी 2025 से लोन और इससे जुड़ी गतिविधियों के लिए लोन के साथ-साथ, बिना गारंटी के अल्पकालिक कृषि लोन की सीमा प्रति उधारकर्ता 1.60 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.00 लाख रुपये कर दी है। इस कदम से क्रेडिट की उपलब्धता में बढ़ोतरी हुई है, विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों (क्षेत्र के 86% से अधिक) के लिए, जिन्हें उधार लेने की लागत में कमी और गारंटी की आवश्यकता समाप्त होने से लाभ हुआ है।
  7. सरकार नाबार्ड के माध्यम से ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष के अंतर्गत देश के ग्रामीण क्षेत्रों में क्रेडिट अवशोषण क्षमता बढ़ाने वाले ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए आवंटन प्रदान करती है।
  8. 2025-2026 के केंद्रीय बजट में घोषित योजना के अनुसार, सरकार ने प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना (पीएम-डीडीकेवाई) शुरू की है। इस योजना का एक उद्देश्य उन जिलों में दीर्घकालिक और अल्पकालिक क्रेडिट की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है, जहां कृषि क्रेडिट वितरण कम है।
  9. सरकार ने ग्रामीण वित्तीय संस्थानों (ग्रामीण सहकारी बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक) को सुदृढ़ करने के लिए प्रौद्योगिकी अपग्रेडेशन आदि जैसे कई कदम भी उठाए हैं, जो मुख्य रूप से देश के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में कार्यरत हैं।

 

कृषि क्षेत्र में क्रेडिट फ्लो बढ़ाने के लिए नाबार्ड ने कई कदम उठाए हैं, जिनमें दूसरे बिंदुओं के अतिरिक्त निम्नलिखित शामिल हैं:

 

  • आरबीआई की लीड बैंक योजना के अंतर्गत, नाबार्ड प्रत्येक जिले के लिए प्राथमिकता क्षेत्र के अंतर्गत क्रेडिट क्षमता के आकलन के लिए हर साल संभावित क्रेडिट योजना (पीएलपी) तैयार करता है, जिसे राज्य स्तर पर समेकित किया जाता है। राज्य स्तरीय पीएलपी के एकत्रीकरण, पिछले रुझानों, सरकारी प्राथमिकताओं आदि के आधार पर, सरकार नाबार्ड की सलाह से कृषि क्षेत्र के लिए जमीनी स्तर पर क्रेडिट लक्ष्य निर्धारित करती है।
  • कृषि क्षेत्र में जमीनी स्तर पर क्रेडिट को बेहतर करने के लिए, नाबार्ड बैंकों को पुनर्वित्त प्रदान करता है, जिससे वे कृषि और इससे जुड़ी गतिविधियों के लिए अल्पकालिक (एसटी) और दीर्घकालिक (एलटी) लेंडिंग देने के लिए अपने संसाधनों को बढ़ा सकें।
  • अल्पावधि पुनर्वित्त के अंतर्गत, नाबार्ड राज्य सहकारी बैंकों (एसटीसीबी), क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) और लघु वित्त बैंकों (एसएफबी) को फसल ऋण और कृषि इससे जुड़ी गतिविधियों के लिए दिए गए अन्य लोन के पुनर्वित्त में मदद प्रदान करता है।
  • दीर्घावधि पुनर्वित्त के अंतर्गत, नाबार्ड ग्रामीण वित्तीय संस्थानों, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों, लघु वित्त बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को उनकी लोन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए दीर्घावधि पुनर्वित्त सहायता प्रदान करता है।
  • इनके साथ ही, नाबार्ड विभिन्न पुनर्वित्त योजनाओं के माध्यम से सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन अवसंरचना विकास, सौर छत परियोजना, आकांक्षी और निम्न पीएसएल वाले जिलों, कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ), प्राथमिक कृषि ऋण समिति (पीएससी) और विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना (डब्ल्यूएलजीएसपी) तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के अंतर्गत विशिष्ट क्षेत्रों को रियायती पुनर्वित्त प्रदान करता है।

 

यह जानकारी वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने आज राज्यसभा में दी।

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पीके/केसी/एमएम


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