पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

संसद  प्रश्न: जलवायु परिवर्तन विषय पर अध्ययन

प्रविष्टि तिथि: 18 MAR 2026 3:06PM by PIB Delhi

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने वर्ष 2010 में पुणे स्थित भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) में जलवायु परिवर्तन अनुसंधान केंद्र (सीसीसीआर) की स्थापना की थी। यह केंद्र उत्तराखंड राज्य सहित भारत के विभिन्न क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन और इसके प्रभावों से संबंधित अध्ययन कर रहा है। इस केंद्र ने "भारतीय क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन का आकलन" शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। यह रिपोर्ट निम्नलिखित लिंक- https://link.springer.com/book/10.1007/978-981-15-4327-2 पर उपलब्ध है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) जलवायु निगरानी के लिए नियमित रूप से अवलोकन डेटा एकत्र और अद्यतन करता है तथा उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों से उपलब्ध डेटासेट के आधार पर समय-समय पर जलवायु निदान और दीर्घकालिक जलवायु प्रवृत्ति विश्लेषण प्रकाशित करता है। इसके अतिरिक्त, आईएमडी ने पिछले 30 वर्षों में विभिन्न स्थानिक पैमानों (राज्यों और जिलों) पर देश में बदलती वर्षा के पैटर्न और चरम स्थितियों का भी अध्ययन किया है। विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए "अवलोकित वर्षा परिवर्तनशीलता और परिवर्तन" पर कुल 29 रिपोर्टें प्रकाशित की गईं और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हैं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) जलवायु परिवर्तन विषय पर दो राष्ट्रीय मिशनों : जलवायु परिवर्तन को लेकर रणनीतिक ज्ञान पर राष्ट्रीय मिशन (एनएमएसकेसीसी) और हिमालयी इको-सिस्टम के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय मिशन (एनएमएसएचई) का कार्यान्वयन कर रहा है। इन मिशनों के अंतर्गत विभिन्न अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रमों और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को सहायता प्रदान की जा रही है।

एनएमएसकेसीसी के अंतर्गत, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने भारतीय राज्यों की भेद्यता मानचित्रण के लिए एक अध्ययन का समर्थन किया है और "भारत के लिए भेद्यता प्रोफाइल: एक सामान्य ढांचे का उपयोग करते हुए राज्य और जिला स्तर" शीर्षक से रिपोर्ट प्रकाशित की है। यह रिपोर्ट वर्तमान जलवायु और भेद्यता के मुख्य कारकों के संदर्भ में उत्तराखंड सहित भारत के सबसे संवेदनशील राज्यों और जिलों की पहचान करती है।

मंत्रालय केंद्रीय क्षेत्र योजनाओं को पूरे देश में समान रूप से लागू करता है। इसलिए निधियों का आवंटन राज्यवार आधार पर नहीं किया जाता है। इन योजनाओं के अंतर्गत निधियां कार्यान्वयन हेतु मंत्रालय द्वारा सीधे राज्य सरकारों को जारी नहीं की जाती हैं।

पिछले तीन वर्षों में भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन अन्य संस्थानों द्वारा जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम से संबंधित कार्यक्रम और अध्ययन किए गए हैं, जिनसे 2023 और 2025 के मानसून के दौरान भारी वर्षा की घटनाओं की आवृत्ति में वृद्धि का रुझान सामने आया है। इससे अतिरिक्त अवलोकन प्रणालियों, जैसे कि डीडब्ल्यूआर और एडब्ल्यूएस/एआरजी, की स्थापना और हॉटस्पॉट की पहचान के माध्यम से क्षेत्र की निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली में सुधार करने में मदद मिली है। इन घटनाओं के वास्तविक समय के पूर्वानुमान में सुधार के लिए भारतएफएस जैसे नए उच्च-रिजॉल्यूशन डिजिटल मौसम पूर्वानुमान (एनडब्ल्यूपी) मॉडल विकसित किए गए हैं। इन नए विकासों से इन घटनाओं की निगरानी और पूर्वानुमान में सुधार करने में मदद मिल रही है और इसके परिणामस्वरूप बेहतर निगरानी, ​​पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी सेवाओं के माध्यम से मौसम और जलवायु संबंधी घटनाओं के प्रतिकूल प्रभावों को कम किया जा रहा है। आईएमडी ने 2019 से जिला और शहर स्तर पर भारी वर्षा, चक्रवात, लू, शीत लहर और गरज के साथ तूफान जैसी गंभीर मौसम घटनाओं के लिए प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान (आईबीएफ) और जोखिम-आधारित चेतावनियों को भी अपनाया है। समय पर तैयारी और बचाव कार्य करने में सहायता के लिए इन चेतावनियों को विभिन्न प्लेटफार्मों के माध्यम से आपदा प्रबंधन अधिकारियों और आम जनता तक पहुंचाया जाता है। पूर्वानुमान तकनीकों, अवलोकन नेटवर्क, डॉप्लर मौसम रडार (डीडब्ल्यूआर) और एनडब्ल्यूपी मॉडल में सुधार के कारण, समय पर चेतावनी और निकासी उपायों ने भारत में पिछले कुछ वर्षों में चरम मौसम की घटनाओं से होने वाली जानमाल की हानि को काफी हद तक कम कर दिया है।

हाल ही में, भारत मौसम विज्ञान विभाग ने, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अन्य केंद्रों के समन्वय से, एक संपूर्ण जीआईएस-आधारित निर्णय सहायता प्रणाली (डीएसएस) विकसित की है, जो देश भर में सभी प्रकार की मौसम संबंधी आपदाओं का समय पर पता लगाने और निगरानी करने के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों के अग्रिम मोर्चे के रूप में कार्य कर रही है। यह प्रणाली चक्रवात, भारी वर्षा, सूखा आदि जैसी चरम मौसम घटनाओं के लिए समय पर और प्रभाव-आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रदान करने के लिए विशिष्ट गंभीर मौसम मॉड्यूल से समर्थित है, जो मानव जीवन, आजीविका और बुनियादी ढांचे को तबाह कर देती हैं। यह प्रणाली ऐतिहासिक डेटा का उपयोग करती है, जिसमें चरम घटनाएं, साथ ही भारतीय क्षेत्र और इसके पड़ोसी क्षेत्रों के लिए उपलब्ध तत्क्षण सतह और ऊपरी-वायु मौसम संबंधी अवलोकन शामिल हैं। इसमें प्रत्येक 10 मिनट में उपलब्ध रडार अवलोकन और प्रत्येक 15 मिनट में उपलब्ध उपग्रह से प्राप्त होने वाला विवरण भी शामिल है। यह संस्थानों में संचालित मॉडलों के एक समूह से संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान उत्पादों का भी उपयोग करती है। इनमें अतिस्थानीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मॉडल शामिल हैं। इसके अलावा, भारत मौसम विज्ञान अपने उन्नत निगरानी नेटवर्क और पूर्वानुमान प्रणालियों के माध्यम से जान-माल की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के साथ मिलकर समय पर तैयारी और प्रतिक्रिया सुनिश्चित हो पाती है। यह समन्वित दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि मौसम संबंधी सटीक और समय पर जानकारी अधिकारियों और आम जनता तक पहुंचे, जिससे पूरे देश में आपदा जोखिम कम करने के प्रयासों को बल मिलता है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने भारत के तेरह सबसे खतरनाक मौसम संबंधी घटनाओं के लिए एक वेब-आधारित "जलवायु आपदा एवं संवेदनशीलता एटलस" भी तैयार किया है, जो व्यापक क्षति और आर्थिक, मानव और पशुओं की हानि का कारण बनती हैं। इसे https://imdpune.gov.in/hazardatlas/abouthazard.html पर देखा जा सकता है। यह एटलस राज्य सरकारों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को संवेदनशील शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों सहित हॉटस्पॉट की पहचान करने और चरम मौसम की घटनाओं से निपटने के लिए उचित योजना बनाने और कार्रवाई करने में मदद करेगा। यह उत्पाद जलवायु परिवर्तन के प्रति प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के निर्माण में सहायक है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) पहुंच बढ़ाने के लिए उपलब्ध सभी नवीनतम संचार प्रणालियों का उपयोग कर रहा है। आधिकारिक आईएमडी वेबसाइटों, एपीआई आधारित प्रत्यक्ष सूचना, कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (सीएपी), व्हाट्सएप समूहों, मोबाइल एप्लिकेशन, वेब पोर्टल, एसएमएस अलर्ट और आपदा प्रबंधन अधिकारियों के साथ घनिष्ठ समन्वय के माध्यम से प्रारंभिक चेतावनी प्रसार को मजबूत किया गया है। आईएमडी द्वारा यूट्यूब, फेसबुक, एक्स और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का व्यापक रूप से उपयोग किया जा रहा है।

आईएमडी ने अपनी सात सेवाएं (वर्तमान मौसम, नाउकास्ट, शहर का पूर्वानुमान, वर्षा की जानकारी, पर्यटन पूर्वानुमान, चेतावनी और चक्रवात) जनता के उपयोग के लिए 'उमंग' मोबाइल ऐप के साथ शुरू की हैं। इसके अलावा, आईएमडी ने मौसम पूर्वानुमान के लिए 'मौसम', कृषि मौसम संबंधी सलाह प्रसारित करने के लिए 'मेघदूत' और बिजली गिरने की चेतावनी के लिए 'दामिनी' नामक मोबाइल ऐप विकसित किए हैं। चेतावनी प्रसारित करने के लिए आईएमडी द्वारा एनडीएमए द्वारा विकसित कॉमन अलर्ट प्रोटोकॉल का भी उपयोग किया जा रहा है।

जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से समुदाय को तैयार करने के लिए राज्यों को भेद्यता और जोखिम आकलन, मानव और संस्थागत क्षमता निर्माण कार्यक्रम और जन जागरूकता कार्यक्रम चलाने में सहायता करने के उद्देश्य से, विभाग ने 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में राज्य जलवायु परिवर्तन प्रकोष्ठ (एससीसीसी) स्थापित किए हैं।

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने देश भर के विभिन्न अनुसंधान केंद्रों के सहयोग से देश भर में निगरानी और पूर्व चेतावनी प्रणालियों को बेहतर बनाने के लिए कई पहलें की हैं। इन प्रयासों से जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली चरम मौसमी घटनाओं के दौरान जान-माल के नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान मिला है।

पृथ्वी विज्ञान और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में यह जानकारी दी।

***

पीके/केसी/एसकेएस/एचबी

 


(रिलीज़ आईडी: 2241803) आगंतुक पटल : 95
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu