महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
संशोधित मिशन वात्सल्य पोर्टल बाल संरक्षण सेवाओं से जुड़े सभी हितधारकों के लिए एक एकीकृत डिजिटल मंच है
प्रविष्टि तिथि:
18 MAR 2026 3:24PM by PIB Delhi
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने संशोधित मिशन वात्सल्य पोर्टल शुरू किया है, जो बाल संरक्षण सेवाओं से जुड़े सभी हितधारकों के लिए एक एकीकृत डिजिटल मंच है। मिशन वात्सल्य पोर्टल तकनीकी रूप से एक उन्नत सुरक्षित पोर्टल है, जो राज्य और जिला स्तर पर विभिन्न हितधारकों के लिए डिजिटल कार्य मंच प्रदान करता है। पूर्व के ‘खोया-पाया’ और ‘ट्रैकचाइल्ड’ सेवाओं को इस एकीकृत पोर्टल के अंतर्गत लाया गया है।
मिशन वात्सल्य पोर्टल की प्रमुख विशेषताओं में सभी हितधारकों के उपयोग के लिए एकल डिजिटल मंच शामिल है, जैसे राज्य स्तर पर राज्य बाल संरक्षण सोसाइटी, राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसी, तथा जिला स्तर पर जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, विशेष किशोर पुलिस इकाई और बाल देखभाल संस्थान। यह पोर्टल जमीनी स्तर पर कार्यों की पुनरावृत्ति को रोकता है। साथ ही, यह विभिन्न एमआईएस डैशबोर्ड के माध्यम से बेहतर निगरानी सुनिश्चित करता है और योजना एवं क्रियान्वयन के लिए संसाधनों के इष्टतम उपयोग को बढ़ावा देता है। यह पोर्टल व्यक्तिगत बाल देखभाल योजनाओं, केस हिस्ट्री, पुनर्वास उपायों और बाल देखभाल संस्थानों में तथा गैर-संस्थागत देखभाल प्राप्त कर रहे बच्चों को प्रदान की जाने वाली सेवाओं की निगरानी के लिए डिजिटल अभिलेख रखने की सुविधा प्रदान करता है।
सरकार ने किशोर न्याय (बालकों की देखभाल एवं संरक्षण) संशोधन कानून, 2021, किशोर न्याय (बालकों की देखभाल एवं संरक्षण) मॉडल संशोधन नियम, 2022 तथा दत्तक ग्रहण विनियम, 2022 के अंतर्गत दत्तक ग्रहण से संबंधित अपनी नीति को सरल बनाया है।
दत्तक ग्रहण के लिए प्रतीक्षा अवधि राज्य में बच्चों की उपलब्धता, बच्चे की आयु, श्रेणी, लिंग और स्वास्थ्य स्थिति जैसे कारकों पर निर्भर करती है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों तथा तत्काल प्लेसमेंट श्रेणी (अधिकतर बड़े बच्चों) के लिए प्रतीक्षा अवधि न्यूनतम होती है।
विलंब को कम करने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, कारा ने पूरे दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को ऑनलाइन कैरिंग्स पोर्टल के माध्यम से डिजिटाइज किया है, साथ ही राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के साथ नियमित निगरानी और अनुवर्ती कार्य किया जाता है। इस कैरिंग्स पोर्टल को एकीकृत मिशन वात्सल्य पोर्टल के साथ जोड़ा गया है। जुलाई 2024 से एक पहचान प्रकोष्ठ भी स्थापित किया गया है, जो बाल देखभाल संस्थानों में दत्तक ग्रहण योग्य बच्चों की पहचान करता है और उन्हें कानूनी रूप से दत्तक ग्रहण के लिए मुक्त घोषित करने की प्रक्रिया को तेज करता है। दत्तक ग्रहण विनियम, 2022 के अनुसूची XIV के अंतर्गत, विनियम 46 और 50 के साथ पढ़े जाने पर, दत्तक ग्रहण प्रक्रिया में शामिल प्राधिकरणों और एजेंसियों द्वारा पालन की जाने वाले समय-सीमा निर्धारित की गई है।
किशोर न्याय (बालकों की देखभाल एवं संरक्षण) कानून, 2015 की धारा 2(5) और धारा 46 के अंतर्गत संस्थागत देखभाल छोड़ने वाले बच्चों के लिए आफ्टरकेयर (पश्चात देखभाल) का प्रावधान किया गया है, जिसमें यह अनिवार्य किया गया है कि “अठारह वर्ष की आयु पूर्ण करने पर किसी भी बाल देखभाल संस्थान से बाहर आने वाले बच्चे को समाज की मुख्यधारा में पुनः जोड़ने के लिए निर्धारित तरीके से वित्तीय सहायता प्रदान की जा सकती है।”
बच्चे के 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने से पहले, बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी), बाल देखभाल संस्थान (सीसीआई) के सहयोग से, व्यक्तिगत देखभाल योजना (आईसीबी) की समीक्षा और अपडेट करती है तथा शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, आवास, स्वास्थ्य देखभाल और सामाजिक तौर पुनः शामिल करते हुए आफ्टरकेयर योजना तैयार करती है। सीडब्ल्यूसी बच्चे की स्वतंत्र जीवन जीने की तैयारी, पारिवारिक परिस्थितियों और उपलब्ध सहयोग तंत्र का आकलन करती है और उसके बाद उपयुक्त आदेश पारित करती है।परिवार या अभिभावक उपयुक्त और इच्छुक पाए जाते हैं, तो बच्चे को उनके पास पुनः स्थापित किया जा सकता है, अन्यथा उसे आफ्टरकेयर सहायता के अंतर्गत रखा जा सकता है। यह सहायता 21 वर्ष की आयु तक प्रदान की जा सकती है और विशेष परिस्थितियों में सीडब्ल्यूसी की स्वीकृति से 23 वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है।
18 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर, यदि संस्थागत देखभाल में रहने वाले बच्चों, दत्तक लिए गए बच्चों तथा गैर-संस्थागत देखभाल (प्रायोजन, फोस्टर केयर और आफ्टरकेयर) प्राप्त कर रहे बच्चों से संबंधित डेटा का संधारण मिशन वात्सल्य पोर्टल के माध्यम से किया जाता है।
सरकार देशभर में, ग्रामीण क्षेत्रों सहित, बाल संरक्षण और बाल यौन शोषण की रोकथाम के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती है। जागरूकता गतिविधियाँ सामुदायिक संपर्क, विद्यालय आधारित कार्यक्रमों और डिजिटल अभियानों के माध्यम से राज्य सरकारों तथा अन्य हितधारकों के तालमेल से संचालित की जाती हैं। ये अभियान बाल यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण कानून, 2012 के प्रावधानों के अनुरूप हैं और इनमें बच्चों, शिक्षकों, अभिभावकों तथा समुदाय के सदस्यों के लिए बाल सुरक्षा, रिपोर्टिंग तंत्र और उपलब्ध सहायता सेवाओं पर संवेदनशीलता कार्यक्रम शामिल होते हैं। मिशन वात्सल्य के अंतर्गत राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को जमीनी स्तर पर बाल संरक्षण तंत्र को सुदृढ़ करने हेतु जागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित करने के लिए भी सहयोग प्रदान किया जाता है।
इसके अतिरिक्त, मंत्रालय मिशन वात्सल्य योजना के अंतर्गत जागरूकता बढ़ाने और प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए क्षेत्रीय सम्मेलनों तथा संवेदनशीलता/प्रसार कार्यशालाओं का आयोजन करता है।
यह जानकारी महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।
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पीके/केसी/केपी/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2241841)
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