सूचना और प्रसारण मंत्रालय
विज्ञापन संहिता भ्रामक दावों, बच्चों की असुरक्षित छवि और विज्ञापन परिषद के मानदंडों के उल्लंघन पर रोक लगाती है
तीन स्तरीय शिकायत निवारण तंत्र प्रसारण सामग्री सम्बंधी शिकायतों के प्रभावी और समयबद्ध निपटान को सक्षम बनाता है
मंत्रालय ने परामर्श जारी किए और उल्लंघन के विरुद्ध कार्रवाई की; मीडिया को कई ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म और उनसे जुड़े उत्पादों के विज्ञापनों से दूर रहने की सलाह दी
प्रविष्टि तिथि:
18 MAR 2026 3:26PM by PIB Delhi
मौजूदा नियामक ढांचे के अनुसार, निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों पर प्रसारित होने वाले सभी विज्ञापनों को केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 और उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के तहत निर्धारित विज्ञापन संहिता का पालन करना आवश्यक है। विज्ञापन संहिता में अन्य बातों के अलावा अन्य प्रावधान इस प्रकार है:
नियम 7(5): किसी भी विज्ञापन में वास्तविक रूप से साबित करने में मुश्किल ऐसे संदर्भ नहीं होंगे जिससे जनता यह अनुमान लगा सके कि विज्ञापित उत्पाद या उसके किसी भी घटक में कोई विशेष या चमत्कारी या अलौकिक गुण या विशेषता है।
नियम 7(7): कोई भी विज्ञापन जो बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डालता है या उनमें अस्वास्थ्यकर तौर-तरिकों में कोई रुचि पैदा करता है या उन्हें भीख मांगते हुए या अशोभनीय या अभद्र तरीके से दिखाता है, केबल सेवा में प्रसारित नहीं किया जाएगा।
नियम 7(9): कोई भी विज्ञापन जो विज्ञापन में स्व-नियमन के लिए संहिता का उल्लंघन करता है, जैसा कि भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (एएससीआई), मुंबई द्वारा देश में सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए समय-समय पर अपनाया गया है, केबल सेवा में प्रसारित नहीं किया जाएगा।
केबल टेलीविजन नेटवर्क (संशोधन) नियम, 2021 टेलीविजन चैनलों द्वारा प्रसारित सामग्री से सम्बंधित नागरिकों की शिकायतों/समस्याओं के निवारण के लिए एक वैधानिक त्रिस्तरीय तंत्र प्रदान करते हैं। तीन स्तरीय शिकायत निवारण संरचना इस प्रकार है:
- स्तर I – प्रसारकों द्वारा स्व-नियमन,
- स्तर II – प्रसारकों के स्व-विनियमन निकायों द्वारा स्व-नियमन, और
- स्तर III – केंद्र सरकार द्वारा निगरानी तंत्र।
केबल टेलीविजन नेटवर्क (संशोधन) नियम, 2021 का नियम 16 यह प्रावधान करता है कि यदि किसी चैनल के कार्यक्रम की सामग्री विज्ञापन संहिता के अनुरूप नहीं है तो इससे असंतुष्ट दर्शक प्रसारक को लिखित में शिकायत दर्ज करा सकता है। बशर्ते कि यदि ऐसी शिकायत भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (एएससीआई) द्वारा निर्धारित विज्ञापन संहिता से सम्बंधित है, तो ऐसी शिकायत उक्त परिषद को संबोधित की जा सकती है और परिषद अपने द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऐसी शिकायत पर कार्रवाई करेगी। इसके अलावा, परिषद शिकायत प्राप्त होने के साठ दिनों के भीतर उस पर निर्णय लेगा और प्रसारक और शिकायतकर्ता को इसकी सूचना देगी।
केंद्र सरकार द्वारा एक अंतर-विभागीय समिति (आईडीसी) का गठन किया गया है। यह कार्यक्रम संहिता और विज्ञापन संहिता के उल्लंघन या अवहेलना से संबंधित शिकायतों की सुनवाई करती है। आईडीसी की सिफारिशों के अनुसार, विज्ञापन संहिता के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन साबित होने पर निजी टीवी चैनलों के खिलाफ सलाह, चेतावनी, माफीनामा और प्रसारण बंद करने के आदेश जारी करके उचित कार्रवाई की जाती है। मंत्रालय विज्ञापन संहिता के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर प्रसारकों को सलाह भी जारी करता है।
भ्रामक विज्ञापनों पर और अंकुश लगाने के लिए और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिनांक 07.05.2024 के आदेश के अनुपालन में, इस मंत्रालय ने टीवी/रेडियो विज्ञापनों के लिए ब्रॉडकास्ट सेवा पोर्टल और प्रिंट/इंटरनेट विज्ञापनों के लिए भारतीय प्रेस परिषद के पोर्टल पर स्व-घोषणा प्रमाण पत्र (एसडीसी) अपलोड करने की एक नई सुविधा शुरू की है। मंत्रालय ने 03.07.2024 को परामर्श जारी कर विज्ञापनदाताओं/विज्ञापन एजेंसियों को सलाह दी कि वे विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्मों यानी प्रिंट/इलेक्ट्रॉनिक/इंटरनेट पर प्रकाशित होने वाले 'खाद्य एवं स्वास्थ्य क्षेत्र' से सम्बंधित उत्पादों और सेवाओं से संबंधित विज्ञापनों के लिए वार्षिक एसडीसी अपलोड करें।
डिजिटल समाचार प्रकाशकों और ओटीटी प्लेटफार्मों की सामग्री और ऑनलाइन विज्ञापनों के लिए, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने 13.06.2022, 03.10.2022 और 06.04.2023 को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया को ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफार्मों या उनके वैकल्पिक उत्पादों/सेवाओं के विज्ञापन प्रकाशित करने से परहेज करने के लिए सलाह जारी की थी।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अधीन केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने 9 जून, 2022 की अधिसूचना के माध्यम से "भ्रामक विज्ञापन रोकथाम नियम, 2022" जारी किए हैं। इनमें झूठे या भ्रामक विज्ञापनों और उनसे सम्बंधित अनुमोदनों की रोकथाम के लिए दिशानिर्देश निर्धारित किए गए हैं। झूठे और भ्रामक विज्ञापनों सहित इन दिशानिर्देशों के उल्लंघन से सम्बंधित शिकायतों का निपटारा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत किया जाता है।
सूचना एवं प्रसारण एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन द्वारा श्री सुरेश कुमार शेटकर और श्री विजयकुमार उर्फ विजय वसंत के लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी गई।
***
पीके/केसी/वीके/एसवी
(रिलीज़ आईडी: 2241887)
आगंतुक पटल : 73