सूचना और प्रसारण मंत्रालय
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सिनेमैटोग्राफ (संशोधन) अधिनियम, 2023 ने पायरेसी विरोधी अवसंरचना को मजबूत किया; अपराधियों को 3 वर्ष तक की कैद और उत्पादन लागत के 5 प्रतिशत तक का जुर्माना हो सकता है


केंद्र सरकार ने पायरेसी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 3,142 टेलीग्राम चैनलों को नोटिस जारी किया और 800 वेबसाइटों को ब्लॉक किया

प्रविष्टि तिथि: 18 MAR 2026 3:19PM by PIB Delhi

सिनेमाटोग्राफ (संशोधन) अधिनियम, 2023 ने फिल्म पायरेसी को रोकने के लिए कानूनी अवसंरचना को मजबूत किया है। सिनेमाटोग्राफ अधिनियम की धारा 6एए और 6एबी फिल्मों की अनधिकृत रिकॉर्डिंग और प्रसारण पर रोक लगाती हैं। धारा 7(1ए) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति धारा 6एए या धारा 6एबी का उल्लंघन करता है, तो उसे कम से कम 3 महीने की कैद और 3 लाख रुपये का जुर्माना देना होगा, जिसे अधिकतम 3 साल की कैद और ऑडिट की गई कुल उत्पादन लागत के 5 प्रतिशत तक के जुर्माने तक बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा, धारा 7(1बी)(ii) सरकार को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3) के अंतर्गत पायरेटेड सामग्री होस्ट करने वाले मध्यस्थों को अधिसूचित करने का अधिकार देती है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने दिनांक 3 नवंबर 2023 को जारी सार्वजनिक सूचना के अनुसार निर्धारित प्रारूप में शिकायतें प्राप्त करने के लिए नामित नोडल अधिकारियों के माध्यम से एक संस्थागत तंत्र स्थापित किया है। ऐसी शिकायतें फिल्मों के मूल कॉपीराइट धारकों, उनके द्वारा अधिकृत व्यक्तियों या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा इंटरनेट पर फिल्मों की पायरेटेड या कॉपीराइट उल्लंघन वाली प्रतियों के प्रदर्शन के संबंध में प्रस्तुत की जा सकती हैं। शिकायतें प्राप्त होने पर, मध्यस्थों को संबंधित लिंक तक पहुंच को निष्क्रिय करने के लिए सूचनाएं जारी की जाती हैं।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(ख) के अंतर्गत संबंधित सरकारों द्वारा गैर-कानूनी कृत्य या सामग्री की सूचना मध्यस्थों को दी जाती है ताकि वे ऐसी सामग्री को हटा सकें/उस तक पहुंच को अक्षम कर सकें। मध्यस्थों को किसी भी ऐसी सामग्री को हटाना आवश्यक है जो उस समय लागू किसी भी कानून का उल्लंघन करती हो, जैसे ही उन्हें न्यायालय के आदेश या संबंधित सरकार या उसकी अधिकृत एजेंसी द्वारा नोटिस के माध्यम से इसकी जानकारी दी जाती है।

भारत सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के अंतर्गत सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 (आईटी नियम 2021) अधिसूचित किए हैं। आईटी नियम, 2021 का भाग-II, जो सोशल मीडिया मध्यस्थों सहित मध्यस्थों से संबंधित है, अन्य बातों के अलावा, उनके प्लेटफार्मों पर होस्ट की गई, प्रदर्शित की गई, अपलोड की गई, प्रकाशित की गई, प्रसारित की गई, संग्रहीत या साझा की गई जानकारी से संबंधित मध्यस्थों पर विशिष्ट दायित्व डालता है।

सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमों के नियम 3(1)(ख) में यह प्रावधान है कि मध्यस्थों को स्वयं उचित प्रयास करने चाहिए। उन्हें अपने कंप्यूटर संसाधनों का उपयोग किसी भी ऐसी जानकारी को होस्ट करने, प्रदर्शित करने, अपलोड करने, संशोधित करने, प्रकाशित करने, प्रसारित करने, संग्रहीत करने, अपडेट करने या साझा करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए जो किसी पेटेंट, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट या अन्य स्वामित्व अधिकारों का उल्लंघन करती हो।

पायरेसी विरोधी कार्रवाई

कानून के उपरोक्त प्रावधानों के अनुसार मध्यस्थ टेलीग्राम ऐप को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(बी) के तहत 11 मार्च, 2026 को अधिसूचित किया गया था ताकि कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के उल्लंघन में अनधिकृत रूप से कुछ सामग्री मालिकों, ओटीटी प्लेटफॉर्मों और निर्माताओं के स्वामित्व वाली या लाइसेंस प्राप्त सामग्री प्रकाशित करने वाले 3,142 चैनलों को हटाया जा सके और उन तक पहुंच को अक्षम किया जा सके। इसके अलावा, इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (आईएसपी) के माध्यम से पायरेटेड सामग्री होस्ट करने वाली लगभग 800 वेबसाइटों तक पहुंच को अक्षम कर दिया गया है।

सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने श्री प्रद्युत बोरदोलोई के प्रश्न के लिखित उत्‍तर में यह जानकारी आज लोकसभा में दी।

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पीके/केसी/एचएन/वाईबी


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