मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

मयूरभंज में पशुधन स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा अवसंरचना

प्रविष्टि तिथि: 18 MAR 2026 4:12PM by PIB Delhi

भारत पशुधन पोर्टल पर संबंधित राज्य द्वारा अपलोड की गई जानकारी के अनुसार ओडिशा में पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एलएचडीसीपी) के अंतर्गत वर्ष 2025-26 के दौरान प्राप्त टीकाकरण कवरेज एफएमडी के लिए 543.35 लाख, ब्रुसेलोसिस के लिए 11.35 लाख, पीपीआर के लिए 11.35 लाख और सीएसएफ के लिए 1.91 लाख है। इसके अलावा मयूरभंज जिले में एफएमडी के लिए टीकाकरण कवरेज 10.57 लाख, ब्रुसेलोसिस के लिए 726 लाख, पीपीआर के लिए 1.06 लाख और सीएसएफ के लिए 14020 है।

 

  • पशुपालन राज्य का विषय है और    पशु चिकित्सा संबंधी बुनियादी ढांचे की स्थापना और सुदृढ़ीकरण संबंधित राज्य द्वारा किया जाता है। राज्य से प्राप्त जानकारी के अनुसार ओडिशा में पशु चिकित्सा सेवाओं की सुगमता और बेहतरी के लिए 62 पशु चिकित्सालय, 479 पशु औषधालय और 3553 पशु चिकित्सा सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं। 2025-26 के दौरान, एफएमडी के प्रकोप घटकर 7 रह गए हैं और ब्रुसेलोसिस का प्रकोप घटकर शून्य हो गया है।

 

  • पशुपालन राज्य का विषय है और पशु चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करना, जिसमें कर्मचारियों की भर्ती भी शामिल है संबंधित राज्य सरकार द्वारा किया जाता है। हालांकि जनजातीय क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए इस मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदम निम्नलिखित हैं:

 

  1. एफएमडी, ब्रुसेलोसिस, पीपीआर और सीएसएफ के खिलाफ टीकाकरण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की गई है, जिसे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अपनाया जाना है। इसमें मांग का आकलन, सहायक उपकरण/उपभोग्य वस्तुएं, मानव संसाधन और सूक्ष्म योजना, सीरो-निगरानी और प्रकोप प्रबंधन शामिल हैं।
  2. पशुओं के पंजीकरण और कान में टैग लगाने, टीके लगाने और एनडीएलएम पर डेटा अपलोड करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को प्रसारित कर दी गई है
  3. इस योजना के अंतर्गत, आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण चार बीमारियों, अर्थात् एफएमडी, ब्रुसेलोसिस, पेस्ट डेस पेटिट्स रूमिनेंट्स (पीपीआर) और क्लासिकल स्वाइन फीवर (सीएसएफ) के खिलाफ पशुओं के टीकाकरण के लिए 100% केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है। इसमें गुणवत्तापूर्ण टीके की केंद्रीकृत खरीद और आवश्यकतानुसार आपूर्ति के साथ-साथ हितधारकों के बीच जागरूकता पैदा करना शामिल है।
  4. पशु रोगों के नियंत्रण के लिए राज्यों को सहायता (एएससीएडी) के अंतर्गत, राज्य द्वारा प्राथमिकता प्राप्त पशुधन रोगों की रोकथाम और नियंत्रण, रोग निदान प्रयोगशालाओं को मजबूत करने आदि के लिए साझा आधार पर सहायता प्रदान की जाती है।
  5. भारत में पशु चिकित्सा अवसंरचना के न्यूनतम मानकों के लिए दिशानिर्देश तैयार कर लिए गए हैं और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को इन्हें अपनाने और आवश्यक कार्रवाई करने के अनुरोध के साथ भेज दिए गए हैं।
  6. विभाग ने भारतीय पशु चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1984 की धारा 2(ई) और धारा 15 के साथ प्रथम अनुसूची के अनुसार ओडिशा में 2 कॉलेजों को मान्यता दी है।

इसके अलावा, राज्य द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ओडिशा राज्य में मुख्यमंत्री भ्राम्यमान प्राणी चिकित्सा सेवा योजना के तहत किसानों के घर-घर पशु चिकित्सा सेवा पहुंचाने के लिए 314 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयां (एमवीयू) कार्यरत हैं।

 

यह जानकारी मत्स्यपालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में दी।

*****

पीके/केसी/एनकेएस


(रिलीज़ आईडी: 2242006) आगंतुक पटल : 55
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu