इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने डिजिटल सेवाओं एवं अवसरों तक व्यापक पहुंच को संभव बनाया है
एक दशक में ब्रॉडबैंड के ग्राहकों की संख्या में 400 प्रतिशत की वृद्धि हुई
प्रविष्टि तिथि:
18 MAR 2026 4:04PM by PIB Delhi
प्रौद्योगिकी के लोकतंत्रीकरण और नागरिकों के सशक्तिकरण से संबंधित माननीय प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप, भारत सरकार ने जुलाई 2015 में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत की।
इस कार्यक्रम के जरिए, सरकार ने बहुआयामी रणनीति अपनाकर डिजिटल विभाजन को पाटने का प्रयास किया है:
• इंटरनेट तक पहुंच बढ़ाना,
• इंटरनेट को किफायती बनाना,
• डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना,
• डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना
इन प्रयासों से डिजिटल सेवाओं एवं अवसरों तक व्यापक पहुंच संभव हुई है, जिससे देश भर में समावेशी और समान डिजिटल विकास को बढ़ावा मिला है। यह तथ्य निम्नलिखित आंकड़ों से स्पष्ट होता है:
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2014-15
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2024-25
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टिप्पणी
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ब्रॉडबैंड के कुल ग्राहक
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25 करोड़
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103 करोड़
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ग्राहकों की संख्या में 400 प्रतिशत की वृद्धि
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मोबाइल बेस ट्रांससीवर स्टेशनों (बीटीएस) की कुल संख्या
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7.9 लाख
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29.50 लाख
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लगभग 273 प्रतिशत की वृद्धि
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मोबाइल कनेक्टिविटी (2जी/3जी/4जी) से कवर किए गए गांव
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~ 5.27 लाख
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6.35 लाख
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लगभग 20.5 प्रतिशत की वृद्धि (लगभग सार्वभौमिक कवरेज)
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कुल ऑप्टिकल फाइबर बिछाया गया
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358 किलोमीटर
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6,92,676 किलोमीटर
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ओएफसी बिछाने में लगभग 1,935 गुना वृद्धि
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प्रति ग्राहक औसत मासिक डेटा उपभोग
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61.66 एमबी
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~ 25.25 जीबी
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डेटा उपभोग में लगभग ~419 गुना वृद्धि
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प्रति जीबी डेटा की लागत
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269 रुपये
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~ 7.9 रुपये
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लागत में 97 प्रतिशत की कमी
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डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने लोगों के जीवन में मूलभूत बदलाव लाए हैं:
• 143 करोड़ से अधिक आधार संख्या जारी किए गए हैं, जिससे भारतीय निवासियों को डिजिटल पहचान मिली है।
• एकीकृत भुगतान इंटरफेस प्रणाली (यूपीआई) के विकास में आधार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भारत की यूपीआई अब 46 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं और 685 बैंकों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान प्रणाली है। यूपीआई भारत के 81 प्रतिशत डिजिटल भुगतानों और वैश्विक स्तर पर लगभग 49 प्रतिशत वास्तविक समय के डिजिटल भुगतानों को संचालित करती है।
• जन धन, आधार और मोबाइल (जेएएम) तिकड़ी का उपयोग करते हुए, 49.82 लाख करोड़ रुपये की सब्सिडी और लाभ सीधे नागरिकों को हस्तांतरित किए गए हैं।
पीएमजीदिशा, डिजिलॉकर और उमंग के बारे में विशिष्ट विवरण:
डिजीलॉकर: डिजीलॉकर नागरिकों को डिजिटल रूप से जारी किए गए दस्तावेजों को कभी भी और कहीं भी देखने तथा साझा करने में सक्षम बनाता है। इससे भौतिक प्रतियां साथ रखने की जरूरत समाप्त हो जाती है और अधिकारियों द्वारा सत्यापन में आसानी होती है।
डिजीलॉकर ने आम नागरिक को मूल जारीकर्ता से प्रामाणिक डिजिटल दस्तावेज़ों तक डिजिटल पहुंच प्रदान की है। वर्तमान में, इस प्लेटफॉर्म पर 67 करोड़ उपयोगकर्ता पंजीकृत हैं। डिजीलॉकर का उपयोग करके 967 करोड़ से अधिक दस्तावेज जारी किए जा चुके हैं।
उमंग: कई सरकारी सेवाओं तक पहुंचने के लिए एक एकीकृत इंटरफ़ेस प्रदान करता है। इससे नागरिक अपने घरों से ही सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं, जिससे समय और यात्रा संबंधी लागत की बचत होती है।
सभी सरकारी सेवाओं के लिए उमंग मोबाइल एप्लिकेशन सक्रिय है और यह 2,446 से अधिक सेवाएं प्रदान करता है। इसके 10.51 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं और अब तक 741 करोड़ से अधिक लेनदेन किए जा चुके हैं।
पीएमजीदिशा: डिजिटल साक्षरता सुनिश्चित करने हेतु प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (पीएमजीदिशा) 2017 में शुरू किया गया था। यह योजना 31 मार्च 2024 को समाप्त हुई। यह योजना विश्व की सबसे बड़ी डिजिटल साक्षरता से जुड़ी पहलों में से एक थी। कुल 6 करोड़ लोगों को प्रशिक्षित करने के लक्ष्य की तुलना में, देशभर में 6.39 करोड़ से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया गया।
यह जानकारी केन्द्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री श्री जितिन प्रसाद ने 18.03.2026 को लोकसभा में दी।
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पीके/केसी/आर
(रिलीज़ आईडी: 2242086)
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