सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
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हरित राजमार्ग पहल को प्रोत्साहन

प्रविष्टि तिथि: 18 MAR 2026 6:21PM by PIB Delhi

हरित राजमार्ग पहल ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करके, पर्यावरण के अनुकूल निर्माण वस्तुओं के इस्तेमाल, जल संसाधनों के उचित प्रबंधन और निर्माण एवं रखरखाव गतिविधियों के दौरान कार्बन उत्सर्जन को कम करने के उपायों के माध्यम से पर्यावरण के नजरिए से संपोषित सड़क निर्माण को प्रोत्साहन दिया है। इन पहलों का उद्देश्य पारिस्थितिक संतुलन में सुधार करना और राजमार्ग विकास की पर्यावरणीय संपोषण को बेहतर करना है।

सरकार की ओर से किए गए कई नीतिगत सुधारों और पहलों के चलते इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में पुनर्चक्रित सामग्रियों का इस्तेमाल दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। नीतिगत फ्रेमवर्क संपोषित निर्माण पद्धतियों को प्रोत्साहित करता है और तकनीकी तौर पर संभव होने पर परियोजनाओं में पुनर्चक्रित और कचरे से पैदा हुई वस्तुओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देता है। दिशा-निर्देश, सलाह और तकनीकी प्रगति जरिए लगातार प्रयासों ने व्यापक तौर पर अपनाने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है, जिससे निर्माण गतिविधियों में पुनर्चक्रित सामग्रियों की क्षमता और स्वीकृति में बढ़ोतरी हुई है।

हरित राजमार्ग (वृक्षारोपण, प्रत्यारोपण, सौंदर्यीकरण और रखरखाव) नीति, 2015 और भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी): एसपी:21 के दिशानिर्देशों के अंतर्गत पर्यावरण के नजरिए से संपोषित विकास के हिस्से के तौर पर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में वृक्षारोपण और कार्बन ऑफसेटिंग तरीकों को इकट्ठा किया गया है।

इस ढांचे के अंतर्गत, राष्ट्रीय राजमार्गों के मध्य भाग, मार्ग और अन्य मौजूदा मार्ग (आरओडब्ल्यू) के किनारे वृक्षारोपण किया जाता है। इसके साथ ही, जहां भी राजमार्ग विकास के लिए वृक्षों की कटाई जरूरी होती है, वहां क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण और वृक्ष प्रत्यारोपण किया जाता है।

पर्यावरण अनुपालन सुनिश्चित करने और संपोषित विकास को प्रोत्साहन देने के लिए सड़क निर्माण में तकनीकी नवाचारों को तेजी से अपनाया जा रहा है। राजमार्ग परियोजनाओं में फ्लाई ऐश, प्लास्टिक का कचरा, पुनः प्राप्त डामर फुटपाथ (आरएपी) और निर्माण एवं तोड़-फोड़ का कचरा जैसे पुनर्चक्रित और कचरे की वस्तुओं के इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इसके साथ ही, हरित पहलों, ऊर्जा-कुशल निर्माण प्रौद्योगिकियों, डिजिटल निगरानी प्रणालियों और बेहतर पर्यावरण प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने से सड़क निर्माण के दौरान उत्सर्जन को कम करने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम करने में मदद मिली है। राजमार्ग विकास में पर्यावरणीय मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए इन नवाचारों को प्रासंगिक विशिष्टताओं और आईआरसी दिशानिर्देशों के अनुसार लागू किया जाता है।

यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन जयराम गडकरी जी ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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