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एनएफएसयू और सीएफएसएल के परिसरों का एकीकरण

प्रविष्टि तिथि: 18 MAR 2026 2:49PM by PIB Delhi

सरकार ने वैज्ञानिक जांच को बढ़ावा देने व न्यायिक प्रक्रियाओं की गुणवत्ता और समयबद्धता में सुधार के उद्देश्य से देश में फोरेंसिक तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसी क्रम में, शैक्षणिक प्रशिक्षण, अनुसंधान और परिचालन फोरेंसिक सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने, कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा आधुनिक फोरेंसिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में पहल की गई है। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु भारत सरकार ने छत्तीसगढ़, ओडिशा, तमिलनाडु, राजस्थान, बिहार और उत्तर प्रदेश सहित 6 राज्यों में केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं (सीएफएसएल) के साथ राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय के परिसरों की स्थापना को मंजूरी प्रदान की है।

एनएफएसयू अत्याधुनिक फोरेंसिक प्रौद्योगिकियां प्रदान करता है, जैसे कि उन्नत डीएनए विश्लेषण, साइबर फोरेंसिक्स, डिजिटल फोरेंसिक्स, फोरेंसिक मनोविज्ञान, मादक पदार्थ और मनोविकारक पदार्थ, और बैलिस्टिक फोरेंसिक्स। एनएफएसयू अपने परिसरों के माध्यम से फोरेंसिक विज्ञान और संबद्ध विषयों में 60 से अधिक शैक्षणिक कार्यक्रम प्रदान करता है। इनमें स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा और डॉक्टरेट कार्यक्रम शामिल हैं जैसे कि बीएससी, एमएससी, बीटेक, एमटेक, एमबीए और पीएचडी, जो फोरेंसिक विज्ञान, साइबर सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक्स, व्यवहार विज्ञान, फोरेंसिक मनोविज्ञान और संबंधित क्षेत्रों के विभिन्न विशिष्ट क्षेत्रों में उपलब्ध हैं। इन शैक्षणिक कार्यक्रमों में अपराध स्थल प्रबंधन (क्राइम सीन मैनेजमेंट) फोरेंसिक विज्ञान पाठ्यक्रम का एक अभिन्न अंग है। इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय हितधारकों की क्षमता निर्माण के लिए अपराध स्थल प्रबंधन पर अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित करता है। एनएफएसयू के अलावा, वैज्ञानिक साक्ष्य संग्रह, संरक्षण और डिजिटल प्रलेखन सहित आधुनिक अपराध स्थल प्रबंधन पद्धतियों को सीएफएसएल द्वारा भी सहयोग दिया जाता है।

सीएफएसएल और एनएफएसयू से न्याय व्यवस्था में शामिल कई हितधारकों को लाभ होता है, जिनमें राज्य और केंद्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियां, केंद्रीय सरकारी विभाग, राज्य सरकारी विभाग, न्यायिक अधिकारी, खुफिया कर्मी, न्यायालय, बैंक, कॉर्पोरेट क्षेत्र और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम शामिल हैं।

देश में पहले से ही चंडीगढ़, दिल्ली, कामरूप (असम), कोलकाता (पश्चिम बंगाल), भोपाल (मध्य प्रदेश), पुणे (महाराष्ट्र) और हैदराबाद (तेलंगाना) में स्थापित 7 केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं (सीएफएसएल) के अतिरिक्त, जम्मू (जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश), राजस्थान, तमिलनाडु, बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और केरल में 8 नई सीएफएसएल स्थापित करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें से सांबा (जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश), चेंगलपट्टू (तमिलनाडु), खुर्दा (ओडिशा) और रायपुर (छत्तीसगढ़) में भूमि आवंटित की गई है।

राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय के गांधीनगर (गुजरात) और दिल्ली स्थित प्रारंभिक परिसरों के अतिरिक्त, देश के विभिन्न राज्यों में इसके विस्तार को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा गोवा, अगरतला (त्रिपुरा), भोपाल (मध्य प्रदेश), धारवाड़ (कर्नाटक), गुवाहाटी (असम), नागपुर (महाराष्ट्र), खुर्दा (ओडिशा), रायपुर (छत्तीसगढ़), चेंगलपट्टू (तमिलनाडु), राजस्थान, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में कुल 14 नए परिसरों की स्थापना स्वीकृत की गई है। इनमें से गोवा, अगरतला, भोपाल, धारवाड़, गुवाहाटी, नागपुर, खुर्दा, रायपुर और चेंगलपट्टू में भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। वहीं, जयपुर (राजस्थान) सहित कई स्वीकृत स्थानों पर एनएफएसयू के परिसर वर्तमान में ट्रांजिट परिसरों से संचालित किए जा रहे हैं।

फोरेंसिक विज्ञान सेवा निदेशालय व राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय अपने-अपने जनादेश के अनुरूप राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फोरेंसिक अनुसंधान संस्थानों के साथ सक्रिय सहयोग करते हैं, जो एक निरंतर और गतिशील प्रक्रिया है।

गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री बंदी संजय कुमार ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह बात कही।

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पीके/केसी/एनके


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