पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

डब्ल्यूआईआई ने इच्छुक लोगों के लिए 10वां वन्यजीव संरक्षण पाठ्यक्रम संचालित किया


2012 से अब तक इस नई पहल के तहत 148 प्रतिभागी प्रशिक्षित, आम लोग वन्यजीव संरक्षण के बारे में अवगत हुए

प्रविष्टि तिथि: 19 MAR 2026 2:34PM by PIB Delhi

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन के तहत एक स्वायत्त संस्था, भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) ने 2 से 11 मार्च, 2026 तक आम जनता के लिए दसवां वन्यजीव संरक्षण पाठ्यक्रम आयोजित किया, जिसमें 15 वन्यजीव प्रेमियों ने भाग लिया। 2012 में इस पाठ्यक्रम की शुरुआत से लेकर अब तक विभिन्न व्यावसायिक पृष्ठभूमियों से जुड़े कुल 148 प्रतिभागियों को इस पहल के तहत प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह विशेष पाठ्यक्रम, देश में वन्यजीव संरक्षण क्षमता को मजबूत करने के लिए, वन अधिकारियों, क्षेत्र प्रबंधकों, शोधकर्ताओं और पशु चिकित्सकों के लिए डब्ल्यूआईआई द्वारा नियमित रूप से आयोजित किए जाने वाले व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की श्रृंखला के अतिरिक्त है। यह पाठ्यक्रम वन्यजीव जीव विज्ञान और संरक्षण में कोई औपचारिक प्रशिक्षण या अनुभव न रखने वाले आम लोगों और उत्साही लोगों को वन्यजीव संरक्षण से परिचित कराता है।

इस पाठ्यक्रम में भाग लेने वाले प्रतिभागियों ने सशस्त्र बलों, डॉक्टरों, इंजीनियरों, आईटी पेशेवरों, वित्त और धन प्रबंधन, कॉरपोरेट जगत, पत्रकारों और मीडियाकर्मियों, पशु चिकित्सकों, शिक्षाविदों, संरक्षण स्वयंसेवकों और छात्रों सहित विभिन्न प्रकार के व्यवसायों का प्रतिनिधित्व किया है।

दस दिवसीय कार्यक्रम  में डब्ल्यूआईआई के संकाय सदस्यों और अनुभवी शोधकर्ताओं द्वारा दिए गए व्याख्यान-आधारित सत्रों के चार दिन शामिल थे। इन सत्रों में भारतीय जैवभूगोल, देश भर में वन्यजीव संरक्षण के मुद्दे और रणनीतियां, बड़े स्तनधारी जीवों की आबादी का विज्ञान और प्रबंधन, वन्यजीवों के अंगों का अवैध व्यापार और फोरेंसिक विज्ञान की भूमिका, संकटग्रस्त जंगली जानवरों का प्रबंधन और नागरिक विज्ञान संबंधी पहलों का महत्व जैसे विषयों को शामिल किया गया।

प्रतिभागियों को उत्तराखंड के कोटद्वार के पास स्थित लांसडाउन वन प्रभाग में पांच दिवसीय क्षेत्र भ्रमण पर भी ले जाया गया। इस भ्रमण के दौरान, उन्हें वन और वन्यजीवों के प्राकृतिक इतिहास अवलोकन, वन शिल्प, वन्यजीव प्रबंधन और संरक्षण चुनौतियों के व्यावहारिक पहलुओं के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की वनों पर निर्भरता से अवगत कराया गया।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन के अपर महानिदेशक (वन्यजीव) श्री रमेश कुमार पांडे, आईएफएस की उपस्थिति में 11 मार्च, 2026 को समापन कार्यक्रम आयोजित किया गया। उन्होंने प्रतिभागियों से बातचीत की और भारत में वन्यजीव संरक्षण पर अपने विचार साझा किए।

विभिन्न पारिस्थितिक प्रणालियों, वन्यजीव अनुसंधान, संरक्षण चुनौतियों और क्षेत्र-आधारित शिक्षण के माध्यम से, इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य भारत की जैव विविधता के बारे में आम लोगों की समझ को बढ़ाना और नागरिकों को वन्यजीव संरक्षण में सक्रिय रूप से योगदान देने और समाज में जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करना था।

पाठ्यक्रम के बारे में अधिक जानकारी के लिए कृपया डॉ. सुरेश कुमार, वैज्ञानिक, डब्ल्यूआईआई, 91934 33837 से संपर्क करें।

 

***

पीके/केसी/एसकेएस/एसके

 

 

 


(रिलीज़ आईडी: 2242474) आगंतुक पटल : 211
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Gujarati , Urdu