मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
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कोंकण क्षेत्र में अंतर्देशीय मत्स्य पालन के लिए जलाशयों और अमृत सरोवरों का उपयोग

प्रविष्टि तिथि: 19 MAR 2026 2:27PM by PIB Delhi

सरकार ने केन्‍द्रीय बजट 2026-27 में देश के 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के समेकित विकास के माध्यम से मत्स्य पालन और जलीय कृषि के विकास की घोषणा की है, जिसमें महाराष्ट्र का कोंकण क्षेत्र भी शामिल है। महाराष्ट्र सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में कोंकण क्षेत्र सहित 34 जलाशयों को समेकित विकास के लिए चयनित किया गया है। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों में स्वीकृत जिला-वार मत्स्य मूल्य श्रृंखला इस प्रकार है:

क्रम संख्‍या

जिला

पीएमएमएसवाई के अंतर्गत स्वीकृत शीत श्रृंखला इकाइयाँ

(i)

(ii)

(iii)

1.

रायगढ़

40

2.

रत्‍नागिरी

62

3.

सिंधुदुर्ग

96

 

कुल

198

() देश में मछुआरों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार के मत्स्य विभाग (डीओएफ), मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय (एमओएफएएचऔरडी) सहकारी समितियों और फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (एफएफपीओ) को प्रोत्साहित कर रहा है। राज्य के कोंकण क्षेत्र में वर्तमान में 12 एफएफपीओ कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त, मत्स्य विभाग देश में, जिसमें महाराष्ट्र का कोंकण क्षेत्र भी शामिल है, मत्स्य पालन और संबंधित गतिविधियों के विकास के लिए स्टार्टअप्स और महिला-नेतृत्व वाले समूहों को भी सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है। इसके लिए पीएमएमएसवाई के अंतर्गत विभिन्न परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है तथा उनके कार्यान्वयन की सक्रिय रूप से निगरानी भी की जा रही है।

() सरकार के मत्स्य विभाग ने राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय में बजट घोषणाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए लक्ष्यों और अपेक्षित परिणामों सहित कार्ययोजना तैयार की है।

यह जानकारी मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।

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पीके/केसी/केपी

 


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