जनजातीय कार्य मंत्रालय
सरकार की तरफ से जनजातीय पर्यटन को प्रोत्साहन: क्षमता निर्माण कार्यशाला ने तीन राज्यों के होमस्टे मालिकों को सशक्त बनाया
पीएम जनमन और डीएजेजीयूए योजनाएं सामुदायिक पर्यटन के माध्यम से जनजातीय आजीविका को बदल देंगी
जनजातीय होमस्टे समावेशी विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए विकास के इंजन के रूप में उभर रहे हैं
सरकार ने होमस्टे मालिकों के लिए क्षमता निर्माण कार्यशाला के माध्यम से जनजातीय पर्यटन इकोसिस्टम को मजबूत किया
प्रविष्टि तिथि:
19 MAR 2026 9:45PM by PIB Delhi
भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय (एमओटीए) ने भारत पर्यटन विकास निगम लि. (आईटीडीसी) के सहयोग से, नई दिल्ली के होटल सम्राट में जनजातीय होमस्टे मालिकों के लिए एक क्षमता निर्माण कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया।
इस कार्यशाला में गुजरात, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के जनजातीय होमस्टे मालिक और उनकी टीमें एक साथ शामिल हुईं, जिससे जनजातीय आजीविका को बेहतर बनाने के एक प्रमुख माध्यम के रूप में, समुदाय-आधारित और टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का पता चलता है।
इस सत्र का नेतृत्व जनजातीय कार्य मंत्रालय के अपर सचिव श्री मनीष ठाकुर ने किया, जिन्होंने प्रमुख जनजातीय कल्याण योजनाओं और जमीनी स्तर पर उद्यमिता के साथ उनके सीधे जुड़ाव का एक विस्तृत अवलोकन प्रस्तुत किया।
प्रमुख जनजातीय विकास पहलों पर विशेष ध्यान
इस कार्यशाला में सरकार के उन प्रमुख कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला गया, जो जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, कौशल और आर्थिक अवसरों को सुदृढ़ बना रहे हैं:
पीएम जनमन (पीएम जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान)
एक परिवर्तनकारी पहल जिसका उद्देश्य आवास, सड़कें, स्वास्थ्य सेवा, पेयजल और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के माध्यम से 'विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों' (पीवीटीजी) का उत्थान करना है-जो दूरदराज के क्षेत्रों में पर्यटन के विकास की नींव रखती है।
डीएजेजीयूए (अनुसूचित जनजातियों के लिए विकास कार्य योजना)
एक अभिसरण-आधारित विकास ढांचा, जो आजीविका सृजन, कौशल विकास और सांस्कृतिक संरक्षण पर केंद्रित है, और जनजातीय समुदायों को सतत एवं गरिमापूर्ण आर्थिक प्रगति हासिल करने में सक्षम बनाता है।
आदि कर्मयोगी अभियान
एक क्षमता-निर्माण पहल, जिसे डिजिटल साक्षरता, शासन संबंधी जागरूकता और उद्यमशीलता कौशल को बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि जनजातीय हितधारक सरकारी योजनाओं तक प्रभावी ढंग से पहुंच सकें और उनका लाभ उठा सकें।
आदिवासी उद्यमियों को सशक्त बनाना
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, श्री मनीष ठाकुर ने इस बात पर जोर दिया कि: “आदिवासी होमस्टे मालिक केवल उद्यमी ही नहीं हैं-बल्कि वे भारत की समृद्ध स्वदेशी विरासत के दूत हैं। सरकारी पहलें यह सुनिश्चित कर रही हैं कि आदिवासी समुदाय अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए सतत रूप से आगे बढ़ें।”
रणनीतिक महत्व
यह कार्यशाला एक व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य है:
- समावेशी पर्यटन विकास को बढ़ावा देना
- आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय आजीविका को सुदृढ़ बनाना
- आर्थिक सशक्तिकरण के माध्यम से सांस्कृतिक संरक्षण को प्रोत्साहित करना
- कल्याणकारी योजनाओं की 'लास्ट-माइल डिलीवरी' (अंतिम छोर तक पहुंच) को बेहतर बनाना
पर्यटन को विकास पहलों के साथ एकीकृत करके, सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत के बढ़ते पर्यटन क्षेत्र के लाभ सीधे आदिवासी बहुल क्षेत्रों तक पहुंचे।
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पीके/केसी/एमपी
(रिलीज़ आईडी: 2242782)
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