संस्कृति मंत्रालय
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आईजीएनसीए के 39वें स्थापना दिवस पर न्यासियों से मुलाकात की; भारत की विविध संस्कृति को लोकप्रिय बनाने पर चर्चा की
प्रविष्टि तिथि:
19 MAR 2026 11:16PM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के न्यासियों (ट्रस्टियों) से मुलाकात की तथा भारत की विविध संस्कृति को और अधिक लोकप्रिय बनाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। आईजीएनसीए ट्रस्ट (न्यास) के अध्यक्ष श्री राम बहादुर राय और सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी सहित ट्रस्ट के 14 सदस्यों ने संस्थान के 39वें स्थापना दिवस समारोह से पूर्व प्रधानमंत्री से भेंट की।
प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए माननीय प्रधानमंत्री ने ‘युगे युगीन भारत संग्रहालय’ का उल्लेख किया और कहा कि जो स्थान पहले सत्ता का केंद्र हुआ करता था, वह अब संस्कृति के केंद्र में परिवर्तित हो गया है। उन्होंने दोहराया कि पहले नॉर्थ और साउथ ब्लॉक सत्ता के प्रतीक माने जाते थे, लेकिन अब यह स्थिति बदल गई है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि इतिहास की समझ होना बेहद ही आवश्यक है और आईजीएनसीए जैसे सांस्कृतिक संगठनों ने लोगों में इस इतिहास की इस समझ को जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने ‘स्व’ की भावना के माध्यम से भारत को समझने के महत्व पर भी बल दिया।
प्रधानमंत्री ने एक्स (X) पर लिखा: “आईजीएनसीए के न्यासियों(ट्रस्टियों) से मुलाकात की और भारत की विविध संस्कृति को और अधिक लोकप्रिय बनाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। हमने इस यात्रा में अधिक-से-अधिक लोगों को जोड़ने, डिजिटल और जमीनी स्तर की पहलों के माध्यम से जनसंपर्क को मजबूत करने तथा कलाकारों और विद्वानों को हमारी समृद्ध विरासत के संरक्षण और संवर्धन में सहयोग देने के तरीकों पर भी विचार किया।”
प्रधानमंत्री से मिलने वाले ट्रस्ट के सदस्यों में डॉ. सोनल मानसिंह, पूर्व राज्यसभा सांसद; श्री हर्षवर्धन नेओटिया; डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम; डॉ. भारत गुप्त; डॉ. संध्या पुरेचा; श्री देवेंद्र शर्मा; सुश्री राठी विनय झा; प्रो. निर्मला शर्मा; श्री बिराद याज्ञिक; प्रो. कुलदीप अग्निहोत्री; सुश्री वंदना जैन; तथा श्री प्रसून जोशी शामिल थे।
इस अवसर पर श्री राम बहादुर राय ने कहा कि आईजीएनसीए के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के बाद पिछले दस वर्षों में यह संस्थान एक विशिष्ट संस्थान से बदलकर हर भारतीय का संस्थान बन गया है और देश के लोगों के लिए संस्कृति का एक लोकतांत्रिक केंद्र बनकर उभरा है। अन्य ट्रस्टियों ने भी इसी भावना को दोहराया और सामूहिक रूप से पिछले दशक को सांस्कृतिक पुनर्जागरण का काल बताया, एक ऐसा काल जो सुचारु, विवादों से मुक्त और हर दृष्टि से सफल रहा है।
आईजीएनसीए के 39वें स्थापना दिवस का शुभारंभ तीन महत्वपूर्ण प्रदर्शिनयों के भव्य उद्घाटन के साथ हुआ। इन प्रदर्शिनयों का उद्घाटन अध्यक्ष श्री राम बहादुर राय, सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी तथा ट्रस्ट के प्रतिष्ठित सदस्यों, जिनमें प्रख्यात गीतकार और कवि प्रसून जोशी भी शामिल हैं, द्वारा किया गया। यह उल्लेखनीय है कि संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक स्वायत्त संस्थान आईजीएनसीए 19 से 21 मार्च 2026 तक अपना 39वां स्थापना दिवस मना रहा है।
स्थापना दिवस समारोह के अंतर्गत, कलाकोष प्रभाग द्वारा महत्वपूर्ण पुस्तक श्रृंखला ‘कलातत्त्वकोश’ के आठवें खंड के विमोचन एवं चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस खंड का विमोचन प्रो. सुधीर लाल, विभागाध्यक्ष (कलाकोष); प्रो. आर्य भूषण शुक्ल, प्रमुख, भारतीय विद्या प्रयोजना; तथा प्रो. मारुति नंदन तिवारी, प्रो. रजनीश कुमार मिश्रा और प्रो. ओमनाथ विमली द्वारा किया गया।
वक्ताओं ने भारतीय कला के मूलभूत अवधारणाओं को समझने में ‘कलातत्त्वकोश’ के महत्व पर बल दिया और इसे भारतीय ज्ञान परंपरा का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया। प्रो. सुधीर लाल ने स्वागत एवं परिचयात्मक वक्तव्य प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने इस परियोजना और इस खंड की पृष्ठभूमि, उद्देश्यों तथा विशिष्ट विशेषताओं पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर उपस्थित विद्वानों और प्रतिभागियों ने इस प्रकाशन को भारतीय कला अध्ययन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और इस दिशा में आईजीएनसीए के प्रयासों की सराहना की। इस कार्यक्रम में विद्वानों, शोधकर्ताओं और कला प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस अवसर पर आयोजित विशेष प्रदर्शिनयों में ‘कलादृष्टि: ए डिकेड ऑफ विजन’ नामक एक फोटोग्राफिक प्रदर्शनी प्रमुख आकर्षण के रूप में उभरी। यह प्रदर्शनी तस्वीरों के माध्यम से वर्ष 2016 से लेकर वर्ष 2026 तक के एक दशक में आईजीएनसीए की समृद्ध यात्रा की झलक प्रस्तुत करती है। अन्य प्रदर्शिनयों में ‘ब्रीदिंग हाइड्स – द सोल ऑफ आंध्र पपेट्री’ शामिल है, जो आंध्र प्रदेश की पारंपरिक चमड़े की कठपुतली कला पर आधारित एक कथात्मक प्रदर्शनी है, तथा ‘थेवा: लेसर नोन ऑफ राजस्थान’ पर केंद्रित एक प्रदर्शनी भी शामिल है। ये प्रदर्शिनयां आगंतुकों को भारत की दुर्लभ और जीवंत कलात्मक परंपराओं से परिचित कराती हैं।
स्थापना दिवस समारोह भारतीय कला, संस्कृति और परंपराओं का एक भव्य उत्सव प्रस्तुत करता है, जिसमें शास्त्रीय नृत्य, लोक कलाओं, पारंपरिक प्रथाओं और सुव्यवस्थित प्रदर्शिनयों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के विविध आयामों को प्रदर्शित किया जा रहा है। पहले दिन, 19 मार्च को शाम 7:00 बजे, प्रसिद्ध नृत्य गुरु, सांस्कृतिक विद्वान और राज्यसभा की पूर्व सदस्य, पद्म विभूषण डॉ. सोनल मानसिंह ने अपनी प्रस्तुति ‘नाट्य कथा – देवी’ से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
दूसरे दिन, 20 मार्च को शाम 7:00 बजे, प्रख्यात सांस्कृतिक विचारक, भरतनाट्यम की अग्रणी कलाकार और पद्म विभूषण डॉ. पद्मा सुब्रह्मण्यम भगवद्-गीता पर आधारित एक विशेष नृत्य-नाट्य प्रस्तुति करेंगी, जिसमें वे अपनी अभिव्यक्ति और भाव-भंगिमाओं के माध्यम से इसके दार्शनिक संदेशों को जीवंत रूप प्रदान करेंगी।
तीसरा दिन, यानि 21 मार्च, भारत की विविध लोक परंपराओं और मार्शल आर्ट्स को समर्पित होगा। कार्यक्रम की शुरुआत शाम 4:00 बजे असम के बागुरुम्बा नृत्य से होगी, इसके बाद हिमाचल प्रदेश का ‘नाटी’ नृत्य, गुजरात का तलवार रास, केरल की प्राचीन मार्शल आर्ट कलारीपयट्टु, मध्य प्रदेश की कबीर गायन परंपरा प्रस्तुत की जाएगी, और कार्यक्रम का समापन आकर्षक सूफी एवं कबीर संगीत प्रस्तुतियों के साथ होगा।
यह स्थापना दिवस समारोह भारत की सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के प्रति आईजीएनसीए की सतत प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब है। यह विभिन्न कला रूपों के बीच संवाद के लिए एक मंच भी प्रदान करता है, जो परंपरा और समकालीन अभिव्यक्ति के संगम को सामने लाता है।
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पीके/केसी/पीकेपी
(रिलीज़ आईडी: 2242784)
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