औषधि विभाग
सस्ती जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता
प्रविष्टि तिथि:
20 MAR 2026 2:51PM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के अंतर्गत, देश भर में 28 फरवरी 2026 तक कुल 18,646 जनऔषधि केंद्र खोले गए हैं। इनमें से 727 केंद्र महाराष्ट्र में और 634 केंद्र मध्य प्रदेश में खोले गए हैं।
प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि योजना के अंतर्गत उत्पाद सूची में 2,110 दवाएं और 315 शल्य चिकित्सा सामग्री, चिकित्सा उपभोग्य वस्तुएं और उपकरण शामिल हैं, जो हृदय रोग, कैंसर रोधी, मधुमेह रोधी, संक्रमण रोधी, एलर्जी रोधी और पाचन संबंधी दवाएं और पोषक तत्व जैसे सभी प्रमुख चिकित्सीय समूहों को कवर करते हैं। प्रयोगशाला अभिकर्मकों और टीकों को छोड़कर, राष्ट्रीय आवश्यक औषधियों की सूची में शामिल लगभग सभी जेनेरिक दवाएं इस उत्पाद सूची का हिस्सा हैं।
पिछले 5 वर्षों में दवाओं की संख्या 1654 से बढ़कर 2425 हो गई है। इस दौरान वित्त वर्षवार दवाओं की संख्या वृद्धि का विवरण इस प्रकार है:-
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क्रम संख्या
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वित्तीय वर्ष
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दवाओं की संख्या
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कुल
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1.
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2020-21
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1450
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1654
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2.
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2021-22
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1616
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1866
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3.
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2022-23
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1759
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2039
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4.
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2023-24
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2047
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2347
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5.
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2024-25
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2110
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2425
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इस योजना के तहत, जनऔषधि उत्पादों की मासिक खरीद पर 10 प्रतिशत की दर से जनऔषधि उत्पादों के मालिकों को प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यह प्रोत्साहन उन उत्पादों पर है जो भारतीय औषधि एवं चिकित्सा उपकरण ब्यूरो (पीएमबीआई) से खरीदी जाती हैं। इसकी अधिकतम सीमा 10,000 रुपए प्रति माह है। इसके अतिरिक्त, जनऔषधि उत्पादों के 200 उच्च मांग वाले उत्पादों का आवश्यक स्टॉक बनाए रखने पर भी जनऔषधि मालिकों को 10,000 प्रति माह तक का प्रोत्साहन दिया जाता है।
आपूर्ति में किसी भी प्रकार की कमी को दूर करने और जनऔषधि केंद्र में सुचारू आपूर्ति और उत्पाद उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, निम्नलिखित उपाय लागू किए गए हैं:
- देश भर में वर्तमान में पांच गोदामों और 41 वितरकों से युक्त एक संपूर्ण सूचना प्रौद्योगिकी-सक्षम आपूर्ति श्रृंखला प्रणाली स्थापित है।
- सितंबर 2024 से, जन औषधि केंद्रों (जेएके) द्वारा आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली 200 दवाओं का स्टॉक रखने पर प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिसमें सबसे अधिक बिकने वाली 100 दवाएं और बाजार में तेजी से बिकने वाली 100 दवाएं शामिल हैं। जन औषधि केंद्रों के मालिक इन दवाओं के उनके द्वारा रखे गए स्टॉक के आधार पर मासिक प्रोत्साहन के पात्र होंगे।
- इसके अतिरिक्त, आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, योजना को लागू करने वाली संस्था (फार्मास्युटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया-पीएमबीआई) द्वारा 400 तेजी से बिकने वाले उत्पादों की नियमित निगरानी की जाती है और इनकी मांग का निरंतर पूर्वानुमान लगाया जाता है। खरीद प्रक्रिया को स्वचालित बनाने के लिए पूर्वानुमान पद्धति को डिजिटाइज़ करने के कदम भी उठाए गए हैं।
जनऔषधि उत्पादों के उपयोग के कारण दवाओं पर होने वाले खर्च में कमी आने के कारण कुल 40,000 करोड़ रुपए की बचत हुई है।
देश भर में, विशेष रूप से कम सुविधाओं वाले और आदिवासी जिलों में, सस्ती दवाओं की व्यापक उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, सरकार ने मार्च 2027 के अंत तक देश भर में खोले गए जन औषधि केंद्रों की कुल संख्या को बढ़ाकर 25,000 करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
सरकार ने व्यक्तिगत उद्यमियों, गैर-सरकारी संगठनों, समितियों, ट्रस्टों, फर्मों, निजी कंपनियों आदि से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित करके जन औषधि केंद्रों खोलने के लिए फ्रेंचाइजी जैसी प्रणाली अपनाई है। यह प्रक्रिया निजी स्थानों के साथ-साथ सरकारी परिसरों में भी समान रूप से जन औषधि केंद्र खोलने की सुविधा प्रदान करती है।
राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के सरकारों और जिला प्रशासनों से समय-समय पर अनुरोध किया जाता है कि वे इस योजना के बारे में जागरूकता पैदा करें और सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में जन औषधि केंद्र खोलने के लिए किराया-मुक्त स्थान उपलब्ध कराएं।
केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
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पीके/केसी/बीयू/पीके
(रिलीज़ आईडी: 2242944)
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