औषधि विभाग
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जीवन रक्षक दवाओं की कीमत

प्रविष्टि तिथि: 20 MAR 2026 2:50PM by PIB Delhi

वर्तमान में, औषधियों की कीमतें राष्ट्रीय औषधि मूल्य नीति, 2012 पर आधारित औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश 2013 (डीपीसीओ, 2013) के प्रावधानों के अनुसार विनियमित होती हैं। डीपीसीओ, 2013 के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, राष्ट्रीय औषधि मूल्य प्राधिकरण (एनपीपीए) डीपीसीओ, 2013 की अनुसूची-I में शामिल औषधियों की अधिकतम मूल्य सीमा निर्धारित करता है, जो आवश्यक औषधियों की राष्ट्रीय सूची और डीपीसीओ, 2013 के पैरा 2(1)(यू) में परिभाषित नई औषधियों के खुदरा मूल्य पर आधारित है। इसके अलावा, गैर-अनुसूचित औषधियों के मामले में, निर्माताओं को पिछले 12 महीनों के दौरान ऐसी औषधियों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि नहीं करनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, एनपीपीए असाधारण परिस्थितियों में और जनहित में डीपीसीओ, 2013 के पैरा 19 के तहत औषधियों की कीमतें भी निर्धारित करता है। अधिक शुल्क वसूलने के मामलों से डीपीसीओ, 2013 के प्रावधानों के अनुसार निपटा जाता है। एनपीपीए द्वारा निर्धारित या संशोधित कीमतों का विवरण एनपीपीए की वेबसाइट (www.nppa.gov.in) पर उपलब्ध है।

उक्त दवाओं के लिए न्यूनतम बफर स्टॉक सुनिश्चित करने हेतु कोई मानदंड निर्धारित नहीं किया गया है। एनपीपीए देश में दवाओं की उपलब्धता पर नज़र रखता है और जब भी किसी दवा की अनुपलब्धता का मुद्दा राज्य औषधि नियंत्रक (एसडीसी), फार्मा जन समाधान पोर्टल, एनपीपीए हेल्पलाइन, जन शिकायत पोर्टल और व्यक्ति जैसे विभिन्न स्रोतों के माध्यम से उसके संज्ञान में आता है, तो वह सुधारात्मक उपाय करता है। इसके अतिरिक्त, सरकार ने आम आदमी को किफायती दरों पर आवश्यक दवाओं की उपलब्धता में सुधार के लिए अन्य उपाय भी किए हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  1. सरकार ने प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना शुरू की है जिसके तहत 17,000 से अधिक जनऔषधि केंद्रों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में आमतौर पर 50 प्रतिशत से 80 प्रतिशत तक सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जाती हैं।
  2. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के तहत, द्वितीयक या तृतीयक स्तर की देखभाल के लिए अस्पताल में भर्ती होने पर प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य आश्वासन/बीमा कवर प्रदान किया जाता है, जिसमें दवाओं का खर्च भी शामिल है।
  3. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निःशुल्क औषधि सेवा पहल के तहत, भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों (आईपीएचएस) के तहत अनुशंसित जरूरी दवाओं की सूची देश भर में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) से लेकर जिला अस्पतालों तक की सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं पर बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराई जाती है।
  4. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अमृत (उपचार के लिए किफायती दवाएं और विश्वसनीय प्रत्यारोपण) पहल के तहत, कई अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में स्थापित अमृत फार्मेसी स्टोरों के माध्यम से कैंसर, हृदय रोग और अन्य बीमारियों के उपचार के लिए किफायती दवाएं, प्रत्यारोपण, सर्जिकल डिस्पोजेबल और अन्य उपभोग्य वस्तुएं आदि बाजार दरों पर औसतन 50 प्रतिशत तक की छूट पर उपलब्ध कराई जाती हैं।
  5. राष्ट्रीय आरोग्य निधि योजना और स्वास्थ्य मंत्री के विवेकाधीन अनुदान के तहत गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों के मरीजों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जो कैंसर सहित कई गंभीर जानलेवा बीमारियों से पीड़ित हैं।

डीपीसीओ, 2013 की समीक्षा एक सतत प्रक्रिया है जो विभाग द्वारा समय-समय पर या आवश्यकतानुसार की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि डीपीसीओ, 2013 के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए और आवश्यक दवाएं जनता को किफायती मूल्य पर सुलभ और उपलब्ध कराई जा सकें।

रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज यह जानकारी लोकसभा में लिखित जवाब में दी।

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पीके/केसी/एके/एसएस


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