औषधि विभाग
जेनेरिक दवाओं में विविधताएं
प्रविष्टि तिथि:
20 MAR 2026 3:00PM by PIB Delhi
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 और उसके तहत बनाए गए नियमों में ‘जेनेरिक दवाओं’ की कोई परिभाषा नहीं है और केन्द्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) को कुछ जेनेरिक दवाओं की गुणवत्ता, चिकित्सीय प्रभावशीलता एवं असर शुरू होने के समय में भिन्नता के संबंध में ऐसी कोई रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।
देश में दवाओं का निर्माण, बिक्री और वितरण मुख्य रूप से औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम एवं नियम, 1945 के प्रावधानों के तहत विनियमित होता है। यह विनियमन संबंधित राज्य सरकारों द्वारा नियुक्त राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों द्वारा लाइसेंस और निरीक्षण प्रणाली के जरिए किया जाता है। लाइसेंस धारक को औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन नियम, 1945 के तहत निर्धारित लाइसेंस की सभी शर्तों का पालन करना आवश्यक है। लाइसेंस की एक शर्त के अनुसार, लाइसेंस धारक को अपने उत्पाद के निर्माण में उपयोग किए गए कच्चे माल के प्रत्येक बैच या लॉट और साथ ही अंतिम उत्पाद के प्रत्येक बैच का परीक्षण करना आवश्यक है और ऐसे परीक्षणों से संबंधित विवरण दर्शाने वाले अभिलेख या रजिस्टर रखना आवश्यक है।
इसके अलावा, देश में निर्मित दवाओं को, चाहे वे जेनेरिक दवाएं हों या ब्रांडेड दवाएं या घरेलू या अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए हों, गुणवत्ता के लिए औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 और उसके तहत बनाए गए नियमों में निर्धारित मानकों का पालन करना आवश्यक है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सूचित किया है कि विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) के विशेषज्ञों के परामर्श से सीडीएससीओ गुणवत्ता, सुरक्षा एवं प्रभावकारिता के व्यापक मूल्यांकन के आधार पर नई औषधि एवं नैदानिक परीक्षण (एनडीसीटी) नियम, 2019 के प्रावधानों के अनुसार नई दवाओं को मंजूरी देता है।
इसके अलावा, दवाओं की प्रभावकारिता सुनिश्चित करने हेतु, औषधि नियम 1945 को जी.एस.आर. 327(ई) दिनांक 3 अप्रैल, 2017 द्वारा संशोधित किया गया, जिसमें जैव-औषधीय वर्गीकरण प्रणाली की श्रेणी II और श्रेणी IV के अंतर्गत आने वाली दवाओं के मौखिक खुराक रूप के निर्माण के लिए लाइसेंस प्रदान करने हेतु संबंधित राज्य/केन्द्र-शासित प्रदेश के औषधि प्राधिकरणों के लिए जैव-समतुल्यता अध्ययन परिणामों की अनिवार्यता निर्धारित की गई थी।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सूचित किया है कि इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सूचित किया है कि सीडीएससीओ और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने देश भर में गुणवत्तापूर्ण दवाओं के उत्पादन को सुनिश्चित करने हेतु निम्नलिखित नियामक उपाय किए हैं: -
(i) देश में दवा निर्माण प्रतिष्ठानों के नियामक अनुपालन का आकलन करने हेतु, सीडीएससीओ ने राज्य औषधि नियंत्रकों (एसडीसी) के साथ मिलकर दिसंबर 2022 से अब तक 960 से अधिक प्रतिष्ठानों का जोखिम-आधारित निरीक्षण किया है। निरीक्षण के निष्कर्षों के आधार पर, राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी करने, उत्पादन रोकने का आदेश देने, लाइसेंस/उत्पाद लाइसेंस निलंबित व रद्द करने और चेतावनी पत्र जारी करने जैसे 860 से अधिक कार्रवाइयां की गई हैं।
(ii) राज्य प्राधिकरणों के समन्वय से 1100 से अधिक कफ सिरप निर्माताओं और 380 रक्त केन्द्रों की गहन जांच की गई है। केन्द्रीय और राज्य औषधि नियामकों द्वारा सिरप फॉर्मूलेशन के बाजार निगरानी नमूने भी बढ़ाए गए हैं।
(iii) सभी राज्यों/केन्द्र-शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य विभागों और स्वास्थ्य केन्द्रों को 03.10.2025 को बाल चिकित्सा कफ सिरप के तर्कसंगत उपयोग को सुनिश्चित करने हेतु एक परामर्श जारी किया गया है। इसके अलावा, ड्रग्स कंट्रोलर (भारत) ने 07.10.2025 को सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के ड्रग कंट्रोलरों को औषधि नियम, 1945 के तहत परीक्षण संबंधी अनिवार्यताओं का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया और 27.10.2025 को उन्हें नकली और घटिया दवाओं के खिलाफ कड़ी निगरानी रखने और औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 के तहत त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
(iv). कच्चे माल के परीक्षण की मौजूदा आवश्यकताओं के अलावा, भारतीय फार्माकोपिया आयोग, गाजियाबाद ने भारतीय फार्माकोपिया (आईपी) 2022 में संशोधन जारी किया है, जिसमें बाजार में जारी करने से पहले तैयार उत्पाद चरण में मौखिक तरल पदार्थों में डीईजी और एथिलीन ग्लाइकॉल (ईजी) के परीक्षण को भी अनिवार्य किया गया है।
(v). विभिन्न कंपनियों की उन दवाओं की सूची, जिन्हें केन्द्रीय औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं द्वारा गैर-मानक गुणवत्ता/नकली/गलत ब्रांडेड/मिलावटी घोषित किया गया है, सीडीएससीओ की वेबसाइट (www.cdsco.gov.in) पर ड्रग अलर्ट शीर्षक के तहत अपलोड की गई है और उपलब्ध है। साथ ही, शुरू की गई कार्रवाइयों का विवरण भी दिया गया है।
(vi). औषधि नियम, 1945 में वर्ष 2023 में संशोधन किया गया है, जिसके अनुसार अनुसूची एच2 में सूचीबद्ध शीर्ष 300 औषधि ब्रांडों के निर्माताओं के लिए प्राथमिक पैकेजिंग लेबल पर, या अपर्याप्त स्थान होने पर द्वितीयक लेबल पर, प्रमाणीकरण के लिए सॉफ्टवेयर अनुप्रयोगों के माध्यम से पठनीय डेटा संग्रहित करने हेतु एक बार कोड या क्यूआर कोड मुद्रित करना या चिपकाना अनिवार्य है। इसी प्रकार, नियमों में यह भी संशोधन किया गया है कि प्रत्येक सक्रिय औषधि संघटक (थोक औषधि), चाहे वह निर्मित हो या आयातित, के पैकेजिंग के प्रत्येक स्तर पर सॉफ्टवेयर अनुप्रयोगों के माध्यम से पठनीय डेटा युक्त एक क्यूआर कोड होना अनिवार्य है, जिससे निगरानी और पता लगाने में सुविधा हो।
(vii). केन्द्र सरकार ने औषधि नियम 1945 में जी.एस.आर. 922 (ई) दिनांक 28.12.2023 के माध्यम से संशोधन किया है, जिसमें औषधि उत्पादों के लिए मैन्यूफैक्चरिंग से जुड़ी अच्छी कार्यप्रणालियों और परिसर, संयंत्र एवं उपकरण की आवश्यकताओं से संबंधित अनुसूची ‘एम’ को संशोधित किया गया है। संशोधित अनुसूची ‘एम’ 29.06.2024 से 250 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार वाले औषधि निर्माताओं के लिए और 01.01.2026 से 250 करोड़ रुपये से कम के कारोबार वाले निर्माताओं के लिए प्रभावी हो गई है।
viii). फरवरी 2024 में, सीडीएससीओ ने केन्द्रीय और राज्य औषधि निरीक्षकों द्वारा दवाओं, सौंदर्य प्रसाधनों एवं चिकित्सा उपकरणों के नमूने लेने के लिए नियामक दिशानिर्देश प्रकाशित किए। ये दिशानिर्देश एक समान औषधि नमूना पद्धति के जरिए बाजार में उपलब्ध उत्पादों की गुणवत्ता और प्रभावकारिता सुनिश्चित करने हेतु एक व्यवस्थित दृष्टिकोण प्रदान करते हैं।
(ix). सीडीएससीओ की दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं को एकीकृत करने हेतु सितंबर 2023 से एक ऑनलाइन पोर्टल, सुगम लैब्स, कार्यरत है। यह गुणवत्ता विनिर्देशों को पूरा करने और प्रयोगशालाओं में परीक्षण की स्थिति का पता लगाने के उद्देश्य से चिकित्सा उत्पादों (दवाएं, टीके, सौंदर्य प्रसाधन और चिकित्सा उपकरण) के परीक्षण के लिए संपूर्ण कार्यप्रवाह को स्वचालित करता है।
(x). केन्द्रीय नियामक राज्य औषधि नियंत्रण संगठनों की गतिविधियों का समन्वय करता है और औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम के प्रशासन में एकरूपता के लिए राज्य औषधि नियंत्रकों के साथ आयोजित औषधि परामर्श समिति (डीसीसी) की बैठकों के जरिए विशेषज्ञ सलाह प्रदान करता है।
यह जानकारी रसायन एवं उर्वरक राज्यमंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/आर
(रिलीज़ आईडी: 2243031)
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