जनजातीय कार्य मंत्रालय
आईटीडीसी-एमओटीए कार्यशाला में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसटीएफडीसी) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक ने जनजातीय होमस्टे मालिकों के लिए वित्तीय सशक्तिकरण योजनाओं पर प्रकाश डाला
एनएसटीएफडीसी ने जनजातीय पर्यटन उद्यमियों के लिए रियायती वित्तपोषण और महिला-केंद्रित योजनाएं प्रदर्शित की
श्री टी. रूमुआन पाइते ने जनजातीय होमस्टे मालिकों से टिकाऊ आजीविका के लिए एनएसटीएफडीसी योजनाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया
प्रविष्टि तिथि:
20 MAR 2026 4:08PM by PIB Delhi
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसटीएफडीसी) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (सीएमडी) श्री टी. रूमुआन पाइते (आईआरएस) ने नई दिल्ली के होटल सम्राट में आयोजित क्षमता निर्माण कार्यशाला में गुजरात, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के आदिवासी होमस्टे मालिकों और प्रबंधकों को संबोधित किया। इस कार्यशाला का आयोजन भारतीय पर्यटन विकास निगम (आईटीडीसी) और जनजातीय कार्य मंत्रालय (एमओटीए) ने संयुक्त रूप से किया था।

सत्र के दौरान, श्री पाइते ने जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन एक शीर्ष वित्तीय संस्था के रूप में एनएसटीएफडीसी के दायित्व पर प्रकाश डाला, जिसकी स्थापना रियायती वित्तीय सहायता के माध्यम से अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक उत्थान को बढ़ावा देने के लिए की गई है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जनजातीय होमस्टे उद्यम सांस्कृतिक रूप से जुड़े और टिकाऊ आजीविका मॉडल का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं सरकारी योजनाओं और जमीनी स्तर के लाभार्थियों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करती हैं।
श्री पाइते ने आदिवासी उद्यमियों को समर्थन देने के लिए बनाई गई एनएसटीएफडीसी की प्रमुख वित्तीय योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया:
- सावधि ऋण योजना: इसके तहत राज्य चैनलिंग एजेंसियों, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के माध्यम से प्रति यूनिट 50 लाख रुपये तक की रियायती वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। यह योजना आदिवासी होमस्टे मालिकों को बुनियादी ढांचे के विकास, नवीनीकरण और विस्तार में निवेश करने में सक्षम बनाती है।
- आदिवासी महिला सशक्तिकरण योजना (एएमएसवाई): अनुसूचित जनजाति की महिला उद्यमियों के लिए यह एक समर्पित योजना है जिसमें 4 प्रतिशत प्रति वर्ष की रियायती ब्याज दरों पर ऋण प्रदान की जाती है। इसमें परियोजना लागत के 90 प्रतिशत तक का वित्तपोषण बिना अनिवार्य प्रमोटर योगदान के किया जाता है।
- स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के लिए सूक्ष्म ऋण योजना: इस योजना में जनजातीय स्वयं सहायता समूहों को आतिथ्य सेवाएं, सामुदायिक रसोई, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पारंपरिक शिल्प जैसी सामूहिक आय सृजन गतिविधियां चलाने के लिए सहजता से ऋण प्रदान की जाती है।
श्री पाइते ने प्रतिभागियों को अपने होमस्टे उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए संबंधित राज्य चैनलिंग एजेंसियों और जनजातीय विकास निगमों के माध्यम से इन योजनाओं का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित किया।
एनएसटीएफडीसी के बढ़ते दायरे पर प्रकाश डालते हुए, श्री पाइते ने कहा कि एनएसटीएफडीसी राज्य एजेंसियों के साथ साझेदारी और सामान्य ऋण समझौतों के माध्यम से राज्यों में अपनी उपस्थिति को मजबूत करना जारी रखे हुए है। उन्होंने होमस्टे मालिकों से वित्तीय सहायता प्राप्त करने और टिकाऊ उद्यम स्थापित करने के लिए संस्थागत तंत्रों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने का आग्रह किया।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एनएसटीएफडीसी की पहल का उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र में आदिवासी उद्यमियों के बीच आर्थिक आत्मनिर्भरता, साख और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देना है।
“हर आदिवासी होमस्टे भारत की स्वदेशी संस्कृति की झलक दिखाता है। एनएसटीएफडीसी की योजनाएं यह सुनिश्चित करने के लिए हैं कि इस विरासत को संरक्षित करने वाले परिवार भी इससे लाभान्वित हों। हम आदिवासी उद्यमियों, विशेषकर महिलाओं को, इन अवसरों का लाभ उठाने और सशक्त उद्यम स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”
— श्री टी. रूमुआन पाइते, आईआरएस, सीएमडी, एनएसटीएफडीसी
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पीके/केसी/एके/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2243074)
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