रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय : उर्वरक विभाग
डीबीटी किसानों को समय पर उर्वरकों की उपलब्धता और सब्सिडी वितरण सुनिश्चित करती है
सरकार ने आपूर्ति निगरानी, पर्यावरण सुरक्षा उपायों और उर्वरकों के कुशल वितरण को सुदृढ़ किया
प्रविष्टि तिथि:
20 MAR 2026 5:08PM by PIB Delhi
सरकार ने देशभर के किसानों को उर्वरकों का कुशल वितरण और समय पर उपलब्धता सुनिश्चित के लिए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू किया है। डीबीटी प्रणाली के तहत, विभिन्न उर्वरक श्रेणियों पर शत-प्रतिशत सब्सिडी सीधे उर्वरक कंपनियों को जारी की जाती है। यह सब्सिडी खुदरा दुकानों पर स्थापित आधार-प्रमाणित प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) उपकरणों के माध्यम से किसानों को की गई वास्तविक बिक्री पर आधारित होती है। इससे किसानों को रियायती दरों पर उर्वरकों की उपलब्धता, पारदर्शिता, तत्क्षण निगरानी और कुशल निधि प्रबंधन सुनिश्चित होता है। फर्स्ट-इन-फर्स्ट-आउट (एफआईएफओ) आधार पर सब्सिडी से जुड़े दावों का समय पर निपटारा किया जाता है।
उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना
सरकार प्रत्येक फसल मौसम के दौरान उर्वरकों की समय पर और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय करती है:
- प्रत्येक फसल के मौसम की शुरुआत से पहले, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (डीए एंड एफडब्ल्यू), सभी राज्य सरकारों के परामर्श से, राज्यवार और माहवार उर्वरकों की आवश्यकता का आकलन करता है।
- कृषि एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा अनुमानित आवश्यकता के आधार पर, उर्वरक विभाग मासिक आपूर्ति योजना जारी करके राज्यों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक आवंटित करता है और उपलब्धता की निरंतर निगरानी करता है।
- देश भर में सभी प्रमुख सब्सिडी वाले उर्वरकों की आवाजाही की निगरानी ऑनलाइन वेब-आधारित एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (आईएफएमएस) द्वारा की जाती है।
- राज्य सरकारों को नियमित रूप से सलाह दी जाती है कि वे समय पर ऑर्डर जारी करके आपूर्ति को सुव्यवस्थित करने के लिए निर्माताओं और आयातकों के साथ समन्वय करें।
- राज्य के भीतर जिला स्तर पर उर्वरकों का वितरण संबंधित राज्य सरकार द्वारा किया जाता है।
रसायनों का विनियमन और पर्यावरण सुरक्षा उपाय
सरकार एक सुदृढ़ नियामक ढांचे और तत्क्षण निगरानी के माध्यम से उर्वरक उत्पादन के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 प्राथमिक कानून के रूप में कार्य करता है जो केंद्र सरकार को खतरनाक रसायनों को विनियमित करने का अधिकार देता है। यह अधिनियम खतरनाक रसायनों के निर्माण, भंडारण और आयात नियम, 1989 द्वारा समर्थित है, जो सुरक्षित संचालन प्रथाओं, अनिवार्य सुरक्षा लेखापरीक्षाओं और आपातकालीन योजनाओं के माध्यम से जोखिमों को कम करने पर केंद्रित है।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 29 दिसंबर, 2017 के जीएसआर 1607(ई) के माध्यम से उर्वरक उद्योगों के लिए अपशिष्ट और उत्सर्जन मानक निर्धारित किए हैं। सभी इकाइयों को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों/समितियों से संचालन की अनुमति प्राप्त करनी होगी और पर्याप्त अपशिष्ट उपचार एवं वायु प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली बनाए रखनी होगी। सीपीसीबी और राज्य बोर्ड इन मानकों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं। सीपीसीबी कनेक्टिविटी के साथ ऑनलाइन सतत अपशिष्ट/उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (ओसीईएमएस) को भी अनिवार्य किया है। सीपीसीबी अलर्ट या सिस्टम डाउनटाइम के आधार पर निरीक्षण करता है और नियमों के अनुसार गैर-अनुपालन उद्योगों पर कार्रवाई करता है।
सब्सिडी वितरण तंत्र
डीबीटी' प्रणाली के तहत, विभिन्न उर्वरक श्रेणियों पर शत-प्रतिशत सब्सिडी उर्वरक निर्माता/आयातकर्ता कंपनियों तथा लाभार्थियों को वास्तविक बिक्री के आधार पर जारी की जाती है। यह सब्सिडी प्रत्येक खुदरा दुकान पर स्थापित पीओएस उपकरणों के माध्यम से आधार प्रमाणीकरण द्वारा प्राप्त की जाती है। धनराशि का आवंटन या वितरण जिलावार या निर्वाचन क्षेत्रवार नहीं किया जाता है।
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने यह जानकारी लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/जेके/ओपी
(रिलीज़ आईडी: 2243093)
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