राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का 2 सप्ताह का ऑनलाइन अल्पकालिक इंटर्नशिप (ओएसटीआई) कार्यक्रम, मार्च 2026 आज समाप्त हो रहा है
इस कार्यक्रम के लिए विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमि और अलग-अलग राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 71 विश्वविद्यालय-स्तरीय छात्रों को 1,147 आवेदकों में से चुना गया
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने अपने समापन भाषण में कहा कि ज्ञान और विद्या व्यर्थ है यदि वह दूसरों के दुख के प्रति सहानुभूति नहीं दर्शाते
महासचिव श्री भरत लाल ने कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा और संवर्धन एक पवित्र और साझा जिम्मेदारी है, न कि कर्तव्य
प्रविष्टि तिथि:
20 MAR 2026 5:23PM by PIB Delhi
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) द्वारा वर्ष 2026 में आयोजित दूसरा दो सप्ताह का ऑनलाइन अल्पकालिक इंटर्नशिप कार्यक्रम (ओएसटीआई) आज सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमि से आए विश्वविद्यालय-स्तर के 71 छात्रों ने इसे सफलतापूर्वक पूरा किया। दूरस्थ क्षेत्रों सहित 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1,147 आवेदकों में से इनका चयन किया गया था। चयनित छात्रों में 54 लड़कियां और 17 लड़के थे।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने अपने समापन भाषण में कहा कि इंटर्नशिप कार्यक्रम का उद्देश्य मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाना और वंचितों के प्रति सहानुभूति विकसित करना है। 20 जुलाई, 1969 को चंद्रमा पर कदम रखने के अवसर पर नील आर्मस्ट्रांग द्वारा कहे गए कथन, "यह मनुष्य के लिए एक छोटा कदम है, परन्तु मानवता के लिए एक बड़ी छलांग है," का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यदि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग इंटर्नशिप पूरा करने से प्रशिक्षुओं को भी ऐसा ही अनुभव होता है, तो इसका उद्देश्य पूरा हो जाता है।

मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (यूएचडीआर) का संदर्भ देते हुए, जिसमें कहा गया है कि 'सभी मनुष्य समान और स्वतंत्र पैदा होते हैं,' न्यायमूर्ति रामासुब्रमणियन ने कहा कि यह वास्तविकता से कहीं अधिक दार्शनिक है, क्योंकि सभी मनुष्य एक समान सुरक्षित वातावरण में पैदा नहीं होते। जब प्रशिक्षु इस बात को समझ लेंगे, तो वे मानव मात्र के प्रति अधिक सहानुभूति रखने लगेंगे। लोगों के प्रति सहानुभूति रखना आदर्श नागरिक बनने की कुंजी है। उन्होंने तमिल कवि-ऋषि तिरुवल्लुवर की रचना तिरुक्कुरल से भी उद्धरण दिया: 'किसी व्यक्ति के विद्वान कहलाने का क्या अर्थ, जब तक वह दूसरों को देखकर आंसू न बहाए।' उन्होंने कहा कि सच्चा ज्ञान और विद्या व्यर्थ है यदि वह दूसरों के दुख के प्रति सहानुभूति नहीं दर्शाते।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के महासचिव श्री भरत लाल ने अपने आरंभिक भाषण में आयोग के साथ इंटर्नशिप पूरी करने वाले प्रशिक्षुओं को बधाई दी। उन्होंने उनसे आग्रह किया कि वे अपने द्वारा सीखी गई बातों को आत्मसात करें ताकि उनमें संवेदनशीलता और जवाबदेही विकसित हो सके और वे अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक आदर्श नागरिक बन सकें। उन्होंने आत्मनिरीक्षण और अपने कार्यों पर चिंतन पर जोर देते हुए कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा और संवर्धन की जिम्मेदारी केवल सरकार की ही नहीं बल्कि व्यक्तियों की भी है। मानवाधिकारों की रक्षा करना - प्रत्येक व्यक्ति के अधिकारों और गरिमा को बनाए रखना - प्रत्येक व्यक्ति का पवित्र और साझा दायित्व है।

श्री लाल ने कहा कि कमजोर लोग अक्सर अपनी परिस्थितियों के शिकार होते हैं। उन्होंने कहा कि भीख मांगने वाले और दिव्यांगजनों जैसे लोगों को अपने हक पाने और गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए सहायता की आवश्यकता हो सकती है। उनकी मदद का एक छोटा सा प्रयास भी हमें एक अच्छा इंसान बनाने में बहुत मददगार साबित हो सकता है। यह सब अपने जीवन को सार्थक बनाने के बारे में है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि प्रशिक्षु ऐसे लोगों के जीवन को बेहतर बनाने और उन्हें गरिमा प्रदान करने के लिए समय निकालेंगे। ऐसे छोटे प्रयास समाज में सार्थक योगदान दे सकते हैं। उन्होंने प्रशिक्षुओं को आयोग की वेबसाइट, न्यूज़लेटर और सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से उससे जुड़े रहने और मानवाधिकारों की रक्षा और संवर्धन के तरीकों पर आत्मनिरीक्षण और चिंतन करते रहने के साथ-साथ सीखते रहने के लिए भी प्रोत्साहित किया।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की संयुक्त सचिव श्रीमती सैदिंगपुई छकछुक ने इंटर्नशिप रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि छात्रों को आयोग के अध्यक्ष, सदस्यों, महासचिव, वरिष्ठ अधिकारियों, भारत सरकार के अधिकारियों, मानवाधिकार रक्षकों और नागरिक समाज के सदस्यों सहित प्रख्यात वक्ताओं के साथ संवादात्मक सत्रों के माध्यम से मानवाधिकारों के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया गया। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं, जिनमें पुस्तक समीक्षा, समूह शोध परियोजना प्रस्तुति और भाषण प्रतियोगिताएं शामिल थीं, के विजेताओं की घोषणा भी की। यह ऑनलाइन इंटर्नशिप कार्यक्रम उन छात्रों तक पहुंचने के लिए शुरू किया गया है जो नई दिल्ली आने में असमर्थ हैं और अपने निवास स्थान से ही मानवाधिकारों के विभिन्न आयामों को सीख सकते हैं। इस अवसर पर संयुक्त सचिव श्री समीर कुमार भी उपस्थित थे।

ऑनलाइन कार्यक्रम यह सुनिश्चित करता है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग दूरदराज, दुर्गम और वन/आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों तक पहुंच सके। वर्ष 2025-26 में, आयोग द्वारा ऐसे 6 ऑनलाइन और 2 प्रत्यक्ष (ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन) इंटर्नशिप कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिससे इन छात्रों को प्रख्यात व्यक्तियों, क्षेत्र विशेषज्ञों, मानवाधिकार रक्षकों, शिक्षाविदों, राजनयिकों, न्यायविदों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संवाद करने का अवसर मिलता है, इस प्रकार मानवाधिकारों पर युवाओं को बढ़ावा और सशक्त बनाया जाता है।
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पीके/केसी/एचएन/जीआरएस
(रिलीज़ आईडी: 2243121)
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