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प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJK) का विस्तार – स्वास्थ्य पर खर्च कम करने के लिए

प्रविष्टि तिथि: 20 MAR 2026 3:04PM by PIB Delhi

सरकार ने प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJK) की शुरुआत सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएँ किफायती दरों पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की थी। इस योजना के अंतर्गत पूरे देश में जन औषधि केंद्र (JAKs) खोले गए हैं, जो ब्रांडेड दवाओं की तुलना में लगभग 50%–80% कम कीमत पर दवाएँ उपलब्ध कराते हैं। 28 फरवरी 2026 तक पूरे देश में कुल 18,646 जन औषधि केंद्र खोले जा चुके हैं।सरकार ने योजना की पहुँच बढ़ाने के लिए यह लक्ष्य निर्धारित किया है कि मार्च 2027 तक पूरे देश में 25,000 जन औषधि केंद्र खोले जाएँ।

योजना के अंतर्गत, जन औषधि उत्पादों की मासिक खरीद पर JAK मालिकों को 10% प्रोत्साहन दिया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹10,000 प्रति माह है। इसके अलावा, JAK मालिकों को 200 उच्च मांग वाले उत्पादों का आवश्यक स्टॉक बनाए रखने पर भी ₹10,000 तक का प्रोत्साहन प्रदान किया जाता है। अतिरिक्त रूप से, उत्तर-पूर्वी राज्य, हिमालयी क्षेत्र, द्वीपीय क्षेत्र और NITI आयोग द्वारा अधिसूचित आकांक्षी जिलों में खोले गए JAKs के लिए एक बार विशेष प्रोत्साहन ₹2 लाख दिया जाता है। यह प्रोत्साहन पूर्व सैनिक, महिलाएँ, दिव्यांगजन तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों द्वारा खोले गए JAKs पर भी लागू होता है।

JAKs में उपलब्ध दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और रोगियों के स्वास्थ्य को जोखिम से बचाने के लिए, सतत निरीक्षण, परीक्षण और मानकीकरण सुनिश्चित करने हेतु ठोस तंत्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं

i ) केवल WHO-GMP प्रमाणित प्लांट से आपूर्ति: केवल वही प्लांट आपूर्ति के लिए पात्र हैं, जिन्हें सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) द्वारा सीधे निरीक्षण के बाद WHO-GMP अनुपालन प्रमाणित किया गया हो।

ii)  सभी दवा बैचों के 100% पूर्व-परीक्षण के बाद ही वितरण: PMBI के गोदामों में आपूर्ति किए गए सभी बैचों से 100% नमूने लिया जाता है और गुमनाम परीक्षण के बाद ही दवाएँ JAKs तक भेजी जाती हैं।

iii)  केवल GLP अनुपालन वाली लैब में परीक्षण: सभी नमूनों का परीक्षण केवल NABL से मान्यता प्राप्त और समय-समय पर निरीक्षित लैब में किया जाता है। इसके अलावा, PMBI द्वारा GLP अनुपालन की पुष्टि भी की जाती है।

पिछले 11 वर्षों में, जन औषधि उत्पादों के उपयोग के कारण दवाओं पर “Out-of-Pocket Expenditure” में कुल ₹40,000 करोड़ की बचत हुई है।

यह जानकारी आज लोकसभा में लिखित उत्तर में रसायन एवं उर्वरक राज्यमंत्री, श्रीमती अनुप्रिया पटेल,  ने दिया ।

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पीके/केसी/एके/डीके


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