महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय बहुआयामी नीतियों और कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीककरण को बढ़ावा देने, लैंगिक मुद्दों को मुख्यधारा में शामिल करने तथा जागरूकता सृजित करने की दिशा में कार्य करता है

प्रविष्टि तिथि: 23 MAR 2026 2:23PM by PIB Delhi

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (डब्ल्यूसीडी) का प्राथमिक उद्देश्य महिलाओं को गरिमा के साथ जीवन जीने हेतु सशक्त बनाना तथा उन्हें हिंसा और भेदभाव से मुक्त वातावरण में विकास में एक समान भागीदार के रूप में योगदान करने में सक्षम बनाना; और बच्चों का सुरक्षित एवं संरक्षित वातावरण में समुचित पोषण सुनिश्चित करते हुए उन्हें वृद्धि के एवं विकास के पूर्ण अवसर प्रदान करना है।
मंत्रालय बहु-आयामी नीतियों एवं कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्ती करण को बढ़ावा देने, लैंगिक मुद्दों का मुख्यधारा में समावेशन करने, उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने तथा उन्हें अपने मानवाधिकारों की प्राप्ति और अपनी पूर्ण क्षमता तक विकसित होने में सक्षम बनाने हेतु संस्थागत एवं विधायी समर्थन को सुगम बनाने की दिशा में कार्य करता है। यह मंत्रालय बहु-आयामी नीतियों एवं कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों के विकास, देखभाल एवं संरक्षण को सुनिश्चित करने, उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने तथा उन्हें अपनी पूर्ण क्षमता तक बढ़ने और विकसित होने हेतु शिक्षा, पोषण, संस्थागत एवं विधायी समर्थन तक पहुंच को सुगम बनाने पर केंद्रित है।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) योजना का शुभारंभ 22 जनवरी 2015 को बाल लिंगानुपात (सीएसआर) तथा जीवन-चक्र निरंतरता के दौरान बालिकाओं और महिलाओं के सशक्तीुकरण से संबंधित मुद्दों के समाधान में सहायता हेतु किया गया था। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) योजना विभिन्न हितधारकों, जिनमें सरकारी एजेंसियां, मीडिया, नागरिक समाज तथा आम जन शामिल हैं, को संगठित कर एक नीतिगत पहल से राष्ट्रीय जन आंदोलन में परिवर्तित हो गई है। यह योजना देश के सभी जिलों में कार्यान्वित की जा रही है। पश्चिम बंगाल इस योजना को कार्यान्वित नहीं कर रहा है।
मिशन शक्ति के दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह योजना केंद्र प्रायोजित है तथा केंद्र सरकार राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों को 100% वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इस योजना का समग्र कार्यान्वेयन राज्य सरकारों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के अधीन है।
सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के अंतर्गत मिशन, आंगनवाड़ी सेवाएं योजना, पोषण अभियान तथा किशोरियों के लिए योजना को पुनर्गठित कर 3 प्रमुख उप-क्षेत्रों में विभाजित किया गया है: (i) बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं तथा किशोरियों के लिए पोषण सहायता (ii) प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा और (iii) उन्नत सक्षम आंगनवाड़ियों सहित आंगनवाड़ी अवसंरचना।
इस योजना के अंतर्गत निम्नलिखित छह सेवाएं आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से पात्र लाभार्थियों अर्थात 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं तथा किशोरियों (सभी राज्यों के आकांक्षी जिलों तथा पूर्वोत्तर राज्यों के सभी जिलों में 14-18 वर्ष) को प्रदान की जाती हैं:
i. पूरक पोषण (एसएनपी)
ii.पूर्व-प्राथमिक गैर-औपचारिक शिक्षा,
iii.पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा,
iv. टीकाकरण,
v. स्वाकस्य् श  जांच, और
vi. रेफरल सेवाएं
छह सेवाओं में से तीन सेवाएं, अर्थात टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच तथा रेफरल सेवाएं, स्वास्थ्य से संबंधित हैं और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना के माध्यम से प्रदान की जाती हैं।
मिशन शक्ति का उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा एवं सशक्तीसकरण हेतु हस्तक्षेपों को मज़बूत करना है। मिशन शक्ति का उद्देश्य सभी महिलाओं एवं बालिकाओं, जिसमें दिव्यांग, सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित तथा वे कमज़ोर वर्ग भी शामिल हैं, जिन्हें देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता है, को उनके समग्र विकास एवं सशक्तीओकरण हेतु अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक सेवाएं तथा जानकारी प्रदान करना है। मिशन शक्ति दो घटकों से मिलकर बना है—महिलाओं की सुरक्षा एवं संरक्षा के लिए ‘संबल’ तथा देश के ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों सहित महिलाओं के सशक्ती करण के लिए ‘सामर्थ्य’। ‘संबल’ में वन स्टॉप सेंटर (ओएससी), महिला हेल्पलाइन (डब्ल्यूएचएल), बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) तथा नारी अदालत के घटक शामिल हैं। ‘सामर्थ्य’ में शक्ति सदन, सखी निवास, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई), पालना तथा संकल्प: हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वुमेन (एसएनकेएएलपी: एचईडब्ल्यू) के घटक शामिल हैं।
वन स्टॉप सेंटर (ओएससी) देशभर में निजी एवं सार्वजनिक, दोनों जगहों पर हिंसा से प्रभावित एवं संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही छत के नीचे समेकित एवं त्वरित सहायता तथा समर्थन प्रदान करता है। यह जरूरतमंद महिलाओं, देश के ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों को चिकित्सीय सहायता, विधिक सहायता एवं परामर्श, अस्थायी आश्रय, पुलिस सहायता तथा मनो-सामाजिक परामर्श जैसी सेवाएं प्रदान करता है। वर्तमान में, देश में 926 ओएससी संचालित हैं, जिन्होंने देश में 13.37 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता प्रदान की है।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) योजना का शुभारंभ 22 जनवरी 2015 को बाल लिंगानुपात (सीएसआर) तथा जीवन-चक्र निरंतरता के दौरान बालिकाओं और महिलाओं के सशक्तीुकरण से संबंधित मुद्दों के समाधान में सहायता हेतु किया गया था। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) योजना विभिन्न हितधारकों, जिनमें सरकारी एजेंसियां, मीडिया, नागरिक समाज तथा आम जन शामिल हैं, को संगठित कर एक नीतिगत पहल से राष्ट्रीय जन आंदोलन में परिवर्तित हो गई है। यह योजना देश के सभी जिलों में कार्यान्वित की जा रही है। पश्चिम बंगाल इस योजना को कार्यान्वित नहीं कर रहा है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अंतर्गत संचालित मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 देश में पोषण को सुदृढ़ करने और कुपोषण की चुनौती से निपटने हेतु वर्तमान में चल रही एक योजना है।
कुपोषण की चुनौतियों से निपटने के लिए, आंगनवाड़ी सेवाएं, पोषण अभियान तथा किशोरियों (आकांक्षी जिलों और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में 14–18 वर्ष के आयु वर्ग हेतु) के लिए योजना को मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 (मिशन पोषण 2.0) के अंतर्गत समाहित किया गया है। यह एक केंद्र प्रायोजित मिशन है, जिसमें विभिन्न गतिविधियों के कार्यान्व यन की जिम्मेदारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की होती है। यह मिशन देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जा रहा है।
इस मिशन के तहत, बच्चों (6 महीने से 6 वर्ष), गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की अनुसूची-II में निहित पोषण मानकों के अनुसार पूरक पोषण प्रदान किया जाता है। इन मानकों को जनवरी 2023 में संशोधित किया गया है। पुराने मानक मुख्यतः कैलोरी-विशिष्ट थे; हालांकि, संशोधित मानक पूरक पोषण की मात्रा और गुणवत्ता दोनों के दृष्टिकोण से अधिक समग्र और संतुलित हैं, जो आहार विविधता के सिद्धांतों पर आधारित हैं और गुणवत्ता-युक्तम प्रोटीन, स्वस्थ वसा और सूक्ष्म पोषक तत्वों (कैल्शियम, जिंक, आयरन, डाइटरी फोलेट, विटामिन ए, विटामिन बी6 और विटामिन बी12) की आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं। गंभीर रूप से अत्य-धिक कुपोषित (एसएएम) बच्चों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (एनएफ़एसए) के अनुसार अतिरिक्त पूरक पोषण प्रदान किया जाता है।
मंत्रालय ने 12 सितंबर 2022 को अधिसूचना के माध्यम से एकीकृत पोषण समर्थन कार्यक्रम – सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण (2.0), नियम 2022 जारी किए, जिससे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के तहत प्रत्येक गर्भवती महिला और स्तनपान कराने वाली मां को प्रसव के छह महीने तक तथा छह महीने से छह वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे के लिए निर्धारित लाभों का नियमन किया जा सके।
आहार विविधता और पौष्टिक स्थानीय उत्पादों के उपभोग को प्रोत्साहित करने के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषण वाटिकाओं का विकास किया गया है।
इस मिशन के तहत, एक प्रमुख गतिविधि सामुदायिक जागरूकता तथा एकजुटता बढ़ाने की पहल है, जिसका उद्देश्य लोगों को पोषण संबंधी पहलुओं के प्रति शिक्षित करना है, क्योंकि अच्छे पोषण अभ्यास को अपनाने के लिए व्यवहारिक परिवर्तन हेतु सतत प्रयास आवश्यक होते हैं। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश पोषण माह और पोषण पखवाड़ा, जिन्हें क्रमशः सितंबर और मार्च–अप्रैल में मनाया जाता है, के दौरान जन आंदोलनों के तहत नियमित जागरूकता गतिविधियों का आयोजन और रिपोर्टिंग कर रहे हैं। समुदाय आधारित कार्यक्रमों  ने पोषण अभ्यासों में बदलाव लाने में एक महत्वपूर्ण रणनीति के रूप में कार्य किया है और सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रत्येक माह दो समुदाय आधारित कार्यक्रम आयोजित करने होते हैं।
‘पोषण ट्रैकर’ एप्लिकेशन को एक महत्वपूर्ण गवर्नेंस टूल के रूप में लॉन्च किया गया। पोषण ट्रैकर परिभाषित संकेतकों पर सभी आंगनवाड़ी केंद्रों (ए.डब्ल्यू.सी.), आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (ए.डब्ल्यू.डब्ल्यू.) और लाभार्थियों की निगरानी तथा ट्रैकिंग को सुगम बनाता है। पोषण ट्रैकर के तहत प्रौद्योगिकी का उपयोग बच्चों के विकास में रुकावट (स्टंटिंग), कुपोषण (वेस्टिंग) और कम वजन (अंडरवेट) की पहचान के लिए किया जा रहा है। इसने आंगनवाड़ी सेवाओं के लिए लगभग रिअल टाइम में डेटा संग्रह की सुविधा प्रदान की है, जैसे कि आंगनवाडी केंद्र का खुलना, बच्चों की दैनिक उपस्थिति, प्रारंभिक बचपन में देखभाल तथा शिक्षण (ई.सी.सी.ई.) गतिविधियाँ, बच्चों के विकास की निगरानी, गरम पके भोजन (एच.सी.एम.) / टेक होम राशन (टी.एच.आर. - कच्चा राशन नहीं), विकास मापन आदि हेतु प्रावधान।
यह जानकारी महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर द्वारा लोक सभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी गई।

 

 

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