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संसदीय प्रश्न: जम्मू-कश्मीर में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल

प्रविष्टि तिथि: 23 MAR 2026 3:26PM by PIB Delhi

जम्मू-कश्मीर में बाढ़, भूस्खलन और जंगल की आग जैसी प्रमुख प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी और क्षति के आकलन के लिए अंतरिक्ष से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल किया जा रहा है। बाढ़ के जलमग्न वाले हिस्सों के मानचित्र, भूस्खलन की सूची, जंगल की आग का पता लगाने आदि जैसे भू-स्थानिक उत्पाद इसरो के भू-पोर्टल जैसे भुवन और राष्ट्रीय आपातकालीन प्रबंधन डेटाबेस (एनडीईएम) के माध्यम से प्रसारित किए जाते हैं। इसरो ने जम्मू-कश्मीर वन विभाग के लिए भू-स्थानिक तकनीक का इस्तेमाल कर जंगल की आग की रिपोर्टिंग के लिए एक अनुकूलित मोबाइल एप्लिकेशन और विजुअलाइजेशन डैशबोर्ड भी तैयार किया है।

इसरो/ डीओएस ने जम्मू-कश्मीर रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (जेकेआरएसएसी) के साथ मिलकर केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर प्राकृतिक संसाधन जनगणना, राष्ट्रीय आर्द्रभूमि सूची, जैव विविधता लक्षण वर्णन, मरुस्थलीकरण और भूमि क्षरण मानचित्रण तथा आपदा प्रबंधन सहायता जैसे अंतरिक्ष अनुप्रयोग कार्यक्रमों का कार्यान्वयन किया है। कृषि, वानिकी, ग्रामीण विकास और जलसंभर प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण में सहायता के लिए अंतरिक्ष-आधारित सूचना सहायता – अद्यतन (एसआईएस-डीपी अपडेट) को भी संयुक्त रूप से कार्यान्वित किया गया।

इसरो ने जम्मू के केंद्रीय विश्वविद्यालय में सतीश धवन अंतरिक्ष विज्ञान केंद्र (एसडीसीएसएस) की स्थापना की है, जहां संकाय/ शोधार्थी छात्रों को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी पर सीखने और समझ को बढ़ाने के लिए इसरो की सुविधाओं तक पहुंच प्रदान की जाती है।

इसरो ने जम्मू-कश्मीर सहित देश के उत्तरी क्षेत्र के लिए एनआईटी जालंधर में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी इनक्यूबेशन सेंटर (एसटीआईसी) और एनआईटी कुरुक्षेत्र में क्षेत्रीय अंतरिक्ष शैक्षणिक केंद्र (आरएसीएस) की स्थापना की है। एसटीआईसी और आरएसीएस कार्यक्रम छात्रों को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से संबंधित परियोजनाओं पर काम करने के मौके दिए करते हैं। उत्तरी क्षेत्र के क्षेत्रीय संस्थान और अन्य संस्थान इन कार्यक्रमों के माध्यम से परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकते हैं। यह व्यवस्था मेजबान संस्थानों और क्षेत्र के अन्य कॉलेजों के छात्रों को इसरो की परियोजनाओं में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने और सीधे उन पर काम करने में सक्षम बनाती है।

इसके साथ ही, देश भर के संस्थानों के बीच अंतरिक्ष अनुसंधान के अवसरों को बढ़ाने के लिए, इसरो रिस्पॉन्ड (प्रायोजित अनुसंधान) कार्यक्रम का कार्यान्वयन करता है, जो भारत में किसी भी शैक्षणिक संस्थान को, फिर वह कहीं भी स्थित हो, परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत करने और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से संबंधित परियोजनाओं में भाग लेने की मंजूरी देता है।

इसरो, गृह मंत्रालय के एकीकृत आपातकालीन प्रतिक्रिया नियंत्रण कक्ष (आईसीआर-ईआर) के अंतर्गत राष्ट्रीय आपातकालीन प्रबंधन डेटाबेस (एनडीईएम) के कार्यान्वयन के माध्यम से आपदा पूर्व चेतावनी और समन्वय के लिए अंतरिक्ष इनपुट और भू-स्थानिक उपकरणों के उपयोग का समर्थन करता है। एनडीईएम उपग्रह डेटा से प्राप्त पूर्व चेतावनी इनपुट को आईएमडी, सीडब्ल्यूसी और डीजीआरई जैसी परिचालन एजेंसियों की ओर से जारी अलर्ट के साथ एकीकृत करता है। एनडीईएम में आपातकालीन प्रतिक्रिया, आपदोत्तर आवश्यकता आकलन (पीडीएनए) के लिए निर्णय सहायता उपकरण भी हैं और प्रभावी आपदा प्रतिक्रिया और समन्वय के लिए भारत आपदा संसाधन नेटवर्क डेटा भी उपलब्ध है।

यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।


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पीके/केसी/एमएम


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