विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
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समय से पहले जन्म के बारे में एआई-आधारित समाधान विकसित करने के लिए भारत की 12,000 महिलाओं पर सबसे बड़ा प्रेग्नेंसी कोहोर्ट अध्ययन: डॉ. जितेंद्र सिंह


GARBH-INi, एआई और स्वदेशी अनुसंधान के माध्यम से समय से पहले जन्म से निपटने के लिए भारत की लड़ाई को मजबूत करेगा: डॉ. जितेंद्र सिंह

भारत समय से पहले जन्म की शुरुआती भविष्यवाणी के लिए स्वदेशी एआई उपकरण विकसित कर रहा है: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह

GARBH-Ini, बेहतर जन्म परिणामों के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवा को एकीकृत करता है: डॉ. जितेंद्र सिंह

GARBH-Ini के तहत विज्ञान-आधारित मातृ स्वास्थ्य हस्तक्षेप, अत्याधुनिक अनुसंधान को भारत के 2047 के विज़न से जोड़ते हैं: डॉ. जितेंद्र सिंह

प्रविष्टि तिथि: 23 MAR 2026 4:24PM by PIB Delhi

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष मामलों के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि GARBH-INi पहल के तहत 12,000 महिलाओं पर भारत के सबसे बड़े प्रेग्नेंसी कोहोर्ट अध्ययन का उद्देश्य प्रीटर्म जन्मों (समय से पहले जन्म) की समस्या को हल करने के लिए स्वदेशी, एआई-आधारित समाधान विकसित करना है। समय से पहले जन्म, नवजात मृत्यु दर और वयस्क अवस्था में रुग्णता (बीमारी) के प्रमुख कारणों में से एक है।

डॉ. जितेंद्र सिंह नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में "GARBH-INi (जन्म परिणामों पर उन्नत अनुसंधान के लिए अंतर्विषयक समूह) के निष्कर्षों और परिणामों का प्रसार" नामक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम जैव प्रौद्योगिकी विभाग की  पहल है। इस कार्यक्रम में जैव प्रौद्योगिकी सचिव डॉ. राजेश एस. गोखले; नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. पॉल; THSTI के कार्यकारी निदेशक डॉ. गणेशन कार्तिकेयन, और अन्य प्रमुख वैज्ञानिक तथा शोधकर्ता उपस्थित हुए।

GARBH-INi पहल की विशेष रूप से जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा कि समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों के वैश्विक बोझ में भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके कारण भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल समाधान विकसित करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम व्यापक और डेटा-आधारित दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है, जो व्यक्तिगत भविष्यवाणियों के लिए क्लिनिकल महामारी विज्ञान, मल्टी-ओमिक्स बायोमार्कर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को एकीकृत करता है।

मंत्री ने कहा कि इस पहल के तहत लगभग 12,000 गर्भवती महिलाओं का सफलतापूर्वक नामांकन किया गया है, जिससे दक्षिण एशिया के सबसे बड़े गर्भावस्था समूहों (कोहोर्ट) में से एक का निर्माण हुआ है। इस कार्यक्रम ने 1.6 मिलियन से अधिक अच्छी तरह से वर्गीकृत बायो-नमूनों और एक मिलियन से अधिक अल्ट्रासाउंड छवियों का विशाल भंडार तैयार किया है, जो उन्नत अनुसंधान के लिए मजबूत आधार बनाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस कार्यक्रम के परिणामों में भारतीय आबादी के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए एआई -आधारित गर्भावस्था डेटिंग मॉडल का विकास, समय से पहले जन्म के माइक्रोबायोम-आधारित संकेतकों की पहचान, त्वरित निदान उपकरण और प्रारंभिक जोखिम मूल्यांकन के लिए आनुवंशिक मार्करों की पहचान शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने के लिए ऐसे स्वदेशी समाधान अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

मंत्री ने GARBH-INi कार्यक्रम की प्रमुख सीख और परिणामों को दर्ज करने वाला संग्रह (कंपेंडियम) जारी किया। उन्होंने कहा कि इस पहल ने राष्ट्रीय बायो-रिपॉजिटरी और GARBH-INi-DRISHTI डेटा-साझाकरण मंच भी स्थापित किया है, जिससे अनुसंधान समुदाय के लिए व्यापक पहुंच संभव हुई है और वैश्विक वैज्ञानिक प्रकाशनों में योगदान मिल रहा है।

इस अवसर पर, प्रमुख साझेदारियों और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रमों को औपचारिक रूप दिया गया; इनमें सुन्दयोता नुमांडिस प्रोबायोस्यूटिकल्स प्रा. लिमिटेड को माइक्रोबायोम-आधारित बायोथेराप्यूटिक्स प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण, और GARBH-INi-AnandiMaa पहल के तहत एआई-सक्षम अल्ट्रासाउंड रिपोर्टिंग प्रणाली तथा जोखिम स्तरीकरण मंचों के लिए DOTO हेल्थ प्राइवेट लिमिटेड और Qure.ai टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ आशय पत्रों पर हस्ताक्षर शामिल हैं। मंत्री ने वैज्ञानिक अनुसंधान में उनके योगदान के लिए भाग लेने वाले परिवारों को सम्मानित भी किया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य भारत के भविष्य के विकास के केंद्र में है। उन्होंने कहा कि आज जन्म लेने वाले बच्चे ही 2047 में देश की ताकत और उत्पादकता को परिभाषित करेंगे। उन्होंने कहा कि GARBH-INi जैसी पहलें व्यापक राष्ट्रीय मिशन का हिस्सा हैं, जो विज्ञान को दीर्घकालिक राष्ट्र निर्माण से जोड़ता है।

भारत की जैव-अर्थव्यवस्था के 2014 में लगभग 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर लगभग 195 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का उल्लेख करते हुए, मंत्री ने कहा कि इस विस्तार में जैव प्रौद्योगिकी ने अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि भारत को अब वैश्विक स्तर पर निवारक और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा में उसकी क्षमताओं के लिए पहचाना जा रहा है, जिसे स्वदेशी नवाचारों का समर्थन प्राप्त है।

नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. पॉल ने कहा कि प्रोग्राम के अगले फेज़ में अब तक विकसित किए गए टूल्स, प्रेडिक्टिव मॉडल्स और प्लेटफॉर्म्स का असरदार तरीके से इस्तेमाल करने पर फोकस होना चाहिए। उन्होंने इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए लगातार वैज्ञानिक प्रयासों, मजबूत सहयोग और नतीजों के गहन  विश्लेषण की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

आखिर में, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि GARBH-INi जैसे विज्ञान संचालित कार्यक्रमों के ज़रिए मातृ और बाल स्वास्थ्य को मजबूत करके, भारत स्वस्थ, अधिक उत्पादक पीढ़ी बना रहा है और 2047 तक विकसित भारत के लिए मजबूत नींव रख रहा है।

फोटो: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सोमवार को इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में GARBH-INi (इंटरडिसिप्लिनरी ग्रुप फॉर एडवांस्ड रिसर्च ऑन बर्थ आउटकम्स) की सीख और नतीजों के प्रसार पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए।

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