स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

नियामक प्रक्रिया और दवा परीक्षण को आसान बनाने के लिए कदम उठाए गए हैं


दवा विनिर्माण की स्वीकृतियों को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाने के लिए एक डोजियर-आधारित लाइसेंसिंग प्रणाली शुरू की गई है

प्रयोगशाला परीक्षण के लिए तत्काल अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी करके नई दवाओं की स्वीकृतियों में तेजी लाई गई है

नियामक विलंब को कम करने के लिए निर्यात दवाओं के जैव समतुल्यता/जैव उपलब्धता अध्ययनों के लिए पूर्व अनुमति के स्थान पर एक ऑनलाइन सूचना तंत्र लागू किया गया है

भारतीय फार्माकोपिया-2026 को नई दवाओं, टीकों और रक्त उत्पादों को शामिल करके जारी किया गया है

निर्यात प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए मुक्त बिक्री प्रमाण-पत्रों की वैधता को विनिर्माण लाइसेंसों की वैधता के साथ संरेखित किया गया है

पशु परीक्षण की आवश्यकता को कम करने के लिए अब पूर्व-मौजूदा प्रीक्लिनिकल विषाक्तता डेटा को स्वीकार किया गया है

स्वीकृतियों और लाइसेंसिंग में तेजी लाने के लिए नियामक शक्तियां वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई हैं

दवा लाइसेंसिंग और परीक्षण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए ऑनलाइन राष्ट्रीय औषधि लाइसेंसिंग प्रणाली और सुगम लैब्स जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किए गए हैं

प्रविष्टि तिथि: 27 MAR 2026 2:29PM by PIB Delhi

नई औषधि एवं नैदानिक ​​परीक्षण नियम, 2019 को जीएसआर 46(ई) दिनांक 20 जनवरी, 2026 द्वारा संशोधित किया गया जिसमें कुछ श्रेणियों की औषधियों (कुछ उच्च जोखिम वाली श्रेणी की औषधियों को छोड़कर) के विश्लेषणात्मक और गैर-नैदानिक ​​परीक्षण हेतु निर्माण के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) से अनुमति प्राप्त करने के स्थान पर "पूर्व सूचना" की प्रणाली का प्रावधान किया गया है। इस सुधार से दवा कंपनियों के लिए परीक्षण, अनुसंधान या विश्लेषण उद्देश्यों के लिए इन औषधियों की छोटी मात्रा के निर्माण हेतु परीक्षण लाइसेंस प्राप्त करने की वर्तमान आवश्यकता समाप्त हो गई है। इससे औषधि विकास की समयसीमा कम होगी और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने देश में दवाओं के निर्माण के लिए नियामक परिदृश्य को सरल बनाने और अनुमोदन प्रक्रिया को तेज करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए हैं:

(i) दिनांक 25 फरवरी, 2026 को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने दवाइयों के डोजियर-आधारित लाइसेंसिंग के आधार पर विनिर्माण लाइसेंस प्राप्त करने हेतु आवेदक द्वारा आवेदन प्रस्तुत करने के लिए एक मार्गदर्शन दस्तावेज जारी किया है। डोजियर-आधारित अनुमोदन प्रक्रिया पारदर्शिता को बढ़ावा देती है और निर्णय लेने की प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित करती है। डोजियर-आधारित दृष्टिकोण व्यक्तिगत मूल्यांकन की तुलना में अधिक कुशल है क्योंकि यह प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करता है और अनावश्यक मूल्यांकन की आवश्यकता को कम करता है।

(ii) 23 फरवरी, 2026 को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने नई दवाओं के अनुमोदन में तेजी लाने के लिए एक परिपत्र जारी किया जिसमें प्रयोगशाला परीक्षण के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) आवेदन प्राप्त होते ही तुरंत जारी करने की अनुमति दी गई। इसका उद्देश्य दवा अनुमोदन प्रक्रिया में देरी को कम करना था। संशोधित प्रक्रिया के अंतर्गत नामित सरकारी प्रयोगशालाओं में नई दवाओं के परीक्षण के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र विस्तृत तकनीकी विशिष्टताओं की पूर्व जांच की प्रतीक्षा किए बिना सीधे ही प्रदान किए जाएंगे।

(iii) 21 जनवरी, 2026 को केंद्र सरकार ने निर्यात के लिए अप्रमाणित दवाओं के जैव समतुल्यता/जैव उपलब्धता (बीए/बीई) अध्ययनों के लिए अनुमति प्रणाली को ऑनलाइन सूचना तंत्र से बदलने की अधिसूचना जारी की। इससे निर्यात उद्देश्यों के लिए कम जोखिम वाले जैव उपलब्धता/जैव समतुल्यता अध्ययनों को करने के लिए पूर्व अनुमति की आवश्यकता समाप्त हो गई। नियामक समयसीमा और प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं को कम करके, यह सुधार निर्माताओं और जेनेरिक दवा उद्योग को महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करता है।

(iv) 2 जनवरी, 2026 को केंद्र सरकार ने नई भारतीय फार्माकोपिया (आईपी) 2026 जारी की। इसमें कई नए रक्त उत्पाद, टीके और तपेदिक रोधी दवाएं शामिल की गई हैं।

(v) निर्यातकों को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन द्वारा जारी किए गए फ्री सेल सर्टिफिकेट की वैधता अवधि को विनिर्माण लाइसेंस की वैधता के साथ समाप्त कर दिया गया है।

(vi) पशुओं पर विषाक्तता अध्ययन की आवश्यकता को कम करने के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने 29 जुलाई, 2024 को एक परिपत्र प्रकाशित किया, जिसमें पहले से प्राप्त पूर्व-नैदानिक ​​विषाक्तता डेटा को समीक्षा के लिए स्वीकार करने का प्रावधान किया गया। इसके अतिरिक्त, कुछ मामलों में आवश्यक पशु विषाक्तता डेटा की आवश्यकता का निर्धारण नए दावों की प्रकृति, क्रियाविधि आदि तथा अनुमोदित दावे में शामिल दवा के साथ पहले से प्राप्त गैर-नैदानिक ​​डेटा के आधार पर किया जाएगा।

(vii) आवेदनों और लाइसेंसों के शीघ्र निपटान को सक्षम बनाने के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 और उसके अंतर्गत नियमों के अंतर्गत कुछ शक्तियों के प्रत्यायोजन के लिए संयुक्त औषधि नियंत्रक (भारत) और उप औषधि नियंत्रक (भारत) के रैंक के अधिकारियों को आदेश जारी किए हैं।

(viii) ऑनलाइन राष्ट्रीय औषधि लाइसेंसिंग प्रणाली (ओएनडीएलएस) पोर्टल को उन्नत कंप्यूटिंग विकास केंद्र (सीडीएसी) द्वारा भारत सरकार के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश औषधि नियामक प्राधिकरणों के समन्वय से विकसित किया गया है। यह विनिर्माण और बिक्री लाइसेंस के लिए विभिन्न आवेदनों के ऑनलाइन प्रक्रिया हेतु एक एकल विंडो प्लेटफॉर्म है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं को एकीकृत करने के लिए सितंबर 2023 से सुगम लैब्स नामक एक ऑनलाइन पोर्टल कार्यरत है। यह चिकित्सा उत्पादों (दवाएं, टीके, सौंदर्य प्रसाधन और चिकित्सा उपकरण) के परीक्षण की संपूर्ण कार्यप्रणाली को स्वचालित करता है ताकि गुणवत्ता मानकों को पूरा किया जा सके और प्रयोगशालाओं में परीक्षण की स्थिति का पता लगाया जा सके।

देश में दवा विनिर्माण स्थलों के विनियामक अनुपालन का आकलन करने के लिए, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने राज्य औषधि नियंत्रकों (एसडीसी) के साथ मिलकर दिसंबर 2022 से 960 से अधिक स्थलों का जोखिम-आधारित निरीक्षण किया है और निष्कर्षों के आधार पर, राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी करना, उत्पादन रोकने का आदेश, निलंबन, लाइसेंस/उत्पाद लाइसेंस रद्द करना, चेतावनी पत्र जारी करना जैसे 860 से अधिक कार्रवाई की गई हैं।

इसके अलावा, राज्य अधिकारियों के समन्वय से 1100 से अधिक कफ सिरप निर्माताओं और 380 रक्त केंद्रों का गहन ऑडिट किया गया है। केंद्रीय और राज्य औषधि नियामकों द्वारा सिरप फॉर्मूलेशन के बाजार निगरानी नमूने भी बढ़ाए गए हैं।

देश भर में दवाइयों की जांच के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और प्रयोगशालाओं की क्षमता बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने केंद्र प्रायोजित योजना 'राज्यों की औषधि नियामक प्रणाली को सुदृढ़ बनाना (एसएसडीआरएस)' लागू की है। इस योजना के अंतर्गत मौजूदा राज्य प्रयोगशालाओं का उन्नयन, नई औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना और देश में मौजूदा राज्य औषधि नियंत्रण कार्यालयों का उन्नयन किया जाएगा। 'राज्यों की औषधि नियामक प्रणाली को सुदृढ़ बनाने की योजना के अंतर्गत, केंद्र सरकार के हिस्से के रूप में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को कुल 756 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है और विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 19 नई औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं का निर्माण किया गया है तथा 28 मौजूदा प्रयोगशालाओं का उन्नयन किया गया है।

अनुमोदित दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की बाज़ार में बिक्री के बाद की निगरानी के लिए भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन गाजियाबाद स्थित भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी) के राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम (पीवीपीआई) का राष्ट्रीय समन्वय केंद्र (एनसीसी) के विभिन्न प्रतिकूल दवा प्रतिक्रिया निगरानी केंद्रों और देश भर के अन्य हितधारकों से चिकित्सा उत्पादों से संबंधित प्रतिकूल घटनाओं की रिपोर्ट एकत्र करता है। इन रिपोर्टों का समय-समय पर विश्लेषण किया जाता है और चिकित्सा उत्पादों की सुरक्षा से संबंधित सिफारिशें उचित नियामक कार्रवाई के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन को भेजी जाती हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज लोकसभा में लिखित जवाब में यह बात कही।

****

पीके/केसी/एचएन/एनजे


(रिलीज़ आईडी: 2246021) आगंतुक पटल : 81
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Punjabi