वस्त्र मंत्रालय
वस्त्र क्षेत्र पर शुल्कों का प्रभाव
प्रविष्टि तिथि:
27 MAR 2026 2:52PM by PIB Delhi
सरकार सभी हितधारकों, जिनमें निर्यातक, निर्यात संवर्धन परिषदें तथा उद्योग (तमिलनाडु सहित) शामिल हैं, के साथ सक्रिय रूप से जुड़ी हुई है, जिससे वैश्विक व्यापार में हो रहे परिवर्तनों के प्रभाव का आकलन किया जा सके और उनका समाधान किया जा सके। इस संदर्भ में, भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका (यू.एस.) ने 02 फरवरी 2026 को एक व्यापार व्यवस्था की घोषणा की, जिसके पश्चात 07 फरवरी 2026 को एक संयुक्त वक्तव्य जारी किया गया। तत्पश्चात, भारत द्वारा रूसी तेल के आयात का हवाला देते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा कुछ भारतीय निर्यातों पर लगाए गए 25% अतिरिक्त एड वैलोरेम शुल्क वापस ले लिए गए। इसके अतिरिक्त, 20 फरवरी 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार, पारस्परिक शुल्कों को अवैध घोषित कर दिया गया है और वे अब प्रभाव में नहीं हैं। तथापि, संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार ने कार्यकारी आदेश जारी कर सभी देशों से आने वाले कुछ उत्पादों पर 10% शुल्क लागू किए हैं। सरकार उपर्युक्त सभी घटनाक्रमों का अध्ययन कर रही है तथा संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार के साथ निरंतर संवाद बनाए हुए है।
अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 की अवधि के दौरान, हस्तशिल्प सहित भारत का वैश्विक वस्त्र एवं परिधान निर्यात ₹2,68,951.5 करोड़ का रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 3.3% की वृद्धि दर्शाते हैं। तमिलनाडु का वस्त्र एवं परिधान निर्यात, हस्तशिल्प सहित, अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 की अवधि के दौरान ₹57,858.7 करोड़ का रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 3.3% की वृद्धि दर्शाता है। तमिलनाडु के सत्रह जिलों, जिनमें तिरुपुर शामिल है, ने अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 की अवधि के दौरान पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में निर्यात में वृद्धि दर्ज की।
सरकार ने भारतीय वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र को बढ़ावा देने तथा देश की प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करने के लिए विभिन्न योजनाएँ/पहलों को लागू किया है, और ये कदम तमिलनाडु सहित देश के निर्यात को प्रोत्साहित कर रहे हैं। प्रमुख योजनाएँ/पहलों में आधुनिक, एकीकृत एवं विश्वस्तरीय वस्त्र अवसंरचना के सृजन हेतु पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (पीएम मित्रा) पार्क्स योजना; बड़े पैमाने पर विनिर्माण को बढ़ावा देने तथा प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए एमएमएफ फैब्रिक, एमएमएफ अपैरल एवं टेक्निकल टेक्सटाइल्स पर केंद्रित प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना; अनुसंधान, नवाचार एवं विकास, संवर्धन तथा बाजार विकास पर केंद्रित राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन; मांग-आधारित, प्लेसमेंट-उन्मुख कौशल विकास कार्यक्रम प्रदान करने के उद्देश्य से वस्त्र क्षेत्र में क्षमता विकास हेतु समर्थ योजना; रेशम मूल्य श्रृंखला के समग्र विकास हेतु सिल्क समग्र-2; तथा हथकरघा क्षेत्र के एंड-टु-एंड समर्थन हेतु राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम शामिल हैं। वस्त्र मंत्रालय द्वारा हस्तशिल्प संवर्धन हेतु राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम तथा समग्र हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना भी कार्यान्वित की जा रही हैं।
सरकार ने परिधान एवं मेड-अप्स के लिए राज्य एवं केंद्रीय करों तथा उपकरों पर छूट (आरओएससीटीएल) योजना भी लागू की है, जिससे तमिलनाडु सहित सभी राज्यों के निर्यातकों के लिए शून्य-रेटेड निर्यात के सिद्धांत को अपनाकर प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाया जा सके। इसके अतिरिक्त, जो वस्त्र उत्पाद आरओएससीटीएल योजना के अंतर्गत शामिल नहीं हैं, उन्हें अन्य उत्पादों के साथ निर्यातित उत्पादों पर शुल्क एवं करों की वापसी (आरओडीटीईपी) योजना के अंतर्गत कवर किया गया है।
इसके अतिरिक्त, सरकार ने वित्त वर्ष 2025–26 से 2030–31 की अवधि के लिए एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन (ईपीएम) योजना को स्वीकृति प्रदान की है, जिसका उद्देश्य विशेष रूप से एमएसएमई के लिए भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करना है। यह मिशन दो एकीकृत उप-योजनाओं के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है: ‘निर्यात प्रोत्साहन’, जो वित्तीय साधनों एवं व्यापार-वित्त समर्थन पर केंद्रित है, तथा ‘निर्यात दिशा’, जो गैर-वित्तीय, बाजार पहुंच एवं पारिस्थितिकी तंत्र से संबंधित सहायक तत्वों पर केंद्रित है। भारत सरकार ने निर्यातकों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना (सीजीएसई) को भी स्वीकृति प्रदान की है, जिसके अंतर्गत पात्र उधारकर्ताओं, विशेष रूप से एमएसएमई, को उनकी मौजूदा कार्यशील पूंजी सीमाओं के अतिरिक्त 20% तक का अतिरिक्त ऋण समर्थन प्रदान किया जाएगा, साथ ही सीजीएसई के तहत बिना जमानत के ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने भी पात्र प्रभावित निर्यातकों के लिए व्यापार राहत उपाय प्रारंभ किए हैं, जिनमें ऋण पुनर्भुगतान पर स्थगन (मोरॅटोरियम) प्रदान करने तथा निर्यात ऋण के लिए अवधि बढ़ाने का प्रावधान शामिल है।
यह जानकारी आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह द्वारा दी गई।
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पीके/केसी/पीके
(राज्य सभा अतारांकित प्रश्न 3996)
(रिलीज़ आईडी: 2246076)
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