औषधि विभाग
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पीएमबीजेपी में आयुष का जुड़ाव

प्रविष्टि तिथि: 27 MAR 2026 4:24PM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) योजना के अंतर्गत, उत्पाद टोकरी में 5 आयुर्वेदिक उत्पादों को जोड़ा गया है, जिन्हें चयनित जन औषधि केंद्रों (जेएके) के माध्यम से सस्ती दरों पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इन उत्पादों में च्यवनप्राश स्पेशल 500 ग्राम, च्यवनप्राश स्पेशल 1000 ग्राम, त्रिफला, शिलाजीत और अश्वगंधा शामिल हैं।

मौजूदा और नए जारी किए गए/पेटेंट-मुक्त दवाओं की बाजार मांग का मूल्यांकन करने के लिए, जन औषधि केंद्रों, नागरिकों और बाजार रिपोर्टों से प्राप्त प्रतिक्रिया तथा विश्लेषण के आधार पर, उत्पाद सूची की समय-समय पर एक समिति द्वारा समीक्षा की जाती है।

जन औषधि केंद्रों में उपलब्ध आयुर्वेदिक उत्पादों सहित दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, ताकि रोगियों के स्वास्थ्य से समझौता हो, निरंतर निरीक्षण, परीक्षण और मानकीकरण सुनिश्चित करने के लिए ठोस व्यवस्था स्थापित की गई है, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  1. केवल विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा प्रमाणित गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (जीएमपी) संयंत्रों से ही आपूर्ति: केवल वे संयंत्र ही आपूर्ति के लिए पात्र हैं जिन्हें प्रत्यक्ष निरीक्षण के बाद केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) द्वारा डब्ल्यूएचओ-जीएमपी के अनुरूप प्रमाणित किया गया हो।
  2. सभी दवा बैचों के 100% पूर्व-परीक्षण के बाद ही वितरण: पीएमबीआई के गोदामों में आपूर्ति किए गए सभी बैचों से गुमनाम रूप से परीक्षण के लिए नमूने लिए जाते हैं और गुणवत्ता परीक्षण पास होने के बाद ही दवाओं को जन औषधि केंद्रों को आपूर्ति के लिए भेजा जाता है।
  3. केवल गुड लेबोरेटरी प्रैक्टिसेज (जीएलपी) के अनुरूप प्रयोगशालाओं में परीक्षण: नमूनों का परीक्षण केवल राष्ट्रीय परीक्षण और अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) द्वारा मान्यता प्राप्त और समय-समय पर निरीक्षण की जाने वाली प्रयोगशालाओं में किया जाता है, और इसके अतिरिक्त, पीएमबीआई द्वारा जीएलपी अनुपालन के लिए उनका मूल्यांकन किया जाता है।

आयुष मंत्रालय ने सूचित किया है कि लघु उद्योग के आयुष उत्पादकों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण और मानकीकरण मानदंडों हेतु सरकार द्वारा निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:-

  • औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 और औषधि नियम, 1945 में आयुर्वेद, सिद्ध, सोवा-रिग्पा, यूनानी और होम्योपैथी औषधियों के लिए विशेष नियामक प्रावधान हैं। आयुर्वेद, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और यूनानी औषधियों से संबंधित प्रावधान औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 के अध्याय IV और अनुसूची-I में तथा औषधि नियम, 1945 के नियम 151 से 169, अनुसूची (I), टी और टीए में निहित हैं। इसके अतिरिक्त, औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 की दूसरी अनुसूची (4) होम्योपैथिक औषधियों के लिए मानक प्रदान करती है तथा औषधि नियम, 1945 के नियम 2डीडी, 30एए, 67 (सीएच), 85 ( से आई), 106-, अनुसूची के और अनुसूची एमआई होम्योपैथिक औषधियों से संबंधित हैं। विनिर्माण इकाइयों और दवाओं के लाइसेंस के लिए निर्धारित आवश्यकताओं का पालन करना निर्माताओं के लिए अनिवार्य है, जिसमें सुरक्षा और प्रभावशीलता का प्रमाण, औषधि नियम, 1945 की अनुसूची टी और अनुसूची एमआई के अनुसार अच्छी विनिर्माण प्रथाओं (जीएमपी) का अनुपालन और संबंधित औषध संहिता में दिए गए दवाओं के गुणवत्ता मानकों का अनुपालन शामिल है।
  • आयुष मंत्रालय के अधीन एक अधीनस्थ संस्था, भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी औषध संहिता आयोग (पीसीआईएम एंड एच), आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी (आयुष) औषधियों के लिए सूत्र विनिर्देश और औषध संहिता मानक निर्धारित करती है, जो आयुष औषधियों की गुणवत्ता (पहचान, शुद्धता और सामर्थ्य) सुनिश्चित करने के लिए आधिकारिक संकलन के रूप में कार्य करता है। औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 और उसके अंतर्गत नियमों के अनुसार, आयुष औषधियों के निर्माण के लिए इन गुणवत्ता मानकों का अनुपालन अनिवार्य है।
  • पीसीआईएम एंड एच, आयुष दवाओं के परीक्षण या विश्लेषण के लिए अपीलीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला के रूप में भी कार्य करता है। इसके अतिरिक्त, यह औषधि नियामक प्राधिकरणों, औषधि विश्लेषकों और अन्य संबंधित हितधारकों के लिए आयुष दवाओं के मानकीकरण, गुणवत्ता नियंत्रण और परीक्षण या विश्लेषण हेतु नियमित अंतराल पर क्षमता-निर्माण प्रशिक्षण आयोजित करता है, जिसमें आयुष दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रयोगशाला तकनीकों और कार्यप्रणालियों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
  • औषधि नियम, 1945 के नियम 160 से जे तक आयुर्वेदिक, सिद्ध और यूनानी औषधियों के निर्माण के लिए लाइसेंसधारी की ओर से इन नियमों के प्रावधानों के तहत आवश्यक पहचान, शुद्धता, गुणवत्ता और सामर्थ्य के परीक्षण करने हेतु औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्वीकृति के लिए नियामक दिशानिर्देश प्रदान करते हैं। वर्तमान स्थिति में, 34 राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं को उनकी अवसंरचनात्मक और कार्यात्मक क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए सहायता प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त, आयुर्वेदिक, सिद्ध और यूनानी औषधियों और कच्चे माल की गुणवत्ता परीक्षण के लिए औषधि नियम, 1945 के प्रावधानों के अंतर्गत 108 प्रयोगशालाओं को स्वीकृति या लाइसेंस प्राप्त है।
  • आयुष मंत्रालय ने केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) में एक आयुष विभाग स्थापित किया है, जिसमें 1 उप औषधि नियंत्रक, 4 सहायक औषधि नियंत्रक और 4 औषधि निरीक्षकों के पद शामिल हैं। आयुष विभाग में तैनात औषधि निरीक्षक, आयुष दवाओं की सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लाइसेंसिंग अधिकारियों/औषध निरीक्षकों के समन्वय से विभिन्न विनिर्माण इकाइयों का निरीक्षण करते हैं।
  • आयुष मंत्रालय वर्ष 2021-22 से केंद्रीय क्षेत्र योजना "आयुष औषधि गुणवत्त एवं उत्त्पादन संवर्धन योजना" (एओजीयूएसवाई) लागू कर रहा है, जिसके लिए पांच वर्षों हेतु कुल 122.00 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इस योजना का एक घटक आयुष फार्मेसियों और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं को मजबूत और उन्नत बनाना है ताकि वे क्रमशः डब्ल्यूएचओ-जीएमपी और एनएबीएल जैसे उच्च मानकों को प्राप्त कर सकें।

छत्तीसगढ़ राज्य सहित पूरे देश में जन औषधि केंद्रों पर सस्ती दवाओं की सुलभता और उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निम्नलिखित उपाय किए गए हैं:

  1. देश भर में वर्तमान में पांच गोदामों और 41 वितरकों से युक्त एक संपूर्ण सूचना प्रौद्योगिकी-सक्षम आपूर्ति श्रृंखला प्रणाली स्थापित है।
  2. सितंबर 2024 से, जन औषधि केंद्रों (जेएके) द्वारा आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली 200 दवाओं का स्टॉक रखने पर प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिसमें उत्पाद बास्केट में सबसे अधिक बिकने वाली 100 दवाएं और बाजार में तेजी से बिकने वाली 100 दवाएं शामिल हैं। जेएके मालिकों को इन दवाओं के उनके द्वारा रखे गए स्टॉक के आधार पर मासिक प्रोत्साहन प्राप्त करने की पात्रता होगी।
  3. इसके अतिरिक्त, आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, योजना को लागू करने वाली संस्था {भारतीय औषधि और चिकित्सा उपकरण ब्यूरो (पीएमबीआई)} द्वारा 400 तेजी से बिकने वाले उत्पादों की नियमित निगरानी की जाती है और इनकी मांग का निरंतर पूर्वानुमान लगाया जाता है। साथ ही, खरीद प्रक्रिया को स्वचालित बनाने के लिए पूर्वानुमान पद्धति को डिजिटाइज़ करने के कदम उठाए गए हैं।

आयुष मंत्रालय ने सूचित किया है कि राष्ट्रीय आयुष मिशन, अन्य बातों के अलावा, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित आयुष अस्पतालों और औषधालयों में आवश्यक आयुष दवाओं की आपूर्ति के लिए प्रावधान करता है।

आयुष मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सुरक्षित, प्रभावी और सुलभ स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की नीति के अनुरूप आवश्यक औषधियों की एक समेकित सूची तैयार की गई, जिसके परिणामस्वरूप आयुष मंत्रालय और स्वास्थ्य की आवश्यक औषधि सूची (ईडीएल) प्रकाशित हुई। रोगों के बदलते स्वरूप और जन स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, उपलब्धता, उपयोग, प्रमाण, सुरक्षा और लागत-प्रभावशीलता जैसे मानदंडों के आधार पर, व्यापक हितधारक परामर्श के माध्यम से इस सूची को संशोधित करके राष्ट्रीय आवश्यक आयुष औषधि सूची (एनएलईएएम) का रूप दिया गया। यह मानकीकृत सूची स्वास्थ्य सेवा के सभी स्तरों पर गुणवत्तापूर्ण दवाओं के तर्कसंगत चयन, खरीद और आपूर्ति में सहायक है, कमी को रोकने में सहायता करती है, संसाधनों के लागत-प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देती है और सार्वजनिक एवं निजी दोनों क्षेत्रों के लिए एक संदर्भ के रूप में कार्य करती है, साथ ही साथ पारंपरिक औषधियों के अनुसंधान और पुनर्मूल्यांकन को भी प्रोत्साहित करती है।

सरकार ने सभी को किफायती दामों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना शुरू की है। इस योजना के अंतर्गत, जन औषधि केंद्र के नाम से समर्पित केंद्र देशभर में खोले गए हैं, जहां पीएमबीईके उत्पाद सूची के अंतर्गत आने वाली आयुर्वेदिक दवाओं सहित अन्य दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत से 80 प्रतिशत तक कम दामों पर उपलब्ध कराई जाती हैं।

पिछले 11 वर्षों के दौरान, आयुर्वेदिक उत्पादों सहित जनऔषधि उत्पादों के उपयोग के कारण दवाओं पर होने वाले "अपनी जेब से होने वाले खर्च" में कमी के रूप में कुल 40,000 करोड़ रुपये की बचत हुई है।

प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के अंतर्गत, 28.02.2026 तक देश भर में कुल 18,646 जन औषधि केंद्र खोले गए हैं, जिनमें से 352 केंद्र छत्तीसगढ़ राज्य में खोले गए हैं। खोले गए जन औषधि केंद्रों की जिलावार सूची अनुलग्नक में संलग्न है

अनुलग्नक

छत्तीसगढ़ राज्य में 28.02.2026 तक जिलेवार खोले गए जेएके (जन औषधि केंद्र) की संख्या

क्रम संख्या

जिले का नाम

केंद्रों की संख्या

1

बस्तर

11

2

बिलासपुर

20

3

दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा

2

4

धमतरी

10

5

दुर्ग

61

6

जांजगीर-चंपा

10

7

जशपुर

9

8

उत्तर बस्तर कांकेर

4

9

कबीरधाम

7

10

कोरबा

12

11

कोरिया

3

12

महासमुंद

11

13

रायगढ़

12

14

रायपुर

42

15

राजनांदगांव

19

16

सरगुजा

5

17

बीजापुर

3

18

नारायणपुर

3

19

सुकमा

1

20

कोंडागाँव

7

21

बलोदाबाजार-भाटापारा

22

22

गरियाबंद

7

23

बलोद

8

24

मुंगेली

8

25

सूरजपुर

7

26

बलरामपुर-रामानुजगंज

7

27

बेमेतरा

10

28

गौरेला-पेंद्रा-मरवाही

5

29

खैरागढ़-छुईखदान-गंडाई

7

30

मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर(एमसीबी)

6

31

मोहला-मनपुर-अंबागढ़ चौकी

4

32

शक्ति

5

33

सारंगढ़-बिलाइगढ़

4

कुल

352

 

रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/एमकेएस/डीए


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