इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
यूआईडीएआई बहु-मॉडल प्रमाणीकरण को सक्षम बनाता है, विवरणों के आवधिक अद्यतन को सुगम बनाता है और प्रमाणीकरण संबंधी समस्याओं को कम करने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करता है
प्रविष्टि तिथि:
27 MAR 2026 6:30PM by PIB Delhi
आधार, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा संचालित विश्व की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली है, जिसके लगभग 134 करोड़ सक्रिय आधार धारक हैं।
इसने 17,000 करोड़ से अधिक प्रमाणीकरण लेनदेन पूरे कर लिए हैं।
जन कल्याण के लिए आधार:
केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत लाभ और सेवाओं के वितरण के लिए आधार एक मूलभूत पहचान के रूप में उभरा है। यह लगभग सार्वभौमिक कवरेज और व्यापक स्वीकृति द्वारा समर्थित है।
वर्तमान में 3,100 से अधिक प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) योजनाओं और 360 से अधिक सार्वजनिक सेवाओं में आधार-आधारित प्रमाणीकरण/सत्यापन का उपयोग किया जा रहा है। इससे राज्यों को लक्षित, पारदर्शी और त्रुटिरहित वितरण सुनिश्चित करने में मदद मिली है। इसके साथ ही इस प्रकार की योजनाओं से नकली और अपात्र लाभार्थियों को भी निकाला गया है।
इसके अलावा, आधार-बैंक लिंकेज लाभार्थियों के खातों में लाभों के प्रत्यक्ष और सुरक्षित हस्तांतरण को सुगम बनाता है, जिससे शासन में दक्षता और जवाबदेही बढ़ती है।
आधार नंबर धारकों के लिए यह एक विश्वसनीय, डिजिटल रूप से सत्यापित पहचान प्रदान करता है, जिससे सरकारी योजनाओं में समावेश सुनिश्चित होता है और बैंकिंग, दूरसंचार, ऋण और बीमा जैसे क्षेत्रों में सेवाओं तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित होती है।
आधार एक उद्देश्य-निरपेक्ष पहचान उपकरण के रूप में:
यद्यपि आधार का उपयोग अनेक कल्याणकारी योजनाओं में व्यापक रूप से किया जाता है, फिर भी यूआईडीएआई लाभार्थियों की पहचान के लिए आधार का उपयोग करने वाली योजना-कार्यान्वयन संस्थाओं द्वारा किए गए प्रमाणीकरण के उद्देश्य से संबंधित कोई भी जानकारी एकत्र, संग्रहीत या बनाए नहीं रखता है।
आधार प्रमाणीकरण में शिकायतें
सार्वजनिक सेवा वितरण ढांचे के साथ आधार के व्यापक एकीकरण को देखते हुए, कनेक्टिविटी संबंधी समस्याएं, बायोमेट्रिक या जनसांख्यिकीय विसंगतियां, अमान्य वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी), डिवाइस संबंधी समस्याएं और अन्य तकनीकी कारणों की वजह से आधार प्रमाणीकरण में विफलताएं हो सकती हैं।
इस प्रकार की शिकायतों का समाधान संबंधित योजना को लागू करने वाले मंत्रालयों/विभागों के समन्वय से समयबद्ध तरीके से किया जाता है।
इसके अलावा, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने प्रमाणीकरण संबंधी समस्याओं को कम करने के लिए कई उपाय किए हैं। इनमें बहु-आयामी प्रमाणीकरण विधियों (बायोमेट्रिक, ओटीपी और चेहरे की पहचान) को सक्षम करना, बायोमेट्रिक और जनसांख्यिकीय विवरणों को समय-समय पर अद्यतन करना और प्रमाणीकरण अवसंरचना को मजबूत करना शामिल है।
इससे पात्र लाभार्थियों को कल्याणकारी लाभों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिली है।
इसके अतिरिक्त, आधार अधिनियम, 2016 में यह प्रावधान है कि किसी भी पात्र लाभार्थी को आधार कार्ड न होने या आधार प्रमाणीकरण में असमर्थता (प्रमाणीकरण विफलताओं सहित) के कारण कल्याणकारी लाभों या सेवाओं से वंचित नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में पहचान के वैकल्पिक और व्यवहार्य साधन उपलब्ध कराए गए हैं।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने 27.03.2026 को राज्यसभा में यह जानकारी दी।
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पीके/केसी/जेके/एम
(रिलीज़ आईडी: 2246249)
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