औषधि विभाग
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सरकारी अस्पतालों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता

प्रविष्टि तिथि: 27 MAR 2026 4:26PM by PIB Delhi

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएंडएफडब्‍ल्‍यू) द्वारा प्रदान की गई जानकारी के अनुसार, सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में आने वाले मरीजों के लिए आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा उनके जेब से होने वाले खर्च (ओओपीई) को कम करने के उद्देश्य से, सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत नि:शुल्क औषधि सेवा पहल (एफडीएसआई) शुरू की है। इसके अंतर्गत, राज्यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों को उनके कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं (पीआईपी) में दर्शाई गई आवश्यकताओं के आधार पर, उनकी समग्र संसाधन सीमा के भीतर सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक दवाओं को नि:शुल्क उपलब्ध कराने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

एमओएचएंडएफडब्‍ल्‍यू ने यह भी सिफारिश की है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में सुविधा-वार आवश्यक दवाओं की सूची (ईएमएल), जिसमें कैंसर उपचार की दवाएं भी शामिल हैं, उपलब्ध कराई जाए:

उप-स्वास्थ्य केन्‍द्र स्वास्थ्य एवं कल्याण केन्‍द्र (एसएचसी-एचडब्‍ल्‍यूसी) - 106

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्‍द्र स्वास्थ्य एवं कल्याण केन्‍द्र (पीएचसी-एचडब्‍ल्‍यूसी) - 172

सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र (सीएचसी) - 300

उप-जिला अस्‍पताल - 318

जिला अस्‍पताल (डीएच) – 381

योजना के अंतर्गत दवाओं की खरीद तथा खरीद प्रणाली को सुदृढ़/स्थापित करने के लिए सहायता उपलब्ध कराई जाती है, जिसमें गुणवत्ता आश्वासन, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन एवं भंडारण, प्रिस्क्रिप्शन ऑडिट, शिकायत निवारण, मानक उपचार दिशानिर्देशों का प्रसार तथा आवश्यक दवाओं की खरीद और उपलब्धता की वास्तविक स्थिति की निगरानी के लिए आईटी-सक्षम प्लेटफॉर्म डीवीडीएमएस (दवा और टीका वितरण प्रबंधन प्रणाली) की स्थापना शामिल है। राष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन गतिविधियों की निगरानी को सुगम बनाने के लिए एक केन्‍द्रीय डैशबोर्ड विकसित किया गया है। कुछ राज्यों ने डीवीडीएमएस पोर्टल को उप-स्वास्थ्य केन्‍द्रों तक लागू कर दिया है, जबकि अन्य राज्य आवश्यक दवाओं की खरीद और उपलब्धता की वास्तविक स्थिति की प्रभावी निगरानी के लिए इसे लागू करने का प्रयास कर रहे हैं।

इसके अतिरिक्त, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग की प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के अंतर्गत, 28.02.2026 तक देशभर में कुल 18,646 जन औषधि केन्‍द्र (जेएके) खोले जा चुके हैं, जिनमें से 2,370 जन औषधि केन्‍द्र विशेष रूप से सरकारी अस्पतालों में खोले गए हैं, ताकि दवाएं ब्रांडेड दवाओं की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत से 80 प्रतिशत तक सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जा सकें।

योजना के तहत सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए 28.02.2026 तक बिहार राज्य में कुल 1,127 जन औषधि केन्‍द्र खोले गए हैं।

बिहार के पश्चिम चंपारण जिले से कुल 23 आवेदन (नरकटियागंज में 09 और बगहा में 14) प्राप्त हुए हैं। इन केन्‍द्रों की स्थापना और संचालन, फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया (पीएमबीआई) से प्रारंभिक स्वीकृति प्राप्त करने तथा संबंधित राज्य औषधि लाइसेंसिंग प्राधिकरण से आवश्यक लाइसेंस लेने के बाद किया जाता है।

सरकार ने जन औषधि केन्‍द्र खोलने के लिए फ्रेंचाइज़ी जैसे मॉडल को अपनाया है, जिसके अंतर्गत व्यक्तिगत उद्यमियों, गैर-सरकारी संगठनों, सोसाइटी, ट्रस्ट, फर्म, निजी कंपनियों आदि से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। कोई भी व्यक्ति जिसके पास डी. फार्मा या बी. फार्मा की योग्यता हो, या कोई व्यक्ति/संस्था जिसने ऐसी योग्यता वाले व्यक्ति को फार्मासिस्ट के रूप में नियुक्त किया हो और संबंधित राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण से दवा लाइसेंस प्राप्त किया हो, वह जन औषधि केन्‍द्र खोलने का पात्र है। देश के सभी जिलों, जिनमें बिहार का पश्चिम चंपारण जिला भी शामिल है, से ऑनलाइन आवेदन वेबसाइट www.janaushadhi.gov.in के माध्यम से आमंत्रित किए गए हैं।

प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि योजना के अंतर्गत उत्पाद सूची में 2,110 दवाएं तथा 315 सर्जिकल सामग्री, चिकित्सा उपभोग्य वस्तुएं और उपकरण शामिल हैं, जो हृदय रोग, कैंसर रोधी, मधुमेह रोधी, संक्रमण रोधी, एलर्जी रोधी तथा जठरांत्र संबंधी दवाओं और न्यूट्रास्यूटिकल्स सहित सभी प्रमुख चिकित्सीय समूहों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची में शामिल लगभग सभी जेनेरिक दवाएं, प्रयोगशाला अभिकर्मकों और टीकों को छोड़कर, इस उत्पाद सूची का हिस्सा हैं।

इस उत्पाद सूची की समय-समय पर एक समिति द्वारा समीक्षा की जाती है, जिसमें जन औषधि केन्‍द्रों (जेएके), नागरिकों और बाजार रिपोर्टों से प्राप्त फीडबैक एवं विश्लेषण के आधार पर मौजूदा तथा नई शुरू की गई/पेटेंट-मुक्त दवाओं की बाजार मांग का मूल्यांकन किया जाता है।

यह जानकारी रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री, श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/केपी/एसएस


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