वित्त मंत्रालय
सीबीआईसी ने नई दिल्ली में पात्र उत्पादक आयातकों के लिए ड्यूटी डेफरमेंट स्कीम पर आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया
सीबीआईसी के सदस्य (सीमा शुल्क), दिल्ली सीमा शुल्क के मुख्य आयुक्त, दिल्ली सीमा शुल्क (निवारक) जोन के मुख्य आयुक्त और डीआईसी के मुख्य आयुक्त ने व्यापार निकायों, उद्योगों और प्रमुख हितधारकों के साथ इस योजना के मुख्य लाभों और तौर-तरीकों पर चर्चा और विचार-विमर्श किया
प्रविष्टि तिथि:
28 MAR 2026 12:15PM by PIB Delhi
केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित प्रमुख व्यापार सुविधा पहल के अनुसरण में, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने आज नई दिल्ली में पात्र उत्पादक आयातकों (ईएमआई) के लिए ड्यूटी डेफरमेंट स्कीम पर एक हाइब्रिड आउटरीच कार्यक्रम का आयोजन किया।
श्री योगेंद्र गर्ग, सदस्य (सीमा शुल्क), सीबीआईसी; श्री मनीष कुमार, मुख्य आयुक्त, दिल्ली सीमा शुल्क; श्री संजय गुप्ता, मुख्य आयुक्त, दिल्ली सीमा शुल्क (निवारक) जोन; श्री अखिल कुमार खत्री, मुख्य आयुक्त, डीआईसी; व्यापार निकायों के प्रतिनिधियों, उद्योग और प्रमुख हितधारकों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया और ईएमआई योजना के लाभों और कार्यप्रणाली पर विचार-विमर्श किया।
इस सत्र में एक विस्तृत प्रस्तुति शामिल रही, जिसके बाद व्यापार और उद्योग जगत की शंकाओं के समाधान के लिए एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, श्री योगेंद्र गर्ग ने कहा कि यह योजना विश्वास-आधारित दृष्टिकोण अपनाती है, जिसका उद्देश्य तेजी से क्लीयरेंस की सुविधा प्रदान करना और ड्वेल टाइम को कम करना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस पहल का उद्देश्य विश्वास की कमी को कम करना और एक अधिक कुशल एवं सहयोगात्मक अनुपालन वातावरण को बढ़ावा देना है। श्री गर्ग ने हितधारकों को योजना के लाभ उठाने और अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
श्री मनीष कुमार ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह योजना बेहतर आयात शेड्यूलिंग और अधिक कुशल कार्यशील पूंजी प्रबंधन को सक्षम बनाकर उत्पादक आयातकों की व्यावसायिक व्यवहार्यता को बढ़ाती है।
ईएमआई योजना के बारे में
ईएमआई योजना आयात शुल्क के विलंबित भुगतान को सक्षम बनाती है, जिससे पात्र उत्पादक आयातक बिना किसी अग्रिम शुल्क भुगतान के सामान की निकासी कर सकते हैं। शुल्क का भुगतान मासिक आधार पर किया जाना होता है।
यह योजना समावेशी है और इसका विस्तार एमएसएमई तक भी है। यह सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल के अनुरूप है और इसका उद्देश्य नकदी प्रवाह में सुधार और कार्गो निकासी में तेजी लाकर घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना है।
मुख्य लाभ
- उत्पादकों के लिए बेहतर नकदी प्रवाह
- तेजी से क्लीयरेंस और ड्वेल टाइम में कमी
- बेहतर आयात योजना और इन्वेंटरी प्रबंधन
- मजबूत भुगतान अनुशासन
- उन्नत वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता
- बेहतर आपूर्ति श्रृंखला दक्षता
पात्रता मापदंड
- वैध आईईसी वाला निर्माता/आयातक
- पिछले वित्तीय वर्ष में कम से कम 25 आयात-निर्यात (EXIM) दस्तावेज़ (जैसे बिल ऑफ एंट्री) दाखिल किए होने चाहिए। (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम - इनके लिए छूट दी गई है, इन्हें केवल 10 दस्तावेज दाखिल करने की आवश्यकता है।)
- जीएसटी अनुपालन - आयातक का जीएसटी रिटर्न लंबित नहीं होनी चाहिए।
- वित्तीय रूप से सक्षम होने का प्रमाण
- स्वच्छ अनुपालन रिकॉर्ड
आवेदन प्रक्रिया
आवेदन एईओ पोर्टल (www.aeoindia.gov.in) के माध्यम से ऑनलाइन जमा किए जा सकते हैं, जो 1 मार्च 2026 से कार्यात्मक है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल है और इसमें किसी भी फिजिकल इंटरफेस की आवश्यकता नहीं है।
अनुमोदित आवेदक 1 अप्रैल 2026 से सभी सीमा शुल्क केंद्रों पर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। यह योजना दो वर्ष की अवधि के लिए, यानी 31 मार्च 2028 तक वैध रहेगी।
सीबीआईसी सुविधा, प्रौद्योगिकी और विश्वास-आधारित अनुपालन के माध्यम से एक पारदर्शी, कुशल और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी व्यापार इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
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पीके/केसी/डीवी
(रिलीज़ आईडी: 2246404)
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