पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
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संसद में प्रश्न: एक अप्रैल से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 प्रभावी होंगे

प्रविष्टि तिथि: 30 MAR 2026 1:37PM by PIB Delhi

भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 27 जनवरी, 2026 को राजपत्र में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 को अधिसूचित किया, जिसने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 का स्थान लिया है। ये नियम एक अप्रैल, 2026 से प्रभावी होंगे। संशोधित नियमों में चक्रीय अर्थव्यवस्था और विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व के सिद्धांतों को एकीकृत किया गया है, जिसमें कुशल अपशिष्ट पृथक्करण और प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया है।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के अनुसार, ठोस अपशिष्ट को स्रोत पर ही चार भागों में अलग करना अनिवार्य है: गीला अपशिष्ट, सूखा अपशिष्ट, स्वच्छता अपशिष्ट और विशेष देखभाल अपशिष्ट। इसके साथ ही, थोक अपशिष्ट उत्पादकों की स्पष्ट परिभाषा भी दी गई है, जिन्हें विस्तारित थोक अपशिष्ट उत्पादक उत्तरदायित्व का पालन करना अनिवार्य है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उत्पन्न अपशिष्ट का संग्रहण, परिवहन और प्रसंस्करण पर्यावरण के अनुकूल तरीके से हो। ये नियम संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और निपटान सहित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के सभी चरणों की ऑनलाइन ट्रैकिंग और निगरानी को केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से कार्यान्वित करते हैं।

इन नियमों में शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों और भारत सरकार के संबंधित मंत्रालयों के लिए विशिष्ट भूमिकाएं और जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं। नियमों के अनुसार, औद्योगिक इकाइयों, जिनमें सीमेंट संयंत्र और अपशिष्ट-से-ऊर्जा संयंत्र शामिल हैं, के लिए अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन (आरडीएफ) के उपयोग हेतु ईंधन प्रतिस्थापन दर को वर्तमान पांच प्रतिशत से बढ़ाकर छह वर्षों में 15 प्रतिशत तक किया जाना है। ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण और निपटान सुविधाओं के लिए भूमि के त्वरित आवंटन को सुगम बनाने के लिए, नियमों में विकास के लिए श्रेणीबद्ध मानदंड निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा, ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण और निपटान सुविधाओं के लिए ऑनलाइन रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। नियमों के तहत अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधाओं का ऑडिट भी किया जाएगा।

इन नियमों में अपशिष्ट निपटान के लिए समयबद्ध कार्य योजना विकसित करने और उसे लागू करने तथा ठोस अपशिष्ट के भूमि भराव पर प्रतिबंधों को और अधिक मजबूत करने का भी प्रावधान है। पहाड़ी क्षेत्रों और द्वीपों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए विशेष प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। 'प्रदूषक भुगतान सिद्धांत' के आधार पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने का प्रावधान भी किया गया है। नियमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्रीय और राज्य स्तरीय समितियों के गठन का प्रावधान है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नियमों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए केंद्रीय कार्यान्वयन समिति का गठन किया है।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/जेके/एमपी


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