महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 योजना - एकीकृत रूप में सेवाओं का पैकेज प्रदान किया जा रहा है
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत पोषण भी पढ़ाई भी पहल का शुभारंभ किया
सरकार ने 1,03,940 आंगनवाड़ी केंद्रों को 'सक्षम आंगनवाड़ी केंद्रों' के रूप में उन्नत किया
प्रविष्टि तिथि:
01 APR 2026 12:34PM by PIB Delhi
सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को एकीकृत रूप में सेवाओं का एक व्यापक पैकेज प्रदान किया जाता है:
- पूरक पोषण
- प्री-स्कूल अनौपचारिक शिक्षा
- पोषण और स्वास्थ्य शिक्षा
- टीकाकरण
- स्वास्थ्य जाँच
- रेफरल सेवाएँ
इन छह सेवाओं में से तीन सेवाएँ—टीकाकरण, स्वास्थ्य जाँच और रेफरल सेवाएँ—स्वास्थ्य से संबंधित हैं, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) और सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के माध्यम से प्रदान की जाती हैं।
मिशन पोषण 2.0 के अंतर्गत, कुपोषण में कमी लाने और बच्चों के स्वास्थ्य, कल्याण एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) में सुधार के लिए एक नई रणनीति अपनाई गई है। इसमें सामुदायिक जुड़ाव, आउटरीच (जनसंपर्क), व्यवहार परिवर्तन और एडवोकेसी जैसे दृष्टिकोण शामिल हैं। यह रणनीति मातृ पोषण, शिशु और छोटे बच्चों के आहार संबंधी मानकों, गंभीर तीव्र कुपोषण (एसएएम)/मध्यम तीव्र कुपोषण (एमएएम) के उपचार और आयुष पद्धतियों के माध्यम से स्वास्थ्य लाभ पर केंद्रित है, ताकि वेस्टिंग, स्टंटिंग, एनीमिया (रक्ताल्पता) और कम वजन की समस्या को कम किया जा सके।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए), 2013 की अनुसूची-II में निहित पोषण मानकों के अनुरूप बच्चों (6 माह से 6 वर्ष), गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों को पूरक पोषण प्रदान किया जाता है। इन मानकों को जनवरी 2023 में संशोधित किया गया है। संशोधित मानक पूरक पोषण की मात्रा और गुणवत्ता, दोनों ही दृष्टि से अधिक व्यापक और संतुलित हैं। यह आहार विविधता के सिद्धांतों पर आधारित है, जो गुणवत्तापूर्ण प्रोटीन, स्वस्थ वसा और सूक्ष्म पोषक तत्व (कैल्शियम, जिंक, आयरन, डाइटरी फोलेट, विटामिन ए, विटामिन-बी6 और विटामिन बी-12) सुनिश्चित करता है। गंभीर रूप से कुपोषित (एसएएम) बच्चों को अतिरिक्त पूरक पोषण प्रदान किया जाता है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के अंतर्गत 'पोषण भी पढ़ाई भी' (पीबीपीबी) पहल का शुभारंभ किया है। 'पोषण भी पढ़ाई भी' का उद्देश्य आंगनवाड़ी प्रणाली के माध्यम से प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) की गुणवत्ता में सुधार करना है। इसके तहत आंगनवाड़ी केंद्रों (एडब्ल्यूसी) को उच्च गुणवत्ता वाले बुनियादी ढांचे, खेल के उपकरणों से लैस किया जा रहा है और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (एडब्ल्यूडब्ल्यू) को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है।
प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (एडब्ल्यूडब्ल्यू) के क्षमता विकास को पहले कदम के रूप में परिकल्पित किया गया है। 'पोषण भी पढ़ाई भी' (पीबीपीबी) के क्षमता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत, 27 मार्च 2026 तक 10,58,168 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ईसीसीई शिक्षण-पद्धति और पोषण सेवाओं के वितरण में प्रशिक्षित किया जा चुका है। पीबीपीबी के तहत, केंद्रों पर पर्याप्त सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पूर्व-स्कूली शिक्षा (पीएसई) किट के लिए आवंटन बढ़ाकर ₹3,000 प्रति आंगनवाड़ी केंद्र प्रति वर्ष कर दिया गया है। ईसीसीई की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सरकार ने मार्च 2024 में दो महत्वपूर्ण ढांचे लॉन्च किए: 'नवचेतना' — जो 3 वर्ष तक के बच्चों के प्रारंभिक मानसिक विकास के लिए एक राष्ट्रीय रूपरेखा है, और 'आधारशिला' — जो 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए ईसीसीई का राष्ट्रीय पाठ्यक्रम है। 'नवचेतना' रूपरेखा देखभाल करने वालों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को संवेदनशील देखभाल के माध्यम से बच्चों के समग्र विकास के लिए सशक्त बनाती है। वहीं, 'आधारशिला' सभी शिक्षण क्षेत्रों को कवर करने वाली खेल-आधारित गतिविधियों को प्राथमिकता देकर आंगनवाड़ियों में दी जाने वाली प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करती है।
सरकार ने अब तक 1,03,940 आंगनवाड़ी केंद्रों (एडब्ल्यूसी) को 'सक्षम आंगनवाड़ी केंद्रों' के रूप में उन्नत किया है। इसका मुख्य उद्देश्य लाभार्थियों को पोषण की बेहतर आपूर्ति सुनिश्चित करना और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) सेवाओं पर ध्यान केंद्रित करना है।
आंगनवाड़ी केंद्रों पर पोषण वितरण सहायता प्रणालियों को मजबूत करने और उनमें पारदर्शिता लाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का लाभ उठाते हुए, सरकार ने 1 मार्च 2021 को 'पोषण ट्रैकर' ई-गवर्नेंस पोर्टल शुरू किया है। पोषण ट्रैकर इस मिशन के वास्तविक समय के आंकड़ों को दर्ज करने में सक्षम बनाता है। डेटा प्रविष्टि को सुचारू और निर्बाध बनाने के लिए सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को इंटरनेट कनेक्टिविटी के साथ स्मार्टफोन प्रदान किए गए हैं। पोषण ट्रैकर निर्धारित संकेतकों के आधार पर सभी आंगनवाड़ी केंद्रों, कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों की निगरानी एवं ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करता है। बच्चों में स्टंटिंग, वेस्टिंग और कम वजन की निरंतर निगरानी और पहचान के लिए पोषण ट्रैकर आधारित एप्लिकेशन का उपयोग किया जा रहा है।
पंजीकृत लाभार्थियों के विकास की निगरानी सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र पर ग्रोथ मॉनिटरिंग डिवाइसेस का प्रावधान किया गया है।
इसके अतिरिक्त, सेवा वितरण की 'लास्ट माइल ट्रैकिंग' (अंतिम चरण तक निगरानी) सुनिश्चित करने के लिए, 'टेक-होम राशन' (टीएचआर) के वितरण हेतु पोषण ट्रैकर का उपयोग करके 'फेशियल रिकग्निशन सिस्टम' (एफआरएस) विकसित की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लाभ केवल पोषण ट्रैकर पर पंजीकृत लक्षित और पहचान किए गए लाभार्थियों को ही प्राप्त हो। इसके साथ ही, सभी लाभार्थियों को राशन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पोषण ट्रैकर में 'नॉमिनी मॉड्यूल' को भी शुरू किया गया है।
आंगनवाड़ी केंद्रों पर प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा के क्रियान्वयन के लिए 'पोषण ट्रैकर' का उपयोग किया जा रहा है। इसके माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए 249 से अधिक वीडियो, 190 वॉइस नोट्स और 159 विशिष्ट ईसीसीई गतिविधि पीडीएफ के रूप में दैनिक शिक्षण प्रॉम्प्ट भेजे जाते हैं। वहीं, 0 से 3 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था मानसिक विकास की 140 गतिविधियों वाले 14 वीडियो बनाए गए हैं, ताकि घर पर व्यवस्थित विजिट और देखभाल करने वालों की सक्रिय भागीदारी को सहायता मिल सके।
वर्तमान में, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आंगनवाड़ी और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं के लिए कौशल विकास और उद्यमिता कार्यक्रमों का कोई प्रस्ताव नहीं है।
यह जानकारी महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।
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(रिलीज़ आईडी: 2247626)
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